
लखनऊ. उत्तर प्रदेश सहकारी भूमि विकास बैंकों (UP Cooperative bank election) के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) को करारी शिकस्त दे दी। 323 शाखाओं के लिए हुए चुनाव में 293 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के कुनबे का इन चुनाव में वर्चस्व था, लेकिन ऐसी हार की उन्हें उम्मीद नहीं होगी। हालांकि मुलायम सिंह यादव के भाई और सपा से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाने वाले शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav व उनकी पत्नी को जीत हासिल हुई है, लेकिन सपा ने इस चुनाव में मुंह की खाई है।
यूपी सहकारिता के स्वयंभू माने जाते थे शिवपाल-
शिवपाल सहकारी ग्रामीण विकास बैंक के सभापति के पद पर रहे हैं। इस बैंक की 323 शाखाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि प्रदेश स्तर पर 14 डायरेक्टर को चुनते हैं। उन डायरेक्टरों में से सभापति और उपसभापति का चुनाव किया जाता है। इस संस्था में सपा के वर्चस्व की वजह से शिवपाल सिंह यादव लंबे समय तक इसके सभापति रहे। माना जाता है कि उत्तर प्रदेश सहकारिता चुनाव पर जिस भी दल का कब्जा रहा, उसने यूपी की राजनीति में अपना परचम बुलंद किया। समाजवादी पार्टी और शिवपाल सिंह यादव का पूरा वजूद कोऑपरेटिव चुनाव पर निर्भर था। पिछले 15 वर्षों से चाहे वह प्रादेशिक कोपरेरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) हो, यूपी सहकारी बैंक हों या अन्य कोऑपरेटिव सोसाइटी के चुनाव, इनमें शिवपाल यादव और उनके चहेतों का ही कब्जा रहा। यहां तक कि मायावती के दौर में भी सहकारी ग्रामीण विकास बैंक पूरी तरीके से यादव परिवार के कंट्रोल में ही रहा। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुख्यिा शिवपाल सिंह यादव यूपी सहकारिता के स्वयंभू माने जाते थे।
साल 1991 में मुलायम परिवार की एंट्री हुई-
सबसे पहले साल 1960 में जगन सिंह रावत उत्तर प्रदेश के सहकारी ग्रामीण बैंक के सभापति निर्वाचित हुए थे। रऊफ जाफरी और शिवमंगल सिंह 1971 तक सभापति रहे। इसके बाद बैंक की कमान प्रशासक के तौर पर अधिकारियों के हाथ में आ गई। साल 1991 में सहकारिता के क्षेत्र में मुलायम परिवार की एंट्री हुई। करीब तीन माह के लिए हाकिम सिंह सभापति बने। वर्ष 1994 में शिवपाल यादव सभापति बने। वर्ष 1999 में तत्कालीन सहकारिता मंत्री रामकुमार वर्मा के भाई सुरजनलाल वर्मा सभापति चुने गये।
इस बार ऐसा रहा हाल-
बताया जा रहा है कि इससे पहले कभी किसी एक दल की इतनी बड़ी जीत नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश में सहकारी ग्राम विकास बैंक की 323 शाखाएं हैं। प्रत्येक शाखा से एक प्रतिनिधि का चुनाव होना था। अलग-अलग कारणों से 11 शाखाओं के चुनाव स्थगित हो गए हैं, जिसके चलते कुल 312 शाखाओं पर चुनाव हुए। इनमें से 293 सीटों पर बीजेपी जीती, जिनमें से बीजेपी के 276 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गये। बीजेपी के अलावा 19 सीटों पर अन्य विजयी हुए। इनमें शिवपाल सिंह यादव और उनकी पत्नी सरला यादव के अलावा ज्यादातर सपा के उम्मीदवार हैं।
Published on:
04 Sept 2020 02:23 pm
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