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कुछ ऐसे होंगे UP ATS के SPOT Commando, चेहरा देखकर भांप लेंगे मन की बात, कामयाब नहीं होने देंगे आतंकियों के मंसूबे

UP ATS SPOT Commando: आतंकी संगठनों या उनसे संबंध रखने वालों अपराधियों के लिए अब उत्तर प्रदेश विरोधी मंसूबे पूरा कर पाना आसान नही होगा। क्योंकि अब ऐसा करने पर ब्लैक कमांडो इन पर कहर बनकर टूट पड़ेंगे।

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लखनऊ

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Nitin Srivastva

Jul 06, 2021

कुछ ऐसे होंगे UP ATS के SPOT कमांडो, चेहरा देखकर भांप लेंगे मन की बात, कामयाब नहीं होंगे आतंकियों के मंसूबे

कुछ ऐसे होंगे UP ATS के SPOT कमांडो, चेहरा देखकर भांप लेंगे मन की बात, कामयाब नहीं होंगे आतंकियों के मंसूबे

लखनऊ. UP ATS SPOT Commando: आतंकी संगठनों या उनसे संबंध रखने वालों अपराधियों के लिए अब उत्तर प्रदेश विरोधी मंसूबे पूरा कर पाना आसान नही होगा। क्योंकि अब ऐसा करने पर ब्लैक कमांडो इन पर कहर बनकर टूट पड़ेंगे। इसके लिए यूपी एटीएम अपना स्पेशल पुलिस ऑपरेशन टीम (SPOT स्पॉट) की एक यूनिट हर जिले में तैनात कर रही है। फिलहाल संख्या बल को देखते हुए अभी प्रदेश के चार जिलों में इस यूनिट को तैनात करने की कवायद शुरू की गई है। इस टीम में शामिल जवान एक साथ तीन हथियार चला सकते हैं। सभी को हाई टेक्निकल हथियारों से लैस किया जाएगा।

चेहरा देखकर भांप लेंगे मन की बात

स्पॉट में पुलिस और पीएसी के जवानों को शामिल किया गया है। 40 साल से कम उम्र के इन जवानों को चेहरा देखकर मन की बात भांप लेने के लिए मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा देश मे उपलब्ध दुनिया के आधुनिकतम हथियारों को चलाने की भी ट्रेनिंग दी गयी है। यह जवान अपने पोस्टिंग वाले जिलों और उसकी चारों तरफ की शरहद पर हर वक्त नजर रखेंगे। साथ ही अपना ऐसा मुखबिर तंत्र विकसित करेंगे जो इन्हें हर आपराधिक गतिविधि और षड्यंत्र की जानकारी दे। इस तरह की किसी भी हरकत का अंदाजा होते ही यह हरकत में आ जाएंगे। इसकी सूचना लखनऊ स्थित मुख्यालय को देंगे और वहां से परमीशन मिलते ही ऑपरेशन शुरू कर देंगे।

हाई टेक्निकल हथियारों से लैस होंगे जवान

स्पॉट में शामिल होने वाले जवानों को हर वक्त अपने साथ तीन हथियार रखना पड़ता है। जरूरत पड़ने पर तीनों को एक साथ कैसे चलना है इसका इन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ दोनों आंख बंद करके टारगेट पर गोली मारना भी सिखाया जाता है। इनकी ट्रेनिंग का सबसे बड़ा पार्ट किसी अपहृत को जोखिम से सुरक्षित निकलना होता है। इसके लिए इन जवानों को अपने जान की बाजी लगाकर पलक झपकते ही अपहरणकर्ताओं पर टूटना पड़ता है, लेकिन पीड़ित को कोई नुकसान न हो इसका ख्याल रखना इनकी अहम जिम्मेदारी होती है।

कामयाब नहीं होंगे आतंकियों के मंसूबे

दरअसल प्रदेश में बढ़ती आतंकी गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की जा रही है। हाल ही में धर्मान्तरण के मामले में पकड़े गए आरोपियों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI समेत कई आतंकी संगठनों की यूपी में दखल भी सामने आई है। इससे निपटने के लिए एटीएस अपने विशेष दस्ते का विस्तार कर रहा है। शुरुआती चरण में इंडो-नेपाल सीमा से सटे गोरखपुर, राजस्थान की सीमा से लगे आगरा, देश की राजधानी दिल्ली की सीमा पर गाजियाबाद और बिहार से सटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र बनारस में स्पॉट की टुकड़ियां तैनात करने का फैसला लिया गया है।

अभी तक होती थी यह समस्या

अभी तक कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, नोएडा जैसे बड़े जिलों में एटीएस की यूनिट है, जिसमें एक इंस्पेक्टर और सिपाही हैं। जिलों में किसी आतंकी घटना या विस्फोटक की सूचना पर लखनऊ से कमांडो की टुकड़ी भेजनी पड़ती है। इन्हें पहुंचने में कभी-कभी इतनी देर हो जाती है कि घटना घटित होने का खतरा रहता है। इसे देखते हुए अब सभी जिलों में स्पॉट को तैनात करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए पुलिस और पीएसी के जवानों को बड़ी संख्या में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पूर्व आईजी ने तैयार की थी स्पॉट

प्रदेश के कोने-कोने तक एटीएस की पहुंच हो इसके लिए पूर्व आईजी एटीएस असीम अरुण (IG ATS Aseem Arun) ने स्पॉट की रूपरेखा तैयार की थी। इसे लागू करवाने के लिए उन्होंने करीब दो साल तक जद्दोजहद की थी। पूर्व डीजीपी ओपी सिंह (OP Singh) को यह सुझाव मुनासिब लगा और उन्होंने ही इसे योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) से मंजूरी दिलवाई। इसके बाद नवंबर 2017 में इसका गठन किया गया। लेकिन इसमे भर्ती की कठिन शर्तो की वजह से नगरिक पुलिस के जवान आवेदन करने को तैयार नही थे। जबकि इस टीम में शामिल होने वाले जवानों को 30 फीसदी अतरिक्त जोखिम भत्ता देने का का भी प्राविधान रखा गया है।

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