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₹1000 करोड़ का कोडीन सिरप घोटाला, STF ने दाखिल की 1.5 लाख पन्नों की चार्जशीट, मुख्य आरोपी अभी भी फरार

UP Codeine Syrup Scam : उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने 1000 करोड़ रुपये के कोडीन खांसी दवा घोटाले में 1.5 लाख पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जानें कैसे यूपी से बांग्लादेश तक फैला था इस ड्रग तस्करी का नेटवर्क।

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कोडीन सिरप मामले में STF ने दाखिल की 1.5 लाख पन्नों की चार्जशीट, PC- Patrika

लखनऊ : उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने कोडीन युक्त खांसी की दवा की अंतरराज्यीय तस्करी के एक बड़े रैकेट में 1.5 लाख पृष्ठों का विशाल चार्जशीट दाखिल किया है। 2019 से 2024 तक सक्रिय इस मल्टी-करोड़ घोटाले में 30 लोगों को आरोपी बनाया गया है। एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, इस रैकेट के जरिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध लेन-देन हुई है। यह पिछले कई वर्षों में राज्य का सबसे बड़ा फार्मास्यूटिकल ड्रग डाइवर्जन मामला माना जा रहा है।

चार्जशीट एनडीपीएस अधिनियम और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत 9 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई है। मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल (किंगपिन) समेत उसके रिश्तेदार गौरव सिंह और वरुण सिंह फरार हैं। सूत्रों के मुताबिक ये तीनों दुबई में छिपे हो सकते हैं। एसटीएफ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से इनकी प्रत्यावर्तन (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है।

रैकेट में शामिल प्रमुख नाम

  • बर्खास्त पुलिस कांस्टेबल आलोक सिंह
  • अमित सिंह उर्फ टाटा
  • कुल 30 आरोपियों में से 5 फरार, बाकी विभिन्न जिलों की जेलों में

जांच के अनुसार, आलोक और अमित ने 2019 में शुभम जायसवाल से मुलाकात की और शुरुआत में पीछे से काम करते थे। 2024 में भारी मुनाफा देखते हुए वे सीधे रैकेट में शामिल हो गए।

यह घोटाला अक्टूबर 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू की गई कार्रवाई के दौरान सामने आया। पूरे प्रदेश के 52 जिलों में छापेमारी की गई और 332 से अधिक थोक दवा प्रतिष्ठानों की जांच हुई।

जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए

  • 22.39 करोड़ बोतल फेंसिडिल (मूल्य ₹506 करोड़)
  • 73.16 लाख बोतल एस्कॉफ (मूल्य ₹154.38 करोड़)
  • 24.87 लाख बोतल अन्य कोडीन आधारित दवाएं (मूल्य ₹43.77 करोड़)

ये मात्राएं चिकित्सकीय जरूरत से कहीं ज्यादा थीं। जांच में पाया गया कि ये दवाएं कभी रिटेल मेडिकल स्टोरों या मरीजों तक नहीं पहुंचीं। कागजों पर खरीद दिखाकर इन्हें सुपर-स्टॉकिस्टों और फर्जी थोक फर्मों के जरिए डायवर्ट कर दिया जाता था। अधिकांश फर्में सिर्फ कागजों पर थीं। उनके पते पर न स्टोरेज, न स्टॉक और न ही कोई रिकॉर्ड।

कोडीन युक्त खांसी की दवाओं को बिहार और पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में तस्करी कर दी जाती थी, जहां इन्हें नशे के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। चार्जशीट में हजारों दस्तावेज शामिल हैं। बैंक रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, परिवहन दस्तावेज, खरीद-बिक्री इनवॉइस, लेजर और डिजिटल सबूत।

ED ने 25 जगहों पर मारे छापे

दिसंबर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देशभर में 25 जगहों पर छापे मारे। उत्तर प्रदेश में जौनपुर, अलीगढ़, लखनऊ, सहारनपुर, वाराणसी और गाजियाबाद समेत कई स्थानों पर तलाशी ली गई। इसके अलावा झारखंड के रांची और गुजरात के अहमदाबाद में भी ऑपरेशन चलाए गए।

एसटीएफ की यह बड़ी कार्रवाई नशीले पदार्थों की अवैध सप्लाई और डायवर्जन पर सख्ती का संदेश दे रही है। जांच अभी जारी है और इस रैकेट में और लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।