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जानिए कौन है रेखा, जिन्होंने परिवार का साथ मिलने पर बढ़ाया मान

सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण यूपी सहित पूरे भारत में प्रशिक्षित नर्सो की संख्या में काफी सुधार हुआ

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लखनऊ

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Neeraj Patel

May 11, 2019

Untold story of Nurse Rekha Shukla on International Nursing Day 2019

जानिए कौन है रेखा, जिन्होंने परिवार का साथ मिलने पर बढ़ाया मान

लखनऊ. अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस हरसाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर 12 मई को मनाया जाता है। यूपी सहित पूरे भारत में विदेशों के लिए नर्सो के पलायन में पहले की अपेक्षा काफी कमी आई है लेकिन रोगी और नर्स के अनुपात में अभी भी भारी संख्या में अंतर देखने को मिल रहा है।

लखनऊ की रहने वाली नर्स रेखा शुक्ला ने बताया है कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण यूपी सहित पूरे भारत में प्रशिक्षित नर्सो की संख्या में काफी सुधार हुआ है। पहले कुछ प्रशिक्षित नर्से अच्छे वेतन और सुविधाओं के लिए बड़ी संख्या में विदेश को जाती थी लेकिन सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण आज उनकी संख्या में कमी काफी आई है। रोगियों की संख्या में लगातार वृद्धि होने के कारण रोगी और नर्स के अनुपात में भी अंतर देखने के मिल रहा है।

सरकारी अस्पतालों में नर्सो को छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही वेतन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। जिससे उनकी परिस्थितियों में भी काफी सुधार देखने को मिला है। जिससे भारत से नर्सो का पलायन काफी हद तक रूक गया है। लेकिन यूपी सहित कई राज्यों और गैर सरकारी क्षेत्रों में आज भी नर्सो की हालत कुछ ठीक नहीं है। वह लंबे समय तक कार्य करती है और उनको वे सुविधाएं नहीं मिल रही है, जिनकी वह पूरी तरह से हकदार हैं।

जानिए कौन हैं नर्स रेखा शुक्ला

नर्स रेखा शुक्ला लखनऊ की रहने वाली हैं। उन्हें बतौर नर्स का काम करते हुये लगभग 18 साल बीत चुके हैं। पिछले 12 सालों से वह काकोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर स्टाफ नर्स के पद पर काम कर रही हैं। रेखा को मण्डल स्तर पर सिफ्सा द्वारा व जिला स्तर पर मुख्य चिकित्साधिकारी, लखनऊ द्वारा प्रसव पश्चात कॉपर टी(पीपीआईयूसीडी) लगवाने के लिये पुरस्कृत भी किया गया है।

चिकित्सा अधीक्षक के अनुसार, रेखा के परिवार में पति, 2 लड़कियां व एक लड़का भी है। वह डॉक्टर बनना चाहती थी व अपने अंकल से बहुत प्रभावित भी थीं जो कि एक डॉक्टर थे लेकिन पिता की मृत्यु जल्दी हो गई। जिसके कारण वह आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाईं। जब वह इंटरमीडिएट में थी तभी मां ने उनकी शादी कर दी। शादी के बाद जब उन्होने अपने पति को अपनी इच्छा बताई तब उन्होने उन्हें पहले स्नातक करवाया व उसके पश्चात जीएनएम की परीक्षा दिलवाई जिसमें उनका चयन भी हो गया। जब प्रशिक्षण के लिए जाना था तब उनकी बड़ी बेटी 2 वर्ष व छोटी बेटी एक माह की थी लेकिन पति व परिवार के अन्य सदस्यों के सहयोग से यह प्रशिक्षण उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया।

रेखा.शुक्ला का कहना है कि गांव में महिलाओं को परिवार नियोजन के लिए समझाना बहुत ही मुश्किल होता है। पहले तो आप मां को समझाइए फिर उसके पति को और फिर उसकी सास को। इस प्रक्रिया में बहुत समय लगता है लेकिन मैं हमेशा प्रयास रही। बार–बार परामर्श भी देती रही कि परिवार का नियोजित करके आप एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सकतें हैं। मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि यदि माह में 50 प्रसव कराती हूं तो मैं उनमें से 30-35 महिलाओं को पीपीआईयूसीडी के लिए राजी कर लूं।

इसके साथ ही रेखा का कहना है कि चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दीपक सर के प्रोत्साहन व मार्गदर्शन में मुझे और प्रेरणा मिली जिससे कि मैं अपने काम में अपना समय शत प्रतिशत देने का प्रयास करने में लगी हुई हूं। बता दें कि पिछले वित्तीय वर्ष मेँ सीएचसी पर कुल 445 पीपीआईयूसीडी लगाए गए जिसमें से 172 पीपीआईयूसीडी अकेले रेखा द्वारा ही लगाए गए। इस प्रकार रेखा द्वारा खुशहाल परिवार के लिए किये जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।