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जानिए – शरीयत कोर्ट क्या हैं ?

शरीयत कोर्ट क्या हैं और इस अदालत में क्या होता है।
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लखनऊ

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Mahendra Pratap Singh

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Updated: 16 Jul 2018, 12:19 PM IST

shariat court kya hai

जानिए - शरीयत कोर्ट क्या हैं ?

लखनऊ. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में केवल 10 शरीयत अदालतों (दारुल कजा) को खोलनो की मंजूरी दी है। समिति बैठक में हलाला का समर्थन करने के साथ ही इस्लामिक कानून की जानकारी देने के लिए उत्तर प्रदेश सहित देश भर में शरीयत क्लास लगाने की घोषणा भी की गई है।

शरीयत कोर्ट क्या है

शरीयत कोर्ट (दारुल कजा) एक ऐसी अदालत हैं जहां केवल इस्लाम धर्म के मुसलमान लोगों के मामलों व विवादों का निपटारा किया जाता है। इस कोर्ट में इस्लामिक समाज की समस्‍याएं शरीयत कानून के बनाए गए नियमों अनुसार हल की जाती हैं। इसमें इस्लामिक लोगों के विवादों का निपटारा किया जाता है। शरीयत कानून से इस्लाम धर्म के मुसलमानों के लिए उनके घरेलू से लेकर राजनैतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव भी पड़ता है। जहां इस्लामिक समाज के लोगों के विवाद का निपटारा हो और उन लोगों को जहां शरीयत कानून के अनुसार लोगों को न्याय दिया जाए और दोषियों को सजा दी जाए। उसे शरीयत कोर्ट कहा जाता है।

बताया जाता है कि शरीयत उस नीति को कहा जाता है, जो इस्लामी कानूनी परम्पराओं और इस्लामी व्यक्तिगत और नैतिक आचरणों पर आधारित होती है। इस्लामिक कानून की चार प्रमुख संस्थाएं, हनफिय्या, मलिकिय्या, शफिय्या और हनबलिय्या है, जो कुरान की आयतों और इस्लामिक समाज के नियमों की अलग-अलग तरह से बखान करते हैं। ये सभी संस्थाएं अलग-अलग सदियों में विकसित की गई थी और बाद में मुस्लिम देशों ने अपने मुताबिक इन संस्थाओं के कानूनों को अपना लिया है।

शरीयत कोर्ट कोई समानांतर अदालत नहीं है

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव और वरिष्ठ वकील जफरयाब जिलानी ने कहा है कि शरीयत कोर्ट केवल उन जिलों में खोली जाएगी जहां ऐसी कोर्ट की सबसे ज्यादा आवश्यकता होगी और जहां इसकी मांग की जा रही है। दारुल कजा (शरीयत कोर्ट) देश की न्यायिक व्यवस्था के तहत आने वाले कोर्ट की तरह नहीं है यानी शरीयत कोर्ट कोई समानांतर अदालत नहीं है। इसमें केवल इस्लामिक कानून द्वारा बनाए गए नियमों के आधार पर लोगों को न्याय दिया जाता है।