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यूपी पंचायत चुनाव पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान, बताया आखिर क्यों हो रही है देरी

UP Panchayat Election Update : यूपी में पंचायत चुनाव टलने की अटकलों पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तोड़ी चुप्पी। जानें क्यों फंसा है आरक्षण का पेंच और क्या 2027 से पहले होंगे चुनाव?

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ब्रजेश पाठक ने पंचायत चुनाव पर कही बड़ी बात, PC- ANI

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने की अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सरकार की मंशा साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि सरकार पंचायत चुनाव समय पर कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन फिलहाल मामला अदालत में लंबित है। कोर्ट के फैसले के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

ब्रजेश पाठक ने क्या कहा?

पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर चल रही अटकलों पर ब्रजेश पाठक ने कहा, “सरकार पंचायत चुनाव समय पर कराने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम तैयार हैं, लेकिन चूंकि मामला अदालत में है, इसलिए कोर्ट का फैसला आने के बाद ही चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।”

क्यों अटका है पंचायत चुनाव?

पंचायत चुनाव में देरी की मुख्य वजह आरक्षण के निर्धारण और पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग का गठन बताया जा रहा है। हाईकोर्ट में दायर एक याचिका के बाद आरक्षण की प्रक्रिया नए सिरे से तय करने का मामला अदालत में चल रहा है।

पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पहले कहा था कि अधिकारी अन्य सर्वेक्षण कार्यों (SIR) में व्यस्त हैं, जिस कारण थोड़ी देरी हो रही है। हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया था कि पर्चे छप चुके हैं और अन्य तैयारियां लगभग पूरी हैं।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले होंगे पंचायत चुनाव?

सियासी गलियारों में इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि क्या सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराने का जोखिम उठाएगी? विपक्षी दल समाजवादी पार्टी लगातार आरोप लगा रही है कि भाजपा चुनाव टाल रही है, जबकि सरकार का रुख है कि वह केवल अदालती प्रक्रिया का इंतजार कर रही है।

क्या इस साल होंगे चुनाव?

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आश्वासन के बावजूद जानकारों का मानना है कि कोर्ट से हरी झंडी मिलने तक पंचायत चुनाव कराना मुश्किल नजर आ रहा है। जमीनी स्तर पर प्रत्याशी लाखों रुपये खर्च कर पोस्टर छपवा चुके हैं और प्रचार की तैयारी कर चुके हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें और इंतजार करना पड़ सकता है। सरकार और विपक्ष दोनों की नजरें अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं। फैसला जितनी जल्दी आएगा, पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा भी उतनी ही जल्दी हो सकेगी।