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भगवान शिव के आदेश पर काशी से वृंदावन आए बाबा प्रेमानंद महाराज, अस्सी घाट पर मुर्दे ने क्या कहा उनसे

सोशल मीडिया में छाए हुए बाबा प्रेमानंद लोगों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं। नियमित हजारों की तादात में लोग उनके दर्शन करने जाते हैं। उन्हें लेकर अनेक प्रकार की बातें लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आइए बताते हैं कि बाबा प्रेमानंद ने काशी छोडक़र वृंदावन जाने का फैसला क्यों किया।
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लखनऊ

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Markandey Pandey

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Updated: 23 Dec 2023, 12:34 PM IST

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बाबा प्रेमानंद

Baba Premanand: प्रेमानंद महाराज के बचपन का नाम अरविंद पाण्डेय है। वह बाल्य अवस्था से ही ईश्वर भक्ति के रंग में रंग गए और संयास ग्रहण कर लिया। अपने साधना काल में वह काफी समय तक काशी में निवास करते रहे। यहां पर निवास के दौरान भी संयास परंपरा के अनुसार वह भिक्षा मांगकर भोजन करते थे और बेहद कठिन जीवन जीते हुए ईश्वर की ध्यान साधना में लगे रहते थे। इन दिनों बाबा वृंदावन में रहते हैं जहां पर उनके भक्तों में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से लेकर क्रिकेटर और फिल्मी हस्तियां हैं। रोजाना हजारों लोग दर्शन करने आते है और रात्रि परिक्रमा के दौरान भी लोग दर्शन करने के लिए सडक़ों पर घंटों खड़े रहते हैं।

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बाबा प्रेमानंद ने काशी से वृंदावन जाने का फैसला क्यों किया इसका रहस्य वह खुद ही बताते हैं। बाबा कहते हैं कि काशी में वह अस्सी घाट पर रहा करते थे। एक दिन घनघारे बरसात हो रही थी। आसपास कई साधु बैठे हुए थे। बाबा ने देखा कि एक आदमी बरसात में लेटा हुआ है। बाबा ने सोचा कि यह कोई मुर्दा है। अस्सी घाट पर मुर्दो का होना कोई आश्चर्य वाली बात नहीं है। बाबा की नगरी में हजारों साल से अंतिम संस्कार कर लोग मोक्ष प्राप्त करने की लालसा से अपने परिजनों को लेकर आते हैं। हजारों साल से चिताएं जल रही है। बाबा ने सोचा कि यह भी कोई मुर्दा ही रखा है। लेकिन गौर से देखने पर उसमें हरकत होती हुई दिखी तो वह उसके पास चले गए। देखा कि यह कोई कुष्ठ रोगी है।

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बाबा बरसात में भींगते हुए ही उस कुष्ठ रोगी को उठा लाए। वह चलने फिरने में असमर्थ था। बाबा उसे उठाकर ले आए और उसके घाव को साफ करने लगे। बाबा कहते है कि वह कुष्ठ रोगी कोई और नहीं साक्षात भगवान शिव थे। उन्होंने दर्शन दिया और काशी से वृंदावन जाने का आदेश दिया। अपने अद्भुत अनुभव को वह शब्दों में व्यक्त कर पानेे में असमर्थ बताते हैं।

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