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अब गांवों में खतौनी की तर्ज पर हर घर की बनेगी घरौनी, योगी सरकार ने शुरू की तैयारी

- हर घर के असली मालिकों को मिलेगा मालिकाना हक

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लखनऊ

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Neeraj Patel

Jan 30, 2021

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सभी गांव में घर है लेकिन उसका मालिकाना हक किसी के पास नहीं है। आजादी के बाद पहली बार पीएम मोदी (PM Modi) की पहल पर तैयार की गई स्वामित्व योजना ग्रामीण आबादी में बने घरों के असली मालिकों को मालिकाना हक देगी। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार की इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए पूरे प्रदेश के 75 जिलों में सर्वे शुरू करा दिया है। शुरुआती दौर में प्रत्येक जिले के 20-20 गांवों को चुना गया है जहां सर्वे शुरू किया जा चुका है। प्रदेश में खतौनी की तर्ज पर हर घरों के रिकार्ड के लिए घरौनी तैयार की जाएगी।

उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के 20-20 गांवों में स्वामित्व योजना के तहत आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सर्वे शुरू हो गया है। पहले चरण में वास्तविक ग्रामीण आबादी में मौजूदा सभी घरों, उनके क्षेत्रफल आदि का सर्वे कर घरों के मालिकों की सूची तैयार कर घरौनी बनाई जाएगी। इसके बाद सभी खातेदारों की आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद अंतिम रूप से मालिकाना हक घोषित किया जाएगा। इसके अलावा ग्रामीण आबादी में मौजूद सभी घरों की नम्बरिंग की जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा पट्टीदारों के बीच विवाद समाप्त होने के साथ ही घरों का मालिकाना हक मिलने से उन पर बैंक लोन आदि भी मिल सकेगा।

बंटवारा विवाद भी हो जाएगा खत्म

दरअसल गांवों की कृषि भूमि, ग्रामसभा, बंजर आदि भूमि का रिकार्ड तो रेवन्यू विभाग के पास होता है। कृषि भूमि का मालिकाना हक दिखाने के लिए खसरा खतौनी बनाई जाती है, लेकिन आबादी में बने घरों का मालिकाना हक के लिए कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं होता है। आबादी में जिसका कब्जा है वहीं मालिक है लेकिन इसका कानूनी मालिकाना हक किसके पास है इसका कोई रिकार्ड नहीं होता है। इसकी वजह से लोगों को तमाम परेशानियां उठानी पड़ जाती हैं। घरों का बंटवारा होने के बाद भी विवाद समाप्त नहीं होता है। इससे अदालती मुकदमें बढ़ते जा रहे हैं। इसके अलावा गांवों के घरों की यूनिक आईडी नहीं होती है। मालिकाना हक नहीं होने से घरों को बैंकों में मॉर्गेज पर नहीं रखा जा सकता है। इस योजना के तहत मालिकाना हक मिलने के बाद खतौनी की तर्ज पर घरौनी बनेगी।