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UP Assembly Elections 2022: यूपी में ‘के फैक्टर’ की अनदेखी नहीं कर सकती कोई पार्टी, निभाते हैं निर्णायक भूमिका

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Elections 2022) में ओबीसी में यादवों के बाद दूसरी सबसे प्रभावी जाति कुर्मी या पटेल किस ओर रुख करेगी यह अभी तय नहीं है।

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लखनऊ

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Nitin Srivastva

Jul 30, 2021

UP Assembly Elections 2022: यूपी में 'के फैक्टर' की अनदेखी नहीं कर सकती कोई पार्टी, निभाते हैं निर्णायक भूमिका

UP Assembly Elections 2022: यूपी में 'के फैक्टर' की अनदेखी नहीं कर सकती कोई पार्टी, निभाते हैं निर्णायक भूमिका

लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Elections 2022) में ओबीसी में यादवों के बाद दूसरी सबसे प्रभावी जाति कुर्मी या पटेल किस ओर रुख करेगी यह अभी तय नहीं है। लेकिन, हर पार्टी पटेल बिरादरी के वोट बैंक को साधने की कवायद शुरू हो गयी है। उप्र की करीब तीन दर्जन विधानसभा सीटों और 8 से 10 लोकसभा सीटों पर जीत की भूमिका तय करने वाली कुर्मी जाति की आबादी संत कबीर नगर, मिर्जापुर, सोनभद्र, बरेली, उन्नाव, जालौन, फतेहपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थ नगर, बस्ती, बाराबंकी, कानपुर, अकबरपुर, एटा, बरेली और लखीमपुर जिलों में सबसे ज्यादा है। इन जिलों में कुर्मी वोट बैंक नौ प्रतिशत के लगभग हैं। यही वजह है कि कोई भी राजनीतिक दल के फैक्टर यानी कुर्मियों की अनदेखी नहीं कर पाता।

हर मंडल में पटेलों के क्षेत्रीय क्षत्रप

उप्र में कुर्मी जाति कई वर्गों में बंटी है। इन्हें पटेल, गंगवार, सचान, निरंजन और वर्मा जैसे नामों से पुकारा जाता है। हर इलाके में कुर्मियों के क्षत्रप हैं। जैसे रुहेलखंड में कुर्मी गंगवार कहलाते हैं। बीजेपी सासंद संतोष गंगवार बड़े नेता हैं। कानपुर मंडल के कुर्मी, पटेल, कटियार, निरंजन और सचान कहलाते हैं। भाजपा की बड़ी नेता प्रेमलता कटियार बड़ी नेता हुआ करती थीं। प्रयागराज मंडल करें कुर्मी मुख्यत: पटेल कहे जाते हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता स्व. रामपूजन पटेल के बाद अपना दल के नेता स्व. सोनेलाल पटेल कुर्मी मतदाताओं की रहनुमाई करते रहे। अब अपना दल नेता अनुप्रिया पटेल बड़ी नेता हैं। फैजाबाद मंडल में कुर्मी वर्मा कहलाते हैं। कभी बसपा के रामलखन वर्मा और सपा के स्व. बेनी प्रसाद बड़े नेता थे। भाजपा के विनय कटियार भी यही के हैं। पूर्वांचल में भाजपा के ओमप्रकाश सिंह और कांग्रेस के आरपीएन सिंह बड़े नेता थे। बुंदेलखंड में कुर्मी उत्तम और निरंजन कहलाते हैं। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम कुर्मियों के बड़े नेता हैं।

26 कुर्मी विधायक हैं मौजूदा विधानसभा में

यूपी की मौजूदा विधानसभा में 26 विधायक कुर्मी समाज से हैं। 2017 में 1989 के बाद सबसे ज्यादा कुर्मी विधायक जीते हैं। इस तरह उन्होनें यादवों को पीछे कर दिया है।जबकि, छह सांसद हैं।

हर पार्टी में हैं कुर्मी नेता

योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा और राज्यमंत्री जय कुमार सिंह 'जैकी' भी कुर्मी समुदाय से हैं। कुर्मी समुदाय से ही ओमप्रकाश सिंह और विनय कटियार भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। बीएसपी में इस वक्त कोई बड़ा कुर्मी नेता नहीं है। पहले सोने लाल पटेल, बरखू राम वर्मा, लालजी वर्मा जैसे बड़े नाम जुड़े थे। कुछ ऐसा ही हाल कांग्रेस का भी है। कांग्रेस पार्टी इस वर्ग को लुभाने के लिए तरुण पटेल को हीरो बना रही है।

किसान जाति है कुर्मी

कुर्मी मूलरूप से किसान जाति है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी है. हालांकि अब शहरों में भी उनकी संख्या है।

दो प्रदेश अध्यक्ष कुर्मी समुदाय से

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी कुर्मी समुदाय से आते हैं। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल भी कुर्मी हैं।

यूपी के बड़े कुर्मी नेता

भाजपा-संतोष गंगवार, स्वतंत्र देव सिंह, मुकुट बिहारी वर्मा
सपा-नरेश उत्तम पटेल
अपना दल- अनुप्रिया पटेल

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