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स्मार्ट अखिलेश में कार्टूनिस्टों को क्यों दिखती है उनकी टेढ़ी ‘नाक’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का आज 43वां जन्मदिन है। एक जुलाई यानि वह दिन जब मुलायम सिंह यादव के यहां अखिलेश यादव उर्फ टीपू ने जन्म लिया।

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Ankur Singh

Jul 01, 2016

AKHILESH YADAV

AKHILESH YADAV

पत्रिका विशेष
अंकुर सिंह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के
मुख्यमंत्री का आज 43वां जन्मदिन है। एक जुलाई यानि वह दिन जब मुलायम सिंह
यादव के यहां अखिलेश यादव उर्फ टीपू ने जन्म लिया। पूरा प्रदेश और देश आज
टीपू के जन्मदिन का जश्न मना रहा है। खुद टीपू अपने परिवार के साथ लंदन
में अपना हैप्पी बर्थ डे सेलेब्रेट कर रहे हैं। टीपू के जन्मदिन पर पत्रिका
पेश कर रहा कुछ ऐसे ही कार्टून जिन्हें समय-समय पर विभिन्न कार्टूनिस्टों
ने अपनी कूची से उकेरा है। इन कार्टूनों में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के
चार साल से ज्यादा के कार्यकाल का लेखा-जोखा है। इनमें व्यंग्य है। गलतियों
की तरफ इशारा है। सुझाव है। और है भविष्य के टीपू की तस्वीर। तो पेश है
टीपू को जन्मदिन का तोहफा-

...जब सीएम की कुर्सी पर बैठे अखिलेश यादव

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ये
कार्टून बयां करता है जब अखिलेश उत्तर प्रदेश के सबसे युवा सीएम के तौर पर
कुर्सी पर विराजे थे। 2012 के विधानसभा चुनावों में बसपा के हाथी को
परास्त कर सपा की साइकिल अव्वल आई थी। सपा की करिश्माई जीत के बाद उम्मीदों
के विपरीत मुलायम सिंह यादव की जगह अखिलेश कुर्सी पर बैठे। सपा अब अगले
सीएम के रूप में भी अखिलेश को अपना चेहरा प्रोजेक्ट करने की तैयारी में जुट
गई है।

मुलायम ने ली अखिलेश की क्लास

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प्रदेश की
कुर्सी पर बैठे अखिलेश पर जनता की नजर तो है ही। आए दिन विपक्षियों के
बयानों के तीर भी चलते रहते हैं। युवा सीएम सब के जबाव देते रहते हैं।
लेकिन जब-तब पिता मुलायम सिंह यादव भी सीएम के कान खींचते रहते हैं। सुशासन
के लिए उन्हें प्यार की घुड़की और डांट सुननी पड़ती है। मीडिया इस बात को
चटखारे लेकर छापता है कि मुलायम ने ली सीएम अखिलेश की क्लास।
प्रशासनिक सख्ती पर खिंचाई

कुर्सी संभालते ही मीडिया के सवालों ने घेरा

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अखिलेश
कुर्सी संभाले ही थे कि वे प्रशासनिक सख्ती पर मीडिया के सवालों में घिर
गए। यह पहला मौका था जब उन्हें पूरे देश की मीडिया ने घेरा। मामला था अवैध
खनन के खिलाफ सख्ती बरतने और एक मस्जिद की दीवार गिरवाने पर निलंबित हुई
आईएएस दुर्गाशक्ति नागपाल। देखते ही देखते पूरे देश में यह बड़ा मुद्दा बन
गया। और मीडिया में इसने खूब सुर्खियां बटोरी। हालांकि, बाद में अखिलेश
सरकार ने दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन वापस ले लिया। इस पर बने कई
कार्टून्स।

