
विदेश मंत्रालय के नए नियम बने तन्वी-अनस के लिए ढाल, हुआ पासपोर्ट विवाद का अंत
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के चर्चित पासपोर्ट विवाद का आखिरकार अंत हो गया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नए नियम तन्वी सेठ और अनस सिद्दीकी के लिए ढाल बन गए। काफी विवाद के बाद आखिर तन्वी और अनस को पासपोर्ट जारी कर दिया गया। लखनऊ ऑफिस ने साफ कर दिया है कि तन्वी और अनस के पासपोर्ट रद्द नहीं किए जाएंगे। नए नियम के मुताबिक पासपोर्ट बनवाने के लिए पते का सत्यापन होना जरूरी नहीं है।
तन्वी और अनस को मिली क्लीन चिट
इस बारे में रीजनल पासपोर्ट अफसर पीयूष वर्मा ने कहा कि नए नियम के अनुसार अब आवेदक का उसी शहर में रहना अनिवार्य नहीं है। अगर आवेदक संबंधित पीएसके क्षेत्र का मूल निवासी है, तो वह उस पते से आवेदन कर सकता है। तन्वी और अनस के खिलाफ कोई भी एडवर्स रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की गयी थी। ऐसे में इनका पासपोर्ट रद्द नहीं किया जा सकता है। अब क्योंकि तन्वी और अनस को पासपोर्ट मामले में क्लीन चिट मिल गयी है, तो ऐसे में न तो उनको कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और न ही पासपोर्ट निरस्त किए जाएंगे।
नए नियम के अनुसार इन बातों का रखना है ध्यान
विदेश मंत्रालय के नए नियम के अनुसार सिर्फ दो बिंदुओं का सत्यापन होना जरूरी है। एक आवेदक की नागरिकता और दूसरा ये कि उस पर कोई आपराधिक केस न दर्ज किया गया हो। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक नोएडा में रहने वाले तन्वी और अनस भारतीय भी हैं और दोनों पर कोई आपराधिक केस भी दर्ज नहीं है। पीयूष वर्मा ने साफ कहा है कि एक जून से नए नियम बनाए गए हैं, जिसके मुताबिक किसी व्यक्ति के पते पर एडवर्स रिपोर्ट दाखिल नहीं हो सकती है।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद
तन्वी और अनस का पासपोर्ट विवाद सोशल मीडिया से शुरू हुआ, जब 21 जून को तन्वी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्विट कर अधिकारी विकास मिश्रा के खिलाफ बात कही। तन्वी के कहा था कि अधिकारी विकास मिश्रा उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास मिश्रा धर्म टिप्पणी कर रहे हैं, जिसके बाद विदेश मंत्री के एक अधिकारी ने हस्तक्षेप करते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को कार्रवाई करते हुए कहा था। इसके बाद 22 जून को पीयूष वर्मा ने एक घंटे के भीतर दोनों का पासपोर्ट बनवा कर दे दिया।
Published on:
04 Jul 2018 06:59 pm
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