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2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की शर्त पर होगा गठबंधन, सबसे बड़ा उलटफेर

उपचुनाव में समावादी पार्टी की जीत से हुआ बड़ा उलटफेर, बने नए सियासी समीकरण...

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लखनऊ

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Nitin Srivastva

Oct 25, 2019

2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की शर्त पर होगा गठबंधन, सबसे बड़ा उलटफेर

2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की शर्त पर होगा गठबंधन, सबसे बड़ा उलटफेर

लखनऊ. लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों (Lok Sabha Election 2019 Result) के बाद जिस तरह बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर करारा हमला करते हुए गठबंधन तोड़ा था। उसका जवाब समाजवादी पार्टी (SP) ने यूपी उपचुनाव (UP Bye Election) में तीन सीटें हासिल करके दिया है। उस समय मायावती (BSP Mayawati) के आरोपों पर खामोश रहकर अखिलेश यादव (SP Akhilesh Yadav) ने बता दिया कि साल 2022 में भाजपा (BJP) का मुकाबला उनकी ही पार्टी करेगी और अगर 2022 में गठबंधन की जरूरत पड़ी तो वह भी समाजवादी पार्टी की शर्तों पर ही होगा।


उपचुनाव में सपा का डंका

दरअसल बीती 21 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की जिन 11 सीटों पर उपचुनाव (UP Upchunav) हुए थे उनमें से सपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ रामपुर (Rampur) की सीट ही जीती थी। लेकिन उपचुनाव में सपा ने न सिर्फ रामपुर सीट बचाई बल्कि बीजेपी से बाराबंकी की जैदपुर सीट और बीएसपी का मजबूत किला कहे जाने वाली जलालपुर सीट को भी छीन लिया। उपचुनाव में बीजेपी को आठ और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) को तीन सीटों पर जीत हासिल हुई है। इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी चार सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। अगर बात करें बीएसपी की तो वह एक भी सीट नहीं जीत सकी और सिर्फ अलीगढ़ की इगलास (Iglas) और जलालपुर (Jalalpur) सीट पर ही दूसरे नंबर पर आ सकी।


मायावती को अखिलेश का जवाब

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Chunav 2019) के परिणाम के बाद सपा-बसपा गठबंधन को मनमुताबिक सीटें न मिलने पर मायावती ने गठबंधन तोड़ा था। मायावती ने अखिलेश यादव पर तीखा वार करते हुए कहा था कि उनकी अपने परंपरागत यादव वोट पर ही पकड़ कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा था कि अखिलेश ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारने का भी विरोध किया। इन आरोपों के बावजूद उस समय अखिलेश ने मायावती के खिलाफ एक बयान भी नहीं दिया और वह खामोश रहे। लेकिन अब उपचुनाव के नतीजें यह साबित कर रहे हैं कि उस समय अगर सपा-बसपा का गठबंधन न होता तो मायावती (Mayawati) 10 सीटें भी नहीं जीत पाती।


अखिलेश अगर अकेले लड़ते तो बेहतर

वहीं अब राजनीतिक जानकार यह भी कह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 अगर अखिलेश (Akhilesh Yadav) अकेले लड़े होते तो नतीजा कुछ और होता। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में एक बात तो साफ हो गई कि 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का मुकाबला समाजवादी पार्टी से ही होगा। यह उपचुनाव इस लिहाज से भी जरूरी है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव (2022 Vidhan Sabha Chunav) में भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) के खिलाफ अगर गठबंधन होगा तो वह सपा की शर्तों पर होगा। उनके मुताबिक इस जीत से अखिलेश यादव मजबूत हुए हैं और पार्टी नेताओं का मनोबल बढ़ा है, लेकिन बीजेपी (BJP) से मुकाबला अभी भी मुश्किल काम है।

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