
उत्तर प्रदेश में महिला प्रशासनिक नेतृत्व की नई तस्वीर (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP Administration Women IAS Officers: उत्तर प्रदेश प्रशासनिक व्यवस्था में महिला सशक्तिकरण की मजबूत तस्वीर अब साफ दिखाई देने लगी है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में 12 महिला आईएएस अधिकारियों को जिलाधिकारी (डीएम) की जिम्मेदारी सौंपकर शासन ने प्रशासनिक नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का स्पष्ट संदेश दिया है। कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं की निगरानी, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और प्रशासनिक सुधारों में ये महिला अधिकारी प्रभावी भूमिका निभा रही हैं।
कभी प्रशासनिक सेवा में महिलाओं की संख्या सीमित मानी जाती थी, लेकिन आज उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में कई महत्वपूर्ण जिलों की कमान महिला अधिकारियों के हाथ में है। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और महिला नेतृत्व की स्वीकृति का भी प्रतीक बन चुका है।
राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है कि प्रशासनिक तंत्र में दक्ष, संवेदनशील और परिणाम आधारित नेतृत्व को आगे बढ़ाया जाए। महिला जिलाधिकारियों की नियुक्ति इसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है। ये अधिकारी विकास परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, डिजिटल प्रशासन और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में सक्रिय पहल कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महिला प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली में संवाद, संवेदनशीलता और बेहतर जनसंपर्क देखने को मिलता है, जिससे योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत महिला जिलाधिकारियों की सूची इस प्रकार है-
यह सूची बताती है कि युवा और अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व का संतुलन प्रदेश में स्थापित किया जा रहा है।
जिलाधिकारी किसी भी जिले में सरकार का सर्वोच्च प्रशासनिक प्रतिनिधि होता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने से लेकर विकास योजनाओं की निगरानी, आपदा प्रबंधन, चुनाव संचालन, राजस्व प्रशासन और जन शिकायतों के समाधान तक सभी प्रमुख जिम्मेदारियां डीएम के पास होती हैं। महिला अधिकारियों के नेतृत्व में कई जिलों में नवाचार आधारित प्रशासनिक मॉडल देखने को मिल रहे हैं। डिजिटल मॉनिटरिंग, जन संवाद कार्यक्रम, महिला सुरक्षा अभियान और स्वच्छता अभियान को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल अपनी तेज प्रशासनिक कार्यशैली और सख्त निर्णयों के लिए जानी जाती हैं। अवैध खनन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उनके नेतृत्व में जिले में विकास परियोजनाओं की निगरानी को मजबूत किया गया है।
देवरिया की डीएम दिव्या मित्तल प्रशासनिक नवाचारों और जनभागीदारी मॉडल के लिए चर्चित हैं। वहीं गौतमबुद्धनगर की डीएम मेधा रूपम स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, डिजिटल प्रशासन और शहरी विकास योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
गोंडा, बस्ती, महोबा, बांदा और अमरोहा जैसे जिलों में महिला जिलाधिकारियों की नियुक्ति से ग्रामीण विकास योजनाओं में तेजी आई है। स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा, महिला उद्यमिता, पोषण अभियान और स्कूल शिक्षा सुधार जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का प्रशासनिक नेतृत्व स्थानीय महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रहा है।
महिला डीएम विशेष रूप से महिला सुरक्षा, बालिका शिक्षा और सामाजिक जागरूकता अभियानों को प्राथमिकता देती दिखाई दे रही हैं। मिशन शक्ति, महिला हेल्प डेस्क, एंटी-रोमियो अभियान और बाल संरक्षण कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन में इन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
2013 से 2016 बैच की कई अधिकारी वर्तमान में जिलों का नेतृत्व कर रही हैं। इससे प्रशासन में नई सोच, तकनीकी उपयोग और तेज निर्णय प्रक्रिया देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया आधारित शिकायत निस्तारण और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी है।
उत्तर प्रदेश में एक साथ 12 महिला जिलाधिकारियों की तैनाती प्रशासनिक इतिहास में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह संदेश देता है कि प्रशासनिक नेतृत्व अब लैंगिक सीमाओं से आगे बढ़ चुका है और क्षमता के आधार पर जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। महिला अधिकारी न केवल शासन की योजनाओं को जमीन पर उतार रही हैं बल्कि समाज में नेतृत्व की नई परिभाषा भी गढ़ रही हैं।
Published on:
22 Feb 2026 03:45 am
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