
यूपी में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल 57 घंटे से जारी है। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने आम लोगों के साथ ही सरकार की भी परेशानियां बढ़ा दी हैं। शनिवार रात ऊर्जा मंत्री और बिजली कर्मचारी संघर्ष समिति के बीच 3 घंटे की बातचीत हुई। मगर, इसमें कोई नतीजा नहीं निकला। सभी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार हमारी मांगे पूरी करें। वहीं, पूरे यूपी में बिजली कटौती से करीब 50 लाख उपभोक्ता परेशान हैं।
बिजली कर्मचारी, नेताओं और ऊर्जा विभाग की इस लड़ाई में आम आदमी की परेशानी बढ़ गई है। स्कूली बच्चों के एग्जाम होने हैं। इन्वर्टर बैटरी भी अब ज्यादा चार्ज नहीं है। लखनऊ के साथ-साथ अलग-अलग शहरों से नाराज लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। नाराज लोगों ने नेशनल हाईवे तक जाम करना शुरू कर दिया है। 50 लाख से ज्यादा उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं। प्रशासन और पुलिस के लोगों को भी अब स्थिति संभालने में दिक्कत हो रही है।
रात 10 बजे के बाद भी जारी रहेगी हड़ताल- बिजली कर्मचारी
बिजली कर्मचारी जो हड़ताल कर रहे हैं सभी पर सरकारी कार्रवाई बढ़ती जा रही है। अब तक 3 हजार से ज्यादा संविदा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है। वहीं, संघर्ष समिति के 22 कर्मचारी नेताओं पर एस्मा लगाया गया है। इसके अलावा 29 अन्य लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
दूसरी तरफ हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि ऐसे ही हमारे खिलाफ कार्रवाई होती रही, तो यह हडताल रविवार रात 10 बजे के बाद भी हड़ताल जारी रहेगी और इसको अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील कर दिया जाएगा।
वहीं, विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा, ''किसी भी सूरत में हड़ताल खत्म नहीं होगी। ऐसे ही कर्मचारियों का शोषण हुआ तो हड़ताल को आगे बढ़ाया जाएगा और जेल भरो आंदोलन शुरू होगा। हम भगोड़े नहीं हैं। हम कहीं नहीं जा रहे हैं। पुलिस हमें गिरफ्तार कर सकती है। जनता जो दंड देगी, हम उसके लिए तैयार हैं। ऊर्जा निगम नशे के मद में चूर है। हमने 16 फरवरी को नोटिस में 1 महीने का समय दिया था। जिनको वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी उन्होंने क्यो नहीं की।
सरकार जब चाहे हमसे बात कर सकती है- शैलेंद्र दुबे
शैलेंद्र ने कहा, ''ऊर्जा मंत्री ने हमसे कहा है कि आगे बातचीत के दरवाजे खुले हुए हैं। मैं भी उसने यही कहता हूं कि हमारी तरफ से भी बातचीत के दरवाजे खुले हुए हैं। लेकिन मैं अत्यंत दुख के साथ कह सकता हूं कि हम पर आरोप लगा कि हमने तोड़फोड़ की है। हमने कहीं कोई हिंसा नहीं की। आपकी सरकार और जांच एजेंसी है। बिना जांच के हम पर आरोप लगा दिया।''
आंदोलन में शामिल सीटू के प्रदेश सचिव प्रेमनाथ राय का कहना है कि कर्मचारियों पर तोड़-फोड़ का आरोप लगाया जा रहा है। यह बिल्कुल गलत है। सच्चाई यह है कि आंदोलन को कमजोर करने और हड़ताल खत्म करने के लिए खुद सरकार के लोग बिजलीघर पहुंचकर तोड़-फोड़ कर रहे हैं। यहां तक की जनता के बीच गलत प्रचार किया जा रहा है। हमारी लड़ाई जनता के लिए है। निजीकरण के बाद बिजली महंगी होगी। उसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। हमारी मांगे पूरी नहीं होंगी तो यह आंदोलन भी खत्म नहीं होगा।"
क्या है कर्मचारियों की मांग
-पावर सेक्टर इम्प्लॉइज प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए
-25 हजार करोड़ रुपये के मीटर खरीद आदेश को रद्द किया जाए
-मौजूदा चेयरमैन को हटाकर निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत बड़े पदों पर नियुक्ति हो
-निजीकरण की प्रक्रिया को रद्द किया जाए
-विद्युत उत्पादन निगम को ओबरा और अनपरा में 800-800 मेगा वॉट की 2-2 यूनिट दी जाए।
Updated on:
19 Mar 2023 12:06 pm
Published on:
19 Mar 2023 10:17 am
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
