
राष्ट्रपति चुनाव को लेकर यूपी के राजनीतिक गलियारों में माहौल बेहद गर्म है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) सुप्रीमो शिवपाल सिंह यादव ने कहाकि, वे राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को अपना वोट देंगे। उन्होंने बताया कि, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मुझे न्योता आया तो मैं डिनर में गया था। इस अवसर पर सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव ने एनडीए की राष्ट्रपति पद प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में खड़े होने के राज का खुलासा भी किया। समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव से गठबंधन को लेकर शिवपाल ने कहाकि, अखिलेश यादव में राजनीतिक परिपक्वता की कमी है। शिवपाल ने द्रौपदी मुर्मू को प्रत्याशी बनाने पर पीएम मोदी की तारीफ भी की।
शिवपाल ने पीएम मोदी की तारीफ की
शिवपाल यादव ने आज समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए एनडीए की प्रत्याशी को ही वोट देने का ऐलान किया है। उन्होंने आज द्रौपदी मुर्मू को वोट देने के पीछे की कहानी का भी खुलासा किया। साथ ही आगे की रणनीति भी साझा की और अखिलेश यादव पर कई हमले किए। यहां तक कहा कि उनमें परिपक्वता की कमी है। इससे पार्टी कमजोर हो रही है। शिवपाल ने द्रौपदी मुर्मू को प्रत्याशी बनाने पर पीएम मोदी की तारीफ भी की।
यशवंत सिन्हा की बैठक में नहीं बलाया
एक चैनल से वार्ता में शिवपाल यादव ने कहाकि, विधानसभा चुनाव 2022 में मैं समाजवादी पार्टी के टिकट पर ही विधायक बना हूं। इसके बावजूद समाजवादी पार्टी की किसी बैठक में मुझे नहीं बुलाया जाता है। यहां तक कि राष्ट्रपति पद के विपक्ष के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा की बैठक में भी मुझे नहीं बुलाया गया। आगे की रणनीति पर शिवपाल ने कहाकि, अब तो समाजवादी पार्टी की तरफ से किसी बैठक या आयोजन में बुलाया नहीं जाता है। इसे लेकर कई बार शिकायत भी कर चुका हूं। ऐसे में साथियों से मिलकर आगे के लिए कोई निर्णय लिया जाएगा।
योगी जी ने मुझसे मांगा वोट
शिवपाल ने कहा कि शुक्रवार को सीएम योगी ने बुलाया तो उनके निमंत्रण पर द्रौपदी मुर्मू के डिनर में गया था। योगी जी ने मुझसे वोट मांगा। इसके बाद मैंने तय किया है कि द्रौपदी मुर्मू को ही वोट दूंगा। पीएम मोदी की तारीफ करते हुए शिवपाल यादव ने कहाकि, उन्होंने लोकतंत्र को मजूबत करने के लिए द्रौपदी मुर्मू को प्रत्याशी बनाया है।
राजनीति में परिपक्वता की कमी
सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर के गठबंधन से बाहर होने की आशंका पर शिवपाल यादव ने कहाकि, जब राजनीति में परिपक्वता की कमी होती है तो सहयोगी इस तरह के निर्णय लेते हैं। सहयोगियों से बात नहीं करने से लोग छोड़ते चले जाते हैं। इससे पार्टी कमजोर होती जाती है। उनका इशारा साफ था की राजभर भी अब सपा से दूर हो चुके हैं।
Published on:
09 Jul 2022 12:09 pm
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