
Asim arun
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का मुद्दा किनारे हो गया है, वहीं आईएएस और आईपीएस के बीच का विवाद बढ़ता जा रहा है। यूपी में आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन के बीच जिलाधिकारी द्वारा जिले के एसएसपी व एसपी के साथ क्राइम मीटिंग लेने के आदेश पर अधिकार क्षेत्रों को लेकर मतभेद बढ़ता जा रहा है। इसी बीच आईजी एटीएस व आईपीएस एसोसिएशन के सचिव असीम अरुण ने आईएएस असोसिएशन के सचिव आलोक कुमार को पत्र लिखकर सांमतशाही मानसिकता खत्म करने की ओर काम करने की बात रखी है। उन्होंने पत्र में दोनों एसोसिएशन के बीच रस्साकशी को खारिज किया है।
आईपीएस की सुशासन की ओर बढ़ने की अपील
आईपीएस एसोसिएशन के सचिव असीम अरुण ने पत्र में लिखा है कि हम लोगों की कितनी एनर्जी इस बात में व्यर्थ होता है कि कौन कितनी ऊंची कुर्सी पर बैठा, कौन बाएं बैठा, किसकी गाड़ी पहले निकली, फोन पर पहले कौन आया। लेकिन इससे बड़ा मुद्दा है कि सरकारी मशीनरी को सामंतशाही मानसिकता से निकाल कर सुशासन की ओर ले जाएं। उन्होंने लिखा कि वर्तमान सरकार वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने का भरपूर प्रयास कर रही है। ऐसे में हमारा मानना है कि आईएएस और आईपीएस दोनों सेवाओं के अधिकारी इसमें अपना योगदान दें। उन्होंने सुझाव दिया कि आईएएस और आईपीएस दोनों सेवाओं के सदस्य मिलकर सामंतशाही प्रोटोकॉल को नष्ट करते हुए भ्रष्टाचार मुक्त कार्यसंस्कृति निर्मित करने के लिए कार्य करें।
आईएएस और आईपीएस के बीच विवाद गलत
असीम अरुण ने पत्र में लिखा कि हाल में कानून व्यवस्था की बैठक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पुलिस लाइन में आयोजित किए जाने के संबंधित शासनादेश को मीडिया द्वारा आईएएस आईपीएस के बीच रास्साकशी के रूप में दिखाया जा रहा है, जबकि हमें लगता है कि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा मत है कि नागरिकों को सुलभ न्याय दिलाने के लिए जरूरी है, न्याय प्रक्रिया से जुड़े अन्य विभाग जैसे की जिला कारागार, बाल सुधार गृह, नारी निकेतन, प्रोबेशन अधिकारी, अभियोजन अधिकारी का समुचित सर्वेक्षण हो। इसका वर्तमान में इसका भाव है।
शासन के आदेश पर खड़ा हुआ विवाद
मुख्य सचिव राजीव कुमार ने 7 सितंबर 2017 को प्रदेश में कानून व्यवस्था की गिरानी को लेकर बड़ा निर्देश जारी किया था। इस पत्र में कहा गया था कि कानून व्यवस्था को लेकर हर महीने की 7 तारीख को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिले की पुलिस लाइंस में एसएसपी व एसपी की मौजूदगी में बैठक होगी। इस निर्देश के बाद आईपीएस अधिकारियों में विरोध के सुर नज़र आने लगे। वहीं यह विवाद बढ़ता हुआ आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन के बीच विवाद गहराता गया।
Published on:
15 Dec 2017 05:30 pm
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