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कानपुर. गंगा मैया का सौंदर्य निखारने के लिए परदेसी सपूतों ने हाथ बढ़ाया है। भारत की माटी से रिश्ता रखने वाले बिजनेस घरानों ने गंगा की सफाई और किनारों को विकसित करने का जिम्मा स्वीकार कर लिया है। कानपुर क्षेत्र में गंगा को निर्मल बनाने का काम अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनी के मालिक रवि मल्होत्रा करेंगे, जबकि पटना इलाके में यह जिम्मेदारी मेदांता समूह के अनिल अग्रवाल के हिस्से आई है। इसके अतिरिक्त कई अन्य परदेसी भारतवंशियों ने गंगा के किनारे के छोटे-छोटे क्षेत्र को विकसित करने के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेने का फैसला किया है। प्रारंभिक योजना के मुताबिक, गंगाजल को निर्मल करने के साथ ही सभी बड़े शहरों में खूबसूरत रिवर फ्रंट बनाए जाएंगे। इसके साथ ही नदी के संपूर्ण बहाव क्षेत्र में दोनों छोर पर पौधे रोपे जाएंगे।
बिठूर से जाजमऊ तक बनेगा रिवर फ्रंट
गंगा को निर्मल बनाने के साथ ही खूबसूरत बनाने के लिए तय किया गया है कि सभी प्रमुख बड़े शहरों में नदी किनारे खूबसूरत रिवर फ्रंट बनाए जाएंगे। रिवर फ्रंट में पार्क, फव्वारों, लाइटिंग के साथ-साथ पिकनिक स्पॉट भी होंगे। इसके साथ ही चुनिंदा स्थानों पर गंगा की लहरों पर लेजर शो भी लुभाएंगे। कानपुर में बिठूर से जाजमऊ तक रिवर फ्रंट बनाया जाएगा। इसके लिए लंदन के निवासी भारतवंशी रवि मेहरोत्रा ने जिम्मा संभाला है। नदी में कचरा और सीवर का पानी गिरने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की योजना पर काम जारी है। उम्मीद है कि वर्ष 2019 तक कानपुर के इलाके से गंगा में प्रदूषण मिलना बंद हो जाएगा।
दुनिया के बड़े शिपिंग बिजनेसमैन हैं रवि
रवि मेहरोत्रा यूं तो कानपुर के लिए अनजाना नाम है, लेकिन दुनिया में रवि का नाम सबसे बड़े शिपिंग बिजनेसमैन के रूप में विख्यात है। वर्ष 2971 से 1975 तक मुंबई में शिपिंग का काम करने वाले रवि मेहरोत्रा को इंदिरा गांधी सरकार ने ईरान में लौह अयस्क सप्लाई करने वाले ग्रुप में शामिल किया तो रवि ने फिर पीछे मुडकऱ नहीं देखा। ईरान में कंपनी का दफ्तर खोलने के बाद रवि आगे बढ़ते गए। आज लंदन की ब्रिज स्ट्रीट में मुख्यालय स्थापित करने वाली रवि मेहरोत्रा की फोरसाइट शिपिंग कंपनी का अमेरिका, मॉरीशस, स्विटजरलैंड सहित कई देशों में काराबोर है।
नाखुश केंद्र अब पीपीपी मोड पर काम करेगा
गंगा के निर्मलीकरण के लिए केंद्र सरकार ने 95 बड़े प्रोजेक्ट बनाए हैं, जबकि 80 अन्य छोटे प्रोजेक्ट हैं। गंगा सफाई के मिशन में राज्य सरकारों की भूमिका से केंद्र सरकार खुश नहीं है। ऐसे में तय किया गया है कि गंगा से भावनात्मक लगाव रखने वाले उद्योगपतियों तथा एनआरआई को गंगा निर्मलीकरण अभियान से जोड़ा जाएगा। इसके अतिरिक्त बड़े प्रोजेक्ट को पीपीपी मोड के जरिए पूरा कराया जाएगा। ऐसे में रिवर फ्रंट विकसित करने वाली कंपनी प्रवेश-पार्किंग शुल्क के जरिए लागत वसूली करेंगी।
गंगा किनारे हरियाली, गांव भी खुशहाल होंगे
गंगा निर्मलीकरण विभाग के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, गंगा के संपूर्ण बहाव क्षेत्र यानी हरिद्वार से गंगासागर तक नदी के दोनों छोर पर हरियाली रोपी जाएगी। इसके साथ ही गंगा में प्रदूषण को रोकने के लिए नदी के किनारे आबाद 4500 गांवों को विकसित किया जाएगा। गांवों में शौचालय, सीवर व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था मुहैया कराने के साथ-साथ खेतों की उर्वरा को बढ़ाने के लिए भी योजनाएं बनेंगी।
Published on:
30 Nov 2017 01:42 pm
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