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सवर्ण, OBC संग दलितों को साधने में जुटी BJP, नए जिलाध्यक्ष बनेंगे मिशन 2024 के सारथी!

Mission 2024: 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से इन जिला अध्यक्षों के बदलाव को काफी अहम माना जा रहा है। लखनऊ से दिल्ली तक करीब दो माह की मशक्कत के बाद नई टीम में एक-एक सदस्य की तैनाती आगामी चुनाव का लक्ष्य पाने के लिए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर की गई है।

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लखनऊ

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Aman Pandey

Sep 16, 2023

selection district heads balance between-upper castes obcs and dalits for lok sabha elections 2024

बीजेपी ने यूूपी में नए जिलाध्यक्षों की लिस्ट जारी कर दी है।

BJP District President: 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से इन जिला अध्यक्षों के बदलाव को काफी अहम माना जा रहा है। लखनऊ से दिल्ली तक करीब दो माह की मशक्कत के बाद नई टीम में एक-एक सदस्य की तैनाती आगामी चुनाव का लक्ष्य पाने के लिए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर की गई है।

लोकसभा चुनाव 2024 का रण जीतने के लिए भाजपा यूपी के प्रदेश अध्‍यक्ष भूपेंद्र चौधरी आज अपनी नई टीम की घोषण कर दी है। इस बदलाव के जरिए भाजपा न केवल क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है, बल्कि जातीय समीकरणों को भी साधने पर उसका फोकस रहा है।

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2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से इन जिला अध्यक्षों के बदलाव को काफी अहम माना जा रहा है। लखनऊ से दिल्ली तक करीब दो माह की मशक्कत के बाद नई टीम में एक-एक सदस्य की तैनाती आगामी चुनाव का लक्ष्य पाने के लिए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर की गई है। जिलाध्यक्षों की लिस्ट को बीजेपी के नजरिये से 2024 का चुनावी ट्रेलर माना जा रहा है।


सवर्णों को साधने की कोशिश

बीजेपी ने संगठन के लिहाज से 75 जिलों में 98 पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किए हैं। अगन नए जिलाध्यक्षों की सूची पर गौर करें तो इसमें 21 ब्राह्मणों को जिलों की जिम्‍मेदारी दी गई है। इसके अलावा 20 क्षत्रिय नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। वैश्य बिरादरी के 8 और 5 कायस्थ नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। भूमिहार समाज से 3 नेताओं को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में सवर्ण वोट 18-20% है। इनमें ब्राह्मण 8-9%, राजपूत वोटर्स 4-5%, वैश्य मतदाता 3-4% और त्यागी-भूमिहार मिलाकर करीब 2% वोटर हैं।

बीजेपी ने ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य और भूमिहार समेत सवर्णों के हर वर्ग को जिले में नेतृत्व दिया है। ऐसा करने की दो बड़ी वजह है। एक तो ये कि सभी बिरादरियां अपनी हिस्सेदारी के मुकाबले भागीदारी देख लें।

सबको साथ लेकर चलने का संदेश

यानी जिनकी जितनी संख्या है, वो उसके हिसाब से अपनी बिरादरी को मिले नेतृत्व का आकलन करके संतुष्ट हो जाए। दूसरी बड़ी वजह ये है कि हर बिरादरी को जिलों की कमान सौंपने से प्रदेशव्यापी संदेश जाएगा कि सबको साथ लेकर चलने की रणनीति के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां हुई हैं।

पिछड़े और OBC दांव

बीजेपी ने OBC के कार्यकर्ताओं को सबसे ज्याद जिलाध्यक्ष बनाया है। इस बार 36 पिछड़ी जाति के जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। ऐसा 2024 के चुनाव में ओबीसी के वोट बैंक को देखते हुए किया गया है। यूपी में 42-45% वोटबैंक OBC का है। इनमें यादव 10%, लोधी 3-4%, कुर्मी 4-5%, मौर्य 4-5% और अन्य 21% हैं।

दलित वोटबैंक को खिंचने की कोशिश

पिछड़ों की तरह बीजेपी ने दलित बिरादरी पर भी ठीकठाक दांव लगाने की कोशिश की है। दलित जाति के 5 नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया है. वोटबैंक की बात करें तो यूपी में दलितों के 21-22% वोटर हैं। इनमें सबसे ज्यादा जाटव 14% और गैर जाटव 8% हैं। सबसे ज्यादा जोर इस बार दलित वोटबैंक को अपनी ओर खींचने पर है।