
लखनऊ. एक सामान्य इंसान औसतन हर रोज 40 मिनट से अधिक हँसता और खिलखिलाता था लेकिन अब वह 10 मिनट भी मुश्किल से ही हंस पाता है। बदलती जीवनशैली, जीवन में कड़ी प्रतिस्पर्धा और तनाव भरी दिनचर्या और जीवन से बढ़ता असंतोष सहित कई ऐसे कारण है जो लोगों के चेहरे से हंसी और मुस्कान गायब कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों को हंसाने के लिए शहरों में लॉफ्टर क्लब तक शुरू किये गए हैं। टेलीविजन चैनलों पर हंसाने के लिए कई कार्यक्रम चल रहे हैं जिनकी हर रोज डिमांड बढ़ रही है।
अब हंसी की पाठशालाएं
चेहरे से गुम होती हंसी के बीच अब हंसी वापस लाने के लिए पाठशालाएं तक संचालित होने लगी हैं। राजधानी लखनऊ की ज्यादातर पॉश कालोनियों के पार्कों में सुबह संचालित होने वाले लॉफ्टर शिविरों में सिर्फ उम्रदराज पुरुषों की ही नहीं बल्कि महिलाओं और युवाओं की भी हिस्सेदारी देखी जा सकती है। इन शिविरों में 100 से लेकर 300 तक के करीब लोग एक साथ जुटते हैं और खुलकर ठहाके लगाते हैं। बीमारियों और अवसाद को खत्म करने के मकसद से ठहाके लगाते लोग सुबह के समय ज्यादातर पार्कों में दिखाई दे जाते हैं।
क्यों लापता हुई मुस्कान
आख़िरकार लोगों के चेहरों से हंसी क्यों गायब हो रही है, जानकर इसके कई कारण बताते हैं। इन कारणों से लोग हर रोज रूबरू होते हैं लेकिन व्यस्तता और भागमभाग में उन कारणों को महसूस ही नहीं कर पाते। ये पांच कारण हैं जो इंसान के चेहरे से हंसी गायब करने के प्रमुख कारण बन रहे हैं
- बिखरते और एकल होते परिवार
- बेरोजगारी और असफलता
- जीवन के सभी क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
- जीवन में उन्नति की चाह में बढ़ता असंतोष
- दिखावे की प्रवृत्ति और भौतिक संसाधन जुटाने की प्रतिस्पर्धा
कैसे लौटेगी खिलखिलाहट
एक ओर जहां लोगों के चेहरे से हंसी गायब हो रही है तो दूसरी ओर इस समस्या को काबू में लाने के भी प्रयास हो रहे हैं। भले ही गुम होती हंसी एक चुनौती साबित हो रही हो लेकिन कुछ उपायों के सहारे हंसी बरक़रार भी रखी जा सकती है।
- परिवार के लोगों से नियमित संवाद
- योगा और व्यायाम का सहारा
- दिखावे की प्रवृत्ति से दूरी
- सकारात्मक विचार के लोगों की संगत
- काम के दौरान समय-समय पर ब्रेक लेते रहना
हंसने से होती है दिल की मसाज
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के डॉक्टर समीर मिश्रा कहते हैं कि हंसने से जबरन फेफड़ों से हवा निकलती है। इससे लंग्स साफ हो जाते हैं और उनकी क्षमता बढ़ती है। इसके साथ ही फेफड़े पूरी तरह फैलते और संकुचित होते हैं तो उससे दिल की मसाज हो जाती है और वह बेहतर तरीके से काम करने लगता है। हंसने से स्ट्रेस का स्तर भी घट जाता है।
क्या कहते हैं जानकार
पिछले बीस सालों से लखनऊ के इंदिरा नगर में हास्य की पाठशाला चला रहे शिवाराम मिश्रा कहते हैं कि उनके हास्य शिविर में औसतन 100 से 150 लोग आते हैं। गर्मी की छुट्टियों में औसतन 300 लोग हास्य शिविर में हिस्सा लेते हैं। इन शिविरों में बच्चे, युवा और महिलाएं भी हिस्सा लेती हैं। मिश्रा कहते हैं कि हंसी के गायब होने का सबसे बड़ा कारण है असंतोष। जीवन में तरक्की बहुत जरूरी है लेकिन इसका कोई स्टॉप पॉइंट भी होना चाहिए। उसके बिना तनाव और अवसाद खत्म नहीं होगा और हंसी वापस नहीं लौटेगी।
हंसी लापता होने से क्या-क्या बढ़ी दिक्कतें
हंसी के लापता होने के पीछे कई कारण हैं तो हंसी गायब होने से पैदा होने वाली समस्याएं भी कई तरह की हैं। हंसी गायब होने का नतीजा है कि लोग कई तरह की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मानसिक अवसाद, ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज जैसी कई समस्याएं इंसान को अपनी चपेट में ले रही हैं। ऐसे में जीवन में स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए जरूरी है कि हंसने-हंसाने की आदत को बचाये रखा जाये।

Published on:
10 Jan 2018 03:04 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
