8 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

यूपी में Startup की नई कहानी: पैसा कहां से आएगा और कितने Startup टिक रहे हैं?

Uttar Pradesh Startup Ecosystem: उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त उछाल लिया है। 2017 से पहले जहां प्रदेश में महज 120 स्टार्टअप थे, वहीं अब यह संख्या 24 हजार से अधिक हो गई है।
4 min read
Google source verification
CM Yogi Adityanath

सीएम योगी आदित्यनाथ (ANI Photo)

UP Startup Policy 2026: लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 'यूपी टेक्सटाइल-2026' का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में आए बड़े प्रशासनिक और आर्थिक बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी। तब निवेशक यहां व्यापार का सपना लेकर आते थे, लेकिन उन्हें अवैध वसूली की पर्चियों के साथ लौटना पड़ता था और माफिया खुलेआम घूमते थे। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बीते वर्षों में राज्य में कानून का शासन स्थापित कर लोगों का विश्वास बहाल किया गया है। आज सुरक्षित माहौल के कारण आम नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों का भरोसा सरकार पर मजबूत हुआ है, जिससे यूपी निवेश का नया केंद्र बन रहा है।

उत्तर प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम बीते कुछ वर्षों में एक बड़े बदलाव का गवाह बना है। वर्ष 2017 से पहले जहां पूरे राज्य में महज 120 के करीब पंजीकृत स्टार्टअप्स हुआ करते थे, वहीं 2026 तक डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 24,245 पहुंच चुकी है।

संख्यात्मक रूप से यह 200 गुना से अधिक का उछाल है। आज यूपी अपने मजबूत बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, बेहतर कानून-व्यवस्था और सरकारी प्रोत्साहन के बल पर खुद को देश के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में पेश कर रहा है। 75 जिलों में फैले इस नेटवर्क में 88 से अधिक मान्यता प्राप्त इंक्यूबेटर्स, 7 'सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस' (CoE) और 30 से अधिक प्रमुख निवेशक दर्ज हैं।

संख्या 24 हजार, लेकिन पोर्टल पर सिर्फ 3,827

इस तीव्र वृद्धि के बीच जमीनी हकीकत को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यूपी स्टार्टअप मिशन के लाइव डैशबोर्ड के अनुसार, जहां एक तरफ DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 24,245 है, वहीं राज्य सरकार के आधिकारिक StartInUP पोर्टल पर केवल 3,827 स्टार्टअप्स ही पंजीकृत हैं।

अंतर की वजह: DPIIT मान्यता और StartInUP पंजीकरण दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। राज्य की स्टार्टअप नीति 2026 के तहत वित्तीय लाभ, सब्सिडी और सरकारी अनुदान प्राप्त करने के लिए DPIIT के साथ-साथ StartInUP पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
यह 16 प्रतिशत का आंकड़ा यह नहीं दर्शाता कि बाकी 84 प्रतिशत कंपनियां बंद हो चुकी हैं, बल्कि यह इस ओर इशारा करता है कि केंद्रीय मान्यता प्राप्त स्टार्टअप बेस और राज्य की सरकारी प्रोत्साहन व्यवस्था के बीच अभी भी एक बड़ा 'कनेक्टिविटी गैप' मौजूद है, जिसे पाटना आवश्यक है।

कितने स्टार्टअप हुए बंद?

स्टार्टअप्स की केवल स्थापना होना ही सफलता का पैमाना नहीं हो सकता, बल्कि उनका बाजार में टिके रहना और लंबे समय तक राजस्व (Revenue) बनाना असली परीक्षा है।
संसद और मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) के आंकड़ों के मुताबिक:
दिसंबर 2025 का डेटा: देश भर के 1,97,692 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 6,385 कंपनियां बंद (Dissolved/Struck-off) पाई गईं। इनमें से उत्तर प्रदेश के 598 स्टार्टअप्स बंद श्रेणी में दर्ज थे। इसी समयावधि में महाराष्ट्र के 1,200, कर्नाटक के 845 और दिल्ली के 737 स्टार्टअप्स बंद हुए थे।
मार्च 2026 का अपडेट: देश भर में DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 2,12,283 हुई और बंद होने वाले स्टार्टअप्स का cumulative आंकड़ा 6,789 पहुंचा। 598 स्टार्टअप्स का बंद होना यह स्पष्ट संकेत देता है कि 'आइडिया स्टेज' से निकलकर 'कमर्शियल स्टेज' में जाने के दौरान कई स्टार्टअप्स सही बिजनेस मॉडल, फंडिंग की कमी या बाजार की मांग न समझ पाने के कारण बंद हो जाते हैं। यूपी में औसत सर्वाइवल दर राष्ट्रीय औसत के आसपास ही बनी हुई है।

स्टार्टअप्स को पैसा कहां से मिलेगा?

