
UP Prasangvash- मथुरा में भव्य और दिव्य जन्माष्टमी मनायी जा रही है। कान्हा के जन्मोत्सव से पहले मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया। कृष्ण के अवतरण दिवस के अवसर पर श्रद्धालु उल्लास में डूबे हैं, लेकिन मथुरा से महज 100 किलोमीटर दूरी पर शासन-प्रशासन की लापरवाही से दर्जनों मासूम 'कान्हा' इस दुनिया को अलविदा कह गए। परिजनों की सिसकियां अंत:कर्ण को भेद रही हैं। क्षेत्र में मातम फैला है। ब्रज क्षेत्र के फिरोजाबाद में डेंगू और वायरल फीवर से करीब 20 दिनों में 46 बच्चों की मौत हो गई है। सिर्फ रविवार को ही जिले में आठ बच्चों की मौत हुई। पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों के करीब 900 बच्चों का इलाज चल रहा है, जिनमें 80 फीसदी की हालत गंभीर है।
वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की तीसरी लहर में सबसे ज्यादा बच्चों को ही सचेत रहने की ओर सचेत किया है। कोरोना के कम होते सक्रिय मामलों के बीच अब स्कूल-कॉलेज खुल रहे हैं। प्राइमरी स्कूल भी मंगलवार से खुल जाएंगे। दूसरी लहर से सहमे अभिभावक डर-डर कर बच्चों को पढ़ने भेज रहे हैं। इस बीच यूपी में आधा सैकड़ा से अधिक बच्चों की मौत डेंगू और वायरल बुखार से हो चुकी है। उधर, सरकार तीसरी लहर से निपटने के दावे कर रही है। चार साल बाद फिर से पूर्वांचल के कई जिलों में जापानी इंसेफेलाइटिस ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। 2017 के बाद से लेकर अब तक गोरखपुर में दिमागी बुखार का प्रकोप कम हुआ था, लेकिन अब फिर से इसके बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। समय रहते स्वास्थ्य विभाग नहीं चेता तो यहां भी हालात गंभीर हो सकती है। ऐसे में बच्चों की फिक्र लाजिमी है।
वर्षा जनित बीमारियों का बढ़ रहा प्रकोप
बात सिर्फ फिरोजाबाद की ही नहीं है, लखनऊ, गोरखपुर सहित पश्चिमी यूपी के कई जिलों में वर्षा जनित बीमारियों को प्रकोप बढ़ रहा है। मौतों के बाद कुछ दिन हाय-तौबा मचती है और फिर सब पुराने ढर्रे पर। फिरोजाबाद में डेंगू के प्रकोप के बाद गांव-गांव कैंम्प लगाये गये हैं। सफाई भी हो रही है। डेंगू से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग उठाये सख्त कदम
सितंबर महीने में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका और वर्षा जनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए जरूरी है कि जिले स्तर पर फिर से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत परखी जाए। जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी-पीचएसची में इलाज के पुख्ता इंतजाम हों। पूरे यूपी में खासकर बाढ़ प्रभावित जिलों में स्वच्छता अभियान चलाए जाएं। डेंगू का प्रकोप न बढ़ने पाए, इसके लिए लगातार फॉगिंग की हो। सरकारी तंत्र व सामाजिक संस्थाओं की मदद से जागरूकता अभियान चलना चाहिए। सुस्त पड़ा स्वास्थ्य महकमा यदि अलर्ट मोड पर होता और और यह कदम पहले उठाये गये होते तो पश्चिमी यूपी में आज शायद यह दिन न देखना पड़ता।
Published on:
30 Aug 2021 06:29 pm
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