भागवत ने कहा कि जो अपने लिए जीते हैं, वे पशु हैं। जो दूसरों के लिए जिएं और निस्वार्थ भाव से सेवा करें, वही स्वयं सेवक हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग कहते हैं कि संघ के लोग इतना काम करते हैं, लेकिन प्रचार नहीं करते। हम कहते हैं कि सेवा करने के लिए प्रचार की जरूरत नहीं है। सेवा तो हमारे सेवाभाव में है। उन्होंने कहा शिक्षा और स्वास्थ्य सभी का अधिकार है, जिसे सभी को दिलाना संघ का उद्देश्य है। हर व्यक्ति के पास रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा का सामर्थ्य होना चाहिए।