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शिक्षा विभाग का गजब मजाक, आरटीई के तहत बना दी 9 हजार बच्चों की लिस्ट, लेकिन प्रवेश के लिए भटक रहे बच्चे

Right to Education: बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रदेश सरकार द्वारा संचालित राइट टू एजूकेशन से छात्रों को दाखिला नहीं मिल रहा, लेकिन भविष्य जरूर खतरे में हैं। विभाग ने लखनऊ में 9 हजार छात्रों की सूची जारी कर दी पर स्कूलों ने एडमिशन देने से इंकार कर दिया।
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लखनऊ

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Snigdha Singh

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Updated: 20 Apr 2022, 4:34 PM IST

Students not Getting Admission by Right to Education

Students not Getting Admission by Right to Education

राइट टू एजुकेशन के तहत स्कूलों में दाखिला कराने को लेकर विभाग बच्चों के भविष्य के साथ गजब खिलवाड़ कर रहा है। लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश में आरटीई के तहत बच्चों को मिलने वाले एडमिशन का मामला अभी तक साफ नहीं हुआ। बच्चे और उनके अभिभावक शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों में एडमिशन के लिए दौड़ लगा रहा हैं। स्कूल की लिस्ट में नाम आने के बावजूद बच्चों एडमिशन नहीं मिल रहा। वहीं, शिक्षा विभाग के पास करोड़ों का बजट बकाया होने की बात कहकर स्कूल भी प्रवेश देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में बच्चों के प्रवेश बीच में अटक गए हैं।

हर बच्चे को बेहतर शिक्षा का अधिकार है। इसके अंतर्गत प्रदेश सरकार द्वारा हर साल राइट टू एजुकेशन के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को स्कूलों में दाखिला मिलता है। ऐसे बच्चे निजी स्कूलों में भी एडमिशन के लिए अप्लाई करते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग उन बच्चों की लिस्ट जारी कर प्राइवेट स्कूलों को भेजता है। लेकिन प्रदेश में इस प्रक्रिया के बाद 9 हजार से अधिक बच्चों के एडमिशन स्कूल प्रशासन द्वारा नहीं लिए जा रहे हैं। स्कूलों का आरोप है कि फीस के करोड़ों रुपए शिक्षा विभाग पर बकाया हैं, जिसकी वजह से स्कूल बच्चों को प्रवेश देने से इंकार कर रहे हैं।

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ये है प्रदेश की राजधानी लखनऊ की स्थिति
इस शैक्षिक वर्ष में लखनऊ में 13000 बच्चों ने आरटीई के तहत एडमिशन के लिए अप्लाई किया था। इसमें 9000 बच्चों को शॉर्टलिस्ट करके 750 स्कूलों में एडमिशन के लिए भेजा गया। लेकिन स्कूलों में पहुंचने वाले बच्चों को स्कूल एडमिशन नहीं दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग की तरह से प्रति बच्चा 500 रुपये प्रति महीना बेसिक शिक्षा विभाग जमा करता है। हर बच्चे पर विभाग स्कूल को सालभर में तकरीबन 6000 देता है, जिसका बजट उत्तर प्रदेश सरकार देती है। लेकिन फिर भी स्कूलों तक नहीं पहुंचा।

क्या कहती हैं रिपोर्ट्स

अगर रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले 3 सालों से उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा विभाग को इसका बजट नहीं दिया है। इसकी वजह से तकरीबन 197 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश सरकार पर बकाया है। आरटीई की इंचार्ज रेनू कश्यप बताती है कि अब तक इस मद में शिक्षा विभाग को सिर्फ चार करोड़ रुपये मिले हैं। ऐसी फसाद की जड़ में बीच में बच्चों का भविष्य लटक कर रह गया।

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