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सीता-राम विवाह में उल्लास से झूमे अयोध्यावासी, राधे राधे से गूंजा मथुरा

- विवाह पंचमी भगवान श्री राम और माता सीता की शादी की सालगिरह के रूप में मनाए जाने वाले एक लोकप्रिय हिंदू त्यौहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार, विवाह पंचमी मार्गशीर्ष के महीने में शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन मनाया जाता है। विवाह पंचमी के ही दिन वृंदावन के निधिवन में श्री बांके बिहारी जी महाराज का प्राकट्य उत्सव, बिहार पंचमी भी मनाया जाता है।

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सीता-राम विवाह में उल्लास से झूमे अयोध्यावासी, राधे राधे से गूंजा मथुरा

सीता-राम विवाह में उल्लास से झूमे अयोध्यावासी, राधे राधे से गूंजा मथुरा

लखनऊ. अयोध्यावासी बुधवार को एक अलग रंग में नजर आ रहे थे। बुधवार को अगहन शुक्ल पंचमी थी। श्री राम सीता विवाह महोत्सव की वर्षगांठ। इसको याद करने के लिए मां सीता और भगवान राम का विवाह महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भगवान राम की भव्य बारात निकाली गई। इस बारात में सजे धजे हाथी घोड़े व बाजे गाजे के साथ रामभक्त नाचते गाते जानकी महल पहुंचे। जहां बारात का भव्य स्वागत हुआ। देर रात विवाह में ढोल बजे, मंगल गीत गाए गए। फिर सनातन परंपरा के अनुसार विवाह सम्पन्न हुआ। इसके बाद जयकारे से पूरा पंडाल गूंज गया। विवाह पंचमी के ही दिन वृंदावन के निधिवन में श्री बांके बिहारी जी महाराज का प्राकट्य उत्सव, बिहार पंचमी भी मनाया जाता है।

आज होगी विदाई :- अयोध्या के राम कोट क्षेत्र स्थित माता सीता के उपासक मंदिर रंग महल में जनक नंदनी माता सीता के पक्ष में हल्दी रस्म, मेहंदी रस्म के साथ हिंदू रिवाज से होने वाले सभी रस्में पूरी हुई। जनक की भूमिका निभाने वाली महंत राम शरण दास ने बताया कि, मैंने किशोरी जी की पांव पूजन किया। फिर सात फेरे हुए सिंदूरदान किया गया। लावा परछा गया। और गुरुवार सुबह विदाई के समय कलेवा होगा।

प्रभु के समीप जाने का सशक्त माध्यम :- राम शरण दास ने आगे बताया श्री सीताराम विवाहोत्सव प्रभु के समीप ले जाने का सशक्त माध्यम है। विवाह उपासना से प्रभु का सामीप्य पाया जा सकता है।

चेतना और प्रकृति का मिलन :- महंत बिन्दूगाद्याचार्य देवेंद्र प्रसादाचार्य ने बताया कि भगवान राम चेतना के प्रतीक हैं और माता सीता प्रकृति शक्ति की। चेतना और प्रकृति का मिलन ही सीताराम विवाहोत्सव है।

विवाह पंचमी :- विवाह पंचमी भगवान श्री राम और माता सीता की शादी की सालगिरह के रूप में मनाए जाने वाले एक लोकप्रिय हिंदू त्यौहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार, विवाह पंचमी मार्गशीर्ष के महीने में शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन मनाया जाता है।

बांके बिहारी का प्राकट्य उत्सव मना :- जन-जन के आराध्य भगवान बांके बिहारी जी का प्राकट्य उत्सव बुधवार को वृंदावन में धूमधाम से मनाया गया। निधिवन राज मंदिर में भोर में प्राकट्य स्थल का पंचामृत से महाभिषेक किया गया। मंगला आरती उतारी गई, बधाई गीत गाए गए। राधे-राधे के स्वरों से पूरा परिसर गूंजा गया। इस नयनाभिराम दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे।

लोकार्पण से पहले निकलेगी शिव बारात :- श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण से पहले काशी में महामृत्युंजय महादेव मंदिर से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर तक शिव बारात निकाली जाएगी। इसकी जिम्मेदारी दारा नगर शिव बारात समिति को दी गई है। आयोजन समिति के अध्यक्ष जगदंबा तुलस्यान और महामंत्री दिलीप सिंह ने कहा कि इस भव्य शोभायात्रा में देश की 11 नदियों का जल शामिल किया जाएगा।

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