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कहीं खेती चौपट, कहीं व्यापार का सत्यानाश, तीन दिन में 8 लोग हो गए जीवन से हताश

-24 घंटे में तीन किसानों ने की आत्महत्या-कोई रेल के आगे कटा, तो किसी ने खा लिया सल्फास-सरकार किसानों की मौत को नहीं मान रही आत्महत्या-विपक्ष को मिला, मसाला, राजनीति शुरू

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Jun 06, 2020

कहीं खेती चौपट, कहीं व्यापार का सत्यानाश, तीन दिन में 8 लोग हो गए जीवन से हताश

यूपी में बीते 24 घंटे में 3 किसानों ने फसलें बर्बाद होने पर आत्महत्या कर ली। जबकि, तीन दिन में 5 अन्य लोगों ने व्यापार में नुकसान और अन्य वजहों से सुसाइड कर लिया

हरिओम द्विवेदी

पत्रिका इन्डेप्थ स्टोरी
लखनऊ. अनलॉक-1 में आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने तमाम तरह की छूट दी है। आम जन और किसानों के लिए तमाम सहूलियतों की घोषणाएं की गयी हैं। बावजूद इसके कृषि और कारोबार चौपट होने की वजह से अवसाद में आत्महत्याओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। यूपी में बीते 24 घंटे में 3 किसानों ने फसलें बर्बाद होने पर आत्महत्या कर ली। जबकि, तीन दिन में 5 अन्य लोगों ने व्यापार में नुकसान और अन्य वजहों से सुसाइड कर लिया। हालांकि राज्य सरकार किसानों की आत्महत्या को खेती से जुड़ा नहीं मान रही है। इस बीच यूपी में खुदकुशी के बढ़ते मामलों पर राजनीति भी शुरू हो गयी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस मामले में प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

गेंहू,आलू की फसल बर्बाद, दे दी जान
औरैया में किसान की मौत बहुत दुखदायी है। यहां के रुरुकला गांव में एक युवक ने अपनी मां और बुआ को जहर देने के बाद खुद भी जहर खाकर जान दे दी। दो की मौत हो गयी जबकि, बुआ गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। पुलिस ने अभी आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं किया है। लेकिन, स्थानीय लोगों का कहना है कि फसल चौपट होने के बाद युवक कर्ज में इतना दबा था कि सुसाइड के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था। युवक ने जमीन बटाई पर ली थी, जिसमें गेहूं व आलू की फसल लगाई थी, लेकिन बेमौसम बारिश फसल चौपट हो गयी थी। किसान कर्जदार हो गया और सुसाइड कर लिया। चर्चा यह भी है कि किसान शराबी थी। इसलिए भी कर्जा ले रखा था। कुछ दिनों पहले उसने अपना मकान भी बेच दिया था। बहरहाल, सीओ मुकेश कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

गन्ना पर्ची नहीं मिली तो लटक गया पेड़ से
मुजफ्फरनगर के थाना भौंरा कला क्षेत्र के कस्बा सिसौली में गुरुवार शाम किसान ओमपाल (46) ने खेत में ही पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली। आरोप है कि चीनी मिल ने किसान को पर्ची नहीं दी। जबकि उसकी गन्ने की फसल खेत में खड़ी थी। किसान का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। तनाव में आकर सुसाइड कर लिया। हालांकि, जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे का कहना है किसान की आत्महत्या के पीछे शुगर मिल में तौल पर्ची का कोई मामला नहीं है। गन्ना पर्ची को लेकर आत्महत्या की बात गलत है। इस मामले ने किसानों ने शनिवार को धरना प्रदर्शन भी किया।

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परिवार के लिए कुछ न कर पाया, ऊब गया हूं जिंदगी से
बाराबंकी के सफेदाबाद थाना क्षेत्र में शुक्रवार को कर्ज में डूबे युवक ने पत्नी और तीन बच्चों की जान लेकर खुद सुसाइड कर लिया। उसने जो सुसाइड नोट छोड़ा है उसमें आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ तले दबा होने का जिक्र है। लिखा है... जिंदगी से ऊब गया हूं। इस कारण सुसाइड कर रहा हूं। बताया जाता है कि युवक का मोबाइल का कारोबार नहीं चल पाया तो गैराज खोल लिया। लेकिन लॉकडाउन में वह भी ठप हो गया। इसके बाद आत्महत्या कर ली। पुलिस मामले की तहकीकात में जुटी है।

घर नहीं चला पा रहा, इसलिए जान दे रहा
लखीमपुर खीरी के मैगलगंज थाना क्षेत्र में 29 मई को खखरा नई बस्ती निवासी भानु प्रकाश गुप्ता ने आर्थिक तंगी के चलते श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन के नीचे आकर अपनी जान दे दी थी। रेलवे पुलिस को मृतक की जेब में एक सुसाइड नोट मिला था। जिसमें उसने अपनी गरीबी और आर्थिक तंगी का हवाला दिया था। लिखा था घर नहीं चला पा रहा इसलिए जान दे रहा हूं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीडि़त परिवार को एक लाख रुपए की आर्थिक मदद भिजवाई।

मौतों पर शुरू हो गई राजनीति
लोगों के खाने-कमाने का इंतजार करे सरकार : अखिलेश यादव
बाराबंकी की घटना पर अखिलेश यादव ने ट्वीट किया। भाजपा सरकार से अपेक्षा है लोगों के खाने और कमाने का इंतजाम करे। जबकि औरैया की घटना पर ट्वीट करते हुए कहा-भुखमरी तले मां बेटे की आत्महत्या सरकार की गलत नीतियों और फाइलों में कैद योजनाओं का नतीजा है।

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किसान परिवारों पर क्या बीत रही होगी? प्रियंका गांधी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मुजफ्फरनगर की घटना पर ट्वीट करते हुए कहा भाजपा का दावा था 14 दिनों में गन्ना किसानों का पूरा भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन हजारों करोड़ रुपया दबाकर चीनी मिलें बंद हैं। सोचें-आर्थिक तंगी में गन्ना भुगतान न पाने वाले किसान परिवारों पर क्या बीत रही होगी।

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