
क्या था गेस्ट हाउस कांड? PC: IANS
Complete Story Of Guest House Kand:उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बृहस्पतिवार को आयोजित विधानमंडल के विशेष सत्र में महिला आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के दौरान 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस कांड की गूंज सुनाई दी। सत्ता पक्ष ने इस घटना का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया, वहीं विपक्ष ने भी तीखे जवाब दिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा कि समाजवादी पार्टी का असली चेहरा 1995 के स्टेट गेस्ट हाउस कांड में सामने आ चुका है, जब प्रदेश की पहली दलित मुख्यमंत्री के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय BJP ने मायावती (Mayawati) को समर्थन देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की थी। CM ने BJP नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी(Brahm Dutt Dwivedi) का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर मायावती को भीड़ से बचाया था। आपको बताते हैं चर्चित गेस्ट हाउस कांड के बारे में।
साल 1993 में तत्कालीन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) और तत्कालीन BSP प्रमुख कांशीराम (Kanshi Ram) के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन हुआ था। उस समय उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा था और कुल 422 सीटें थीं और इस गठबंधन ने चुनाव जीतकर सरकार बनाई। हालांकि, 2 जून 1995 को बसपा ने समर्थन वापस ले लिया, जिससे मुलायम सिंह सरकार अल्पमत में आ गई। इसी राजनीतिक तनाव के बीच लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में बड़ी घटना घटी।
बताया जाता है कि 2 जून 1995 को मायावती अपने विधायकों के साथ गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 1 में बैठक कर रही थीं। तभी कथित तौर पर सपा से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ वहां पहुंची और हमला कर दिया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बसपा विधायकों के साथ मारपीट हुई, कई को जबरन बाहर ले जाया गया और माहौल पूरी तरह अराजक हो गया।
गेस्टहाउस में उस दिन घटी घटना की जानकारी मायावती के जीवन पर आधारित अजय बोस की किताब 'बहनजी' विस्तार से बताती है। बताया जाता है कि कुछ कथित तौर पर सपा के गुंडों ने 1995 के गेस्टहाउस कांड में BSP सुप्रीमो मायावती को कमरे में बंद करके उनकी पिटाई की थी। इतना ही नहीं उनके कपड़े तक इस दौरन फाड़ दिए गए थे। जिसके बाद किसी तरह मायावती ने अपने को कमरे में बंद कर खुद को बचाया था। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस कांड को गेस्टहाउस कांड कहा जाता है।
घटना के दौरान मायावती ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था। इसी बीच ब्रह्मदत्त द्विवेदी मौके पर पहुंचे और भीड़ को पीछे हटाने में अहम भूमिका निभाई। कहा जाता है कि उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की। इस घटना के बाद मायावती ने उन्हें अपना ‘भाई’ माना और सार्वजनिक तौर पर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
इस घटना के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों ने साहस दिखाते हुए हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन कई अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी सवाल उठे। स्थिति को काबू में लाने के लिए बाद में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए, जिसके बाद धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए।
इस कांड के बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रिश्तों में गहरी दरार आ गई। इसके बाद लंबे समय तक दोनों दलों के बीच न तो चुनाव पूर्व और न ही चुनाव बाद कोई गठबंधन हुआ।
1995 का गेस्ट हाउस कांड आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और विवादित अध्याय माना जाता है। महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी इस घटना का जिक्र राजनीतिक बहस को और तीखा बना देता है।
संबंधित विषय:
Published on:
01 May 2026 11:43 am
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