पूंजी किसी भी शुरुआती उद्यम की सबसे बड़ी जरूरत होती है। यूपी सरकार ने 'डायरेक्ट ग्रांट' से आगे बढ़कर 'कैपिटल लेवरेजिंग' (निजी निवेश को आकर्षित करने) का मॉडल अपनाया है।
आइडिया स्टेज: प्रतिमाह 20,000 रुपये का सस्टेनेंस अलाउंस (2 साल तक)।
प्रोटोटाइप स्टेज: 10 लाख रुपये तक का प्रोटोटाइप अनुदान।
कमर्शियल स्टेज (MVP): 15 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक की सीड फंडिंग।
स्केल-अप स्टेज: बाहर से 2 करोड़ रुपये जुटाने पर 5 करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट।

1,000 करोड़ रुपये का UP Startup Fund

यह फंड सीधे किसी एक कंपनी को देने के बजाय 'Fund of Funds' मॉडल पर काम करता है। इसमें सरकार सिडबी (SIDBI) के माध्यम से सेबी-रजिस्टर्ड अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (Daughter Funds) में पैसा लगाती है। ये वेंचर कैपिटल फंड्स फिर यूपी के होनहार स्टार्टअप्स में इक्विटी निवेश करते हैं।

चरणबद्ध वित्तीय सहायता

सस्टेनेंस अलाउंस (Sustenance Allowance): शुरुआती दौर में उद्यमियों को अपने दैनिक खर्चों और विचारों पर काम करने के लिए 2 साल तक 20,000 रुपये प्रति माह का प्रोत्साहन भत्ता दिया जाता है।

प्रोटोटाइप ग्रांट (Prototype Grant): किसी विचार का शुरुआती मॉडल या वर्किंग मॉडल तैयार करने के लिए 10 लाख रुपये तक का सरकारी अनुदान मिलता है।

सीड कैपिटल सपोर्ट (Seed Capital): मिनिमम वायबल प्रोडक्ट (MVP) और कमर्शियलाइजेशन के लिए 15 लाख रुपये (विशेष मामलों में 50 लाख रुपये तक) की सीड फंडिंग दी जाती है।

मैचिंग ग्रांट (Matching Grant): यदि कोई स्टार्टअप प्रतिष्ठित राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से 2 करोड़ रुपये या उससे अधिक का फंड जुटाता है, तो राज्य नीति के तहत 5 करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट का प्रावधान है।

महिला उद्यमिता की तस्वीर

यूपी स्टार्टअप मिशन के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 1,326 महिला-संचालित (Women-led) स्टार्टअप्स को प्रत्यक्ष रूप से सपोर्ट दिया गया है। क्षेत्रीय विषमता को दूर करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए गए हैं।

स्पेशल कैटेगिरी इंसेंटिव: महिला उद्यमियों, दिव्यांगजनों, ट्रांसजेंडर्स, EWS श्रेणी और पूर्वांचल व बुंदेलखंड क्षेत्र के स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप और सीड ग्रांट में 50 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता है।

इंक्यूबेशन का विस्तार: नोएडा और लखनऊ से बाहर निकालकर अब वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और आगरा जैसे Tier-2/Tier-3 शहरों में इंक्यूबेशन सेंटर और CoE स्थापित किए जा रहे हैं।

सामने है ये चुनौतियां

प्राइवेट वेंचर कैपिटल की आवश्यकता: सरकारी अनुदान केवल शुरुआती जोखिम कम कर सकता है। किसी भी स्टार्टअप को बड़ा ब्रांड बनाने के लिए प्राइवेट वेंचर कैपिटल, एंजेल इन्वेस्टर्स और लगातार मिलने वाले ग्राहकों की जरूरत होती है।

StartInUP पोर्टल का सरलीकरण: DPIIT से मान्यता प्राप्त 24,000 से अधिक स्टार्टअप्स को राज्य के पोर्टल पर लाने के लिए नौकरशाही प्रक्रियाओं को और आसान बनाना होगा।

डीप-टेक और आरएंडडी पर जोर: रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस-टेक और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर 40 प्रतिशत सहायता के प्रावधान का सही क्रियान्वयन जरूरी है।

उत्तर प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम 2017 के 'शुरुआती दौर' से निकलकर 2026 में 'मैच्योरिटी और स्केल-अप' के चरण में प्रवेश कर चुका है। 200 गुना की संख्यात्मक वृद्धि एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब वास्तविक चुनौती इन 24 हजार से अधिक स्टार्टअप्स को टिकाऊ, लाभदायक और बड़े बिजनेस में बदलने की है। 1,000 करोड़ के फंड ऑफ फंड्स, 50 लाख तक की सीड फंडिंग और निजी निवेश के तालमेल से उत्तर प्रदेश देश के स्टार्टअप मानचित्र पर एक सशक्त केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।