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सरकार ! आखिर कब तक नाव के सहारे नदियां पार करते रहेंगे ग्रामीण, नहीं बने हैं पुल

बहराइच में सरयू नदी में नाव डूबी, छह की मौत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया मुआवजे का एलान...

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Oct 07, 2017

boat capsizes

बहराइच/लखनऊ. शनिवार सुबह सरयू नदी में नाव पलट जाने से छह लोगों की डूबकर मौत गई, जबकि नाव सवार तीन लोग किसी तरह तैरकर जान बचाने में सफल हो सके। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का एलान किया है। बहराइच जिले के रामगांव थाना क्षेत्र के बेहटाभया गांव के पास दर्दनाक हादसा शनिवार सुबह करीब पांच बजे हुआ, जब ये लोग नदी पार के लगने वाले मेटिरिया मेले से वापस घर लौट रहे थे।

एसडीएम महसी नागेन्द्र कुमार की मानें तो संपर्क मार्ग का रास्ता लंबा होने के चलते सभी नाव सवारों ने शार्टकट तरीके से जल्दी पहुंचने के लिए नाव का सहारा लिया, जिसके चलते बड़ा हादसा हुआ। हादसे के बाद एक बार फिर वही सवाल मुंहबाए खड़ा है कि आखिर नाव के सहारे ग्रामीण कब तक नदियों को पार करते रहेंगे। उत्तर प्रदेश में कई जिलों में नदियों पर पुल न होने की स्थिति में ग्रामीणों को कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। इसलिए ज्यादातर नाव से नदी पार करने की कोशिश करते हैं, जिसकी गवाही कई बड़े हादसे दे रहे हैं। इसी महीने 5 अक्टूबर को ही रोहिन नदी में नाव डूबने से चार महिलाओं की मौत हो गई थी। वे भी नाव से नदी पार करने की कोशिश कर रही थीं।

नाव ही है आवागमन का सहारा
जिला पंचायत बहराइच के दायरे में आने वाले 9 बड़े घाटों से आवागमन के लिए महज नाव ही जरिया है। इसमें चंदौली घाट, गनापुर, छठुहा घाट, कठाई घाट, केवड़ा घाट, भौरी घाट, फरुहा फरुही घाट, श्री राम औराही घाट, बरुहा घाट का नाम शामिल हैं, जहां पर लोग नाव के जरिए नदी पार करते हैं। सरयू नदी के पार जाने के लिये यहां के बाशिंदों के पास नाव के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है।

बुंदेलखंड के झांसी जिले का हाल
पारीछा के पास बेतवा नदी पार करने के लिए उजियान सहित कई गांवों के लोग हर रोज जान खतरे में डालकर नाव पर सवार होकर नदी पार करते हैं। साइकिल और मोटर साइकिल तक नाव पर रखकर लोग नदी की खतरनाक धारा को पार करते हैं। इस गांव के लोग अगर पुल से जाएं तो उन्हें लगभग 20 से 25 किमी लंबा सफर तय करना पड़ता है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस नदी पर पुल बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। नदी के एक हिस्से पर पीपा पुल बनाया गया है, लेकिन ये कुछ महीने ही उपयोग में आता है। इस तरह के पूरे बुंदेलखंड में कई स्पॉट हैं, जहां लोग जान जोखिम में डालकर पुल पार करते हैं।

तीन सालों में भी नहीं बन पाया पुल
चित्रकूट के मऊ थाना क्षेत्र में यमुना नदी पर बनने वाला पुल विगत 5 वर्षों से सिस्टम के हिचकोले खा रहा है। यह पुल जिले को कौशाम्बी से जोड़ता है। उत्तर प्रदेश सेतु निगम पिछले तीन सालों से इस पुल का निर्माण कर रहा है, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य अंतिम पड़ाव पर नहीं पहुंचा है। बड़ी संख्या में कौशाम्बी व चित्रकूट के लोग हर दिन नाव से यमुना पार करते हैं। जरा सी चूक से यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

पचपेड़ी घाट पर पुल की जरूरत
लखीमपुर-खीरी जिले में शारदा नदी पचपेड़ी घाट पर पुल नहीं बना है, जिसके चलते लोगों 35 किमी की दूरी 54 किमी में तय करनी पड़ती है। इतना ही नहीं बारिश उफनाती नदी में भी लोग नाव से ही नदी पार करते हैं। लोगों का कहना है कि पचपेड़ी घाट पर नौ किमी. लंबा पुल बन जाने से उन्हें जहां काफू सहूलियत होगी, वहीं इलाके के लोग बाढ़ की चपेट में भी आने से बच सकेंगे।

40-45 किमी का चक्कर काटना पड़ता है
गोंडा जिले के वजीरगंज से झिलाही मनकापुर जाने वाले मुख्यमार्ग का चमदई नाले पर स्थित अंग्रेजों के जमाने का बना लकड़ी का पुल एक वर्ष पूर्व ध्वस्त हो गया था। इसके कारण लोगों को 30 से 40 किमी तक चक्कर काट कर आना जाना पड़ता है। वहीं, बालपुर से परसपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित बेलाई नाले पर बने पुराने पुल के ध्वस्त हो जाने से लोगों को 10 से 15 किमी तक चक्कर लगाना पड़ता है। करोड़ों की लागत से तैयार होने वाले इन पुलों को बजट स्वीकृत हो गया है, लेकिन निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है।

मृतकों के परिजनों को मुआवजे का एलान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरयू नदी में हुई नाव दुर्घटना में 06 बच्चों और नौजवानों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 02-02 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा भी की है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के अन्तर्गत 05-05 लाख रुपए की धनराशि भी उपलब्ध करायी जाएगी।

बड़े हादसे
- 5 अक्टूबर को गोरखपुर क्षेत्र की रोहिन नदी में नाव डूबने से चार महिलाओं की मौत हो गई थी। वे भी नाव से नदी पार करने की कोशिश कर रही थीं।

- 14 सितंबर को बागपत जिले में नाव पलटने से 20 से अधिक लोगों की यमुना नदी में डूबकर मौत हो गई। इनमें ज्यादातर मजदूर थे। ये सभी काम पर जाने की जल्दी में नाव से नदी पार जाना चाहते थे।

- 22 सितंबर 2017 को बलिया जिले के सिंकदरपुर इलाके में घाघरा नदी में नाव पलट गई। नाव पर 15 लोग सवार थे। इस हादसे में एक व्यक्ति की डूबकर मौत हो गई, जबकि कई लोगों को रेस्क्यु के बाद निकाला गया।

- नवंबर 2014 में रायबरेली के सरेनी क्षेत्र में गंगा नदी में नाव पलटने से 12 लोगों डूब गए थे। श्रद्दालु गंगा नदी के दूसरे किनारे पर स्थित देवी के मंदिर दर्शन करने जा रहे थे।