
File Photo of Students
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी विश्वविद्यालों में परीक्षा शुल्क एक समान कर दिया है। राज्य की सभी यूनिवर्सिटीज में अंडर ग्रेजुएट कोर्स की परीक्षा के लिए छात्रों को एक समान फीस देनी होगी। बीए, बीकॉम आदि कक्षाओं की एग्जाम फीस 800 रुपये निर्धारित की गई है। शासन ने सेमेस्टर सिस्टम लागू करने के बाद परीक्षा शुल्क तय करने के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विश्व विद्यालयों में संचालित पाठ्यक्रमों में संचालित पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया। परीक्षा शुल्क पर निर्णय लेने के लिए शासन ने विशेष सचिव उच्च शिक्षा विभाग की अध्यक्ष्ता में समिति का गठन किया।
शासन को सौंपी रिपोर्ट
विश्वविद्यालयों की ओर से शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव समिति को दिया गया। इस पर चर्चा के बाद शासन को समिति ने रिपोर्ट सौंपी। विशेष सचिव मनोज कुमार ने रिपोर्ट के आधार पर सभी राज्य विश्वविद्यालयों में एक समान परीक्षा फीस किए जाने की बात कही गई।
परीक्षा परिणाम तैयार करने में दोगुना खर्च
रिपोर्ट में कहा गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के कारण सभी स्नातक व परास्नातक पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं को विषम व सेमेस्टर के क्रम में कम से कम वर्ष में दो बार कराया जाएगा। समिति की ओर से कहा गया कि विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए पेपर सेटिंग, पेपर प्रिंटिंग, उत्तर पुस्तिकाओं की प्रिंटिंग, प्रायोगिक परीक्षाएं, उड़ाका दलों का संचालन, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन, परीक्षकों के पारिश्रमिक का भुगतान और परीक्षा परिणाम तैयार करने में दोगुना खर्च आएगा। विश्वविद्यालय की आय का मुख्य स्रोत परीक्षा शुल्क है, जिसका अधिकांश हिस्सा परीक्षा संबंधी खर्चों पर व्यय होता है।
अधिनियम 1973 के तहत विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क अलग-अलग
विशेष सचिव मनोज कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि उच्च शिक्षा विभाग में उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालयों अधिनियम 1973 के तहत स्थापित विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क अलग-अलग है। अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्रों का एक ही मद में अलग भुगतान सही नहीं है। इसलिए सभी राज्य विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रमवार परीक्षा अब समान कर दिया गया है।
Published on:
19 Jul 2022 05:22 pm
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