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मेडिकल कॉलेज के रद्द लाइसेंस को बहाल करने में घूसखोरी, सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ संविधान पीठ करेगी सुनवाई

लखनऊ स्थित प्रसाद मेडिकल कॉलेज का निरस्त लाइसेंस बहाल कराने के नाम पर रिश्वत लिए जाने का आरोप है।
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लखनऊ

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Laxmi Narayan

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Nov 10, 2017

Supreme Court of India

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जिस मामले में जजों के नाम पर रिश्वत लिए जाने के लिए जजों की संविधान पीठ का गठन किया है, वह मामला लखनऊ के प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज से जुड़ा है। लखनऊ स्थित प्रसाद मेडिकल कॉलेज का निरस्त लाइसेंस बहाल कराने के नाम पर रिश्वत लिए जाने का आरोप है। आरोप है कि इंस्टीट्यूट का रद्द लाइसेंस बहाल कराने के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के जज के नाम पर रिश्वत लिया गया। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के लिए वरिष्ठम जजों की पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन किया गया है।

13 नवंबर से होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में सीबीआई की एफआईआर को आधार बनाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कामिनी जायसवाल ने इस मामले की सुनवाई का आग्रह किया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न इस मामले की जांच के लिए पूर्व जज की अध्यक्षता में एक एसआईटी का गठन किया जाए, जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो। इस पूरे मामले की सुनवाई संविधान पीठ 13 नवंबर से शुरू करेगी।

पूर्व जज को भेजा जा चुका है जेल

दायर याचिका में हाईकोर्ट के पूर्व जज इशरत मसरूर कुद्दुसी का नाम सामने आया है। कुद्दुसी पर सुप्रीम कोर्ट के जज के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप है। सीबीआई कुद्दुसी के अलावा इंस्टीट्यूट के मालिक बीपी यादव, उनके बेटे पलाश यादव, बिचौलिए विश्वनाथ अग्रवाल, भावना पांडेय, हवाला आपरेटर राम देव सारस्वत को पूर्व में गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी ने नई दिल्ली, लखनऊ और भुवनेश्वर स्थित ठिकानों पर छापे मारे थे। छापेमारी में 1.91 करोड़ रूपये की बरामदगी हुई थी।

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