2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजा भैया भाजपा का देंगे साथ, कई सीटों पर दिला सकते हैं जीत

जहां मायावती होंगी वहां राजा भैया का होना मुश्किल ही नहीं असंभव है। ऐसे में राजा भैया भाजपा के साथ जाएंगे यह कहना गलत नहीं होगा।

2 min read
Google source verification
Raja Bhaiya will support BJP

राजा भैया भाजपा का देंगे साथ, कई सीटों पर दिला सकते हैं जीत

लखनऊ. भाजपा लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अपनी तैयरी अभी से शुरू कर दी है। इस बार भी भाजपा वैसे तो हर बिरादरी के वोट को अपने पक्ष में लाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन इस बार क्षत्रियों का वोट भाजपा के पक्ष में लाने का दारोमदार कुंडा से निर्दलीय विधायक राजा रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के कंधों पर होगा। अखिलेश और मायावती के बीच नजदिकियों के बाद राजा भैया का भाजपा के साथ या यू कहें कि भाजपा के लिए सपोर्ट करना ही एक बिकल्प रह गया है। सपा-बसपा गठबंधन को राजा भैया सपोर्ट नहीं करेंगे यह सभी जानते हैं।
पिछले दिनों हुए राज्यसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर का राजा भैया ने सपोर्ट नहीं किया था और उसके बाद चुनाव के दिन ही राजा भैया का सीएम योगी से मिलना इस बात की तरफ इशारा कर दिया था कि अब राजा भैया अखिलेश का नहीं बल्कि सीएम योगी का साथ देंगे। राजा भैया को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का भी करीबी माना जाता है। यूपी में कई ऐसी लोकसभा की सीटें हैं, जहां पर क्षत्रिय नेता चुनाव लड़े और जीते या यह कहें कि इन सीटों पर इस जाति का विशेष दबदबा या पकड़ है। इन सीटों पर भाजपा की नजर तो पहले से ही है।

इन वोटों पर है खास पकड़
यूपी में वैसे तो क्षत्रिय वोट लगभग छह प्रतिशत ही हैं। इन वोटों पर राजा भैया की काफी पकड़ है। वहीं क्षत्रिय लोग जहां भी या जिस क्षेत्र में हैं, उस क्षेत्र में उनका खासा प्रभाव है। यह अपने वोटों के अलावा दूसरी जातियों के वोटों पर भी अपनी पकड़ बनाए हुंए हैं। ऐसे में क्षत्रियों का वोट इस बार भाजपा को जाना तय माना जा रहा है। इस वोटों को भाजपा अपने पक्ष में लाने के जहां राजा भैया का सहारा ले सकती है तो वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ भी क्षत्रिय बिरादरी से आते हैं, उनका भी इस बिरादरी के वोटों पर काफी प्रभाव है।

इसलिए हैं लोकप्रिय
राजा भैया अपने बिरादरी में ही नहीं बल्कि अन्य बिरादरियों में भी काफी लोकप्रिय हैं। वे कुंडा से लगातार कई बार से निर्दल ही जीतते आ रहे हैं। राजा भैया केवल कुंडा तक ही सीमित नहीं है। फैजाबाद की कई विधानसभा सीटें, बलरामपुर, गोंडा आदि जिलों की कई विधानसभा सीटों पर अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में इस बार भाजपा क्षत्रिय वोटों के लिए राजा भैया का सहारा लेगी इसमें कोई दो राय नहीं है।

राजा की भी है मजबूरी

राजा भैया और मायावती के बीच छत्तीस का आंकड़ा है यह किसी से छिपा नहीं है। मायावती ने अपनी सरकार के समय राजा भैया पर शिकंजा कसा था और उनके और उनके पिता को जेल जाना पड़ा था। अब जबकि सपा और बसपा का गठबंधन हो गया है तो यह निश्वित है कि राजा भैया अखिलेश के चाहे जितने भी करीबी हों, वे सपा-बसपा गठबंधन का साथ नहीं देंगे। जहां मायावती होंगी वहां राजा भैया का होना मुश्किल ही नहीं असंभव है। ऐसे में राजा भैया भाजपा के साथ जाएंगे यह कहना गलत नहीं होगा।