विकास बनाम कानून व्यवस्था



समाजवादियों की
सरकार हो और कानून-व्यवस्था मुद्दा न बने। ऐसा हो नहीं सकता। अखिलेश सरकार
भी कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मीडिया और आमजन के बीच चर्चा में रहती है।
कानून व्यवस्था को लेकर खूब व्यंग्य लिखे गए और कार्टून्स के जरिए भड़ास
निकाली गई। जो अब भी जारी है।

मुलायम का राजनीतिक कुनबा

समाजवादी
पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की पार्टी ने परिवारवाद को बढ़ावा देने
पर मीडिया में खूब चर्चा बटोरी। अखिलेश को मुलायम ने न केवल सीएम बनाया
बल्कि परिवार के कई अन्य सदस्यों को भी राजनीति में उतार कर उनके कॅरियर
के ग्राफ को बढ़ाया। हालत यह है करीब १९ पारिवारिक सदस्यों के साथ समाजवादी
पार्टी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक कुनबा बन गई है।

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अखिलेश सरकार और सांप्रदायिक तनाव



समाजवादी
पार्टी की सरकार में सांप्रदायिक तनाव बड़ा मुद्दा बन जाता है। मुजफ्फरनगर
में सितम्बर 2013 को हुए साम्प्रदायिक दंगों में कई लोग मारे गए। दंगे की
आग शामली, सहारनपुर, बागपत तथा मेरठ तक फैल गई। सीएम अखिलेश को मीडिया ने
इस मुद्दे पर खूब घेरा। कार्टूनिस्टों ने भी अपनी कूची चलाई।

लंदन में जन्मदिन का जश्न

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सीएम
अखिलेश यादव अपना जन्मदिन लंदन में मना रहे हैं। वह अपनी पत्नी डिंपल और
बच्चों के साथ चार दिन लंदन में रहेंगे। इस दौरान मुलायम के परिवार का कोई
और सदस्य उनके साथ नहीं होगा। सिर्फ कुछ करीबी दोस्त उनके साथ होंगे।

युवाओं को बांटा लैपटॉप

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सीएम
अखिलेश यादव के कार्यकाल की सबसे लोकप्रिय योजना रही है युवाओं को लैपटॉप
वितरण की। बारहवीं उत्तीर्ण होने के बाद अखिलेश सरकार ने युवाओं को लैपटॉप
बांटा। हालांकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि सीएम की इस योजना से राजस्व को
बहुत बड़ा नुकसान हुआ।

सपा की जान सैफई महोत्सव

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सपा
सरकार की जान और पहचान है सैफई महोत्सव। हर साल भव्य पैमाने पर सैफई
महोत्सव का आयोजन होता है। विपक्ष का आरोप है कि इस पर सरकार खजाने से
करोड़ों रुपए लुटाती है। बहरहाल, इस बार के सैफई महोत्सव में सीएम अखिलेश
के उदघाटन समारोह में न पहुंचने पर खूब चर्चा हुई थी। मीडिया ने इस पर खूब
लिखा। कार्टून भी बने।

अखिलेश की नाक

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मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव की नाक थोड़ी लंबी है। इसलिए प्राय: कार्टूनिस्टों ने उनकी नाक
को विशेषतौर उभारा है। हालांकि सीएम अखिलेश अपनी नाक को लेकर बहुत सजग है।
शायद इसीलिए वे कहते हैं कि-मैं राजनीति में कुछ पाने के लिए नहीं, बल्कि
कुछ करने के लिए आया हूं। काम के प्रति मेरी निष्ठा में न तो तब कमी थी, न
आज है। मैं अपना काम पूरी ईमानदारी से करता हूं। इसीलिए आधी बाधाएं तो वैसे
ही दूर हो जाती हैं। मेरी नीयत साफ है। मैं इसे ऊपर वाले का आशीर्वाद
मानता हूं। जनता से किए गए वायदे पूरे करना मेरा कर्तव्य ही नहीं, राजनीतिक
धर्म भी है, जिसे मैं निभा रहा हूं...।

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