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आखिर ‘सरकार’ से क्यों रूठ रहे हैं अपने, ये है कारण

एक के बाद एक लगातार बीजेपी नेताओं का सरकार से रूठना जारी है। आखिर सरकार से क्यों रूठ रहे हैं अपने, ये है कारण

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om prakash rajbhar

लखनऊ. एक के बाद एक लगातार बीजेपी नेताओं का सरकार से रूठना जारी है। कभी वे सीएम के खिलाफ पत्र लिख देते हैं तो कभी ऐसे बयान दे देते हैं जो पार्टी लाइन से एकदम हटकर होता है। पहले सरकार में सुनवाई न होने को लेकर तो अब जिन्ना के मुद्दे पर बीजेपी नेताओं के बयान चर्चा का विषय बने हुए हैं। पॉलीटिकल एक्सपर्ट्स से हमने इसके पीछे के कारण जानने की कोशिश की।

लखनऊ यूनिवर्सिटी के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर कविराज का कहना है कि बीजेपी नेताओं के बागी होने के अपने कारण हैं। वह लोकतांत्रिक प्रकिया के जरिए ही चुने गए हैं। ऐसे में उनकी अपने क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेही बनती है। अगर वह कोई लेकर सीएम तक जा रहे हैं या किसी अधिकारी को कुछ निर्देश दे रहे हैं तो इस उम्मीद से दे रहे हैं कि उस पर कार्यवाही होगी। ऐसे में अगर उनको महत्व नहीं दिया जाएगा तो वे रूठ सकते हैं।


प्रो. कविराज के मुताबिक, ''खासतौर पर अगर राजभर की बात जाए तो उनकी अलग पार्टी है इसलिए बीजेपी उसमें दखलांदाजी नहीं कर सकती । या तो वे राजभर को मना ले या हटा दे अब यही दो विकल्प हैं। वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य का जो कद विपक्ष के नेता के तौर पर था वे शायद अब मंत्री होकर भी नहीं रहा। ऐसे में उनका रूठना या अलग स्टैंड रखना लाजिमी है। उन्हें भी इस बात का अहसास होगा।''

वहीं वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ल का कहना है कि, ''राजनीति दबाव से चलती है...राजनीति का मूलमंत्र है कि कोई कितना दबाव डाल सकता है और कोई कितना सहन कर सकता है। अपनों का रूठना कोई आज की बात नहीं है। गठबंधन की सरकार में और बिना गठबंधन की सरकार में भी अपनों का रूठना चलता रहता है। हां लेकिन यहां तो रुठे हुए को मना लिया जाता है या हटा दिया जाता है। योगी सरकार को बने हुए एक साल से अधिक हो गया। आमतौर पर किसी भी सरकार का पहला साल हनीमून पीरियड माना जाता है। सीएम ने भी नहीं सोचा होगा कि इतनी जल्दी इतने बीजेपी नेता उनसे रूठ जाएंगे। इसी कारण कुछ सूत्र ये भी कहते हैं कि योगी के बढ़ते कद को घटाने के लिए ये किया जा रहा है। अब सच्चाई क्या है ये तो बीजेपी के नेता ही जानें लेकिन उनका रूठना सरकार के लिए हानिकारक हो सकता है।''

प्रदेश अध्यक्ष ने दी हिदायत

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे ने अपनी ही सरकार के खिलाफ बागी तेवर अपनाए यूपी के कैबिनेट मंत्री राजभर का नाम लिए बगैर कहा था कि वह मंत्री पद का दायित्व निभाएं और संयमित भाषा का इस्तेमाल करें नहीं तो पार्टी उनके खिलाफ उचित कदम उठाएगी। अब इस बयान पर पलटवार करते हुए राजभर ने कहा कि आखिर पांडेय को मुझ पर कार्रवाई करने से कौन रोक रहा है। साथ ही राजभर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भविष्य में बीजेपी के साथ ही रहेंगे।

जिन्ना पर अलग स्टैंड

बहराइच से भाजपा की सांसद सावित्री बाई फुले ने जिन्ना को महापुरुष करार दिया है साथ ही यह भी बताया कि आजादी की लड़ाई में जिन्ना का योगदान था। इसलिए जिन्ना की तस्वीर को जहां भी लगाए जाने की जरूरत है उस जगह पर लगाई जानी चाहिए।इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने जिन्ना की तारीफ करते हुए तस्वीर लगाने को सही ठहराया था। उन्होंने कहा था कि जिन महापुरुषों का योगदान इस राष्ट्र के निर्माण में रहा है, उन पर उंगली उठाना घटिया बात है। मौर्य ने कहा कि देश के बंटवारे से पहले इस देश में जिन्ना का भी योगदान है।

सांसद भी लिख चुके है पत्र


बीजेपी के सांसदों ने अपनी सरकार के खिलाफ ही बगावती तेवर अपना लिए थे। सोनभद्र से सांसद छोटेलाल खरवार ने मुख्यमंत्री के साथ ही प्रदेश नेतृत्व पर उपेक्षा का आरोप लगाया। वहीं, इटावा के सांसद अशोक दोहरे का आरोप है कि भारत बंद के बाद दलितों के खिलाफ पुलिस झूठे मुकदमे दर्ज कर रही है। सांसद सावित्री बाई फुले ने यूपी कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के पिछड़ों की उपेक्षा के बयान को सही बताया। उन्होंने कहा कि यह सच है पिछड़ों की उपेक्षा हो रही है। मुझे सांसद न कहकर दलित सांसद कहा जाता है।