
Domestic violence
लखनऊ. महिलाओं के सुरक्षित जीवन व रहन-सहन की शैली में बड़े स्तर पर सुधार लाने के लिए देश व्यापी योजनाएं और कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में महिलाओं की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है। नैशनल फैमिली वेल्फेयर ऐंड हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-4) के आकड़ों की मानें तो यूपी में आज भी 37 प्रतिशत से अधिक महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार बन रही हैं। इनमें से 15 प्रतिशत से कम महिलाओं ने घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई। वहीं ज्यादातर ने चार दीवारी के अंदर ही इसे बर्दाश करने का विकल्प चुनना बेहतर समझा। वहीं बाल विवाह और महिलाओं से जुड़ी बिमारियों के हल पर अब भी बड़ा प्रश्न चिन्ह बना हुआ है।
घरेलू हिंसा पर मौन
महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा के मामलों में गिरावट आने की बाते नैशनल फैमिली वेल्फेयर ऐंड हेल्थ सर्वे के आकड़ों को देखकर खोखली सी महसूस हो रही है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में रहने वाली कुल महिलाओं में 37 प्रतिशत महिलाएं आज भी घरेलू हिंसा का शिकार है। तमाम जागरुकता अभियान के बावजूद महिलाएं इन यातनाओं को घर में सुलझाने और खुद सहते रहने के विकल्प को चुन रही हैं। इसलिए करीब 22 प्रतिशत महिलाओं ने कभी इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई। इन आकड़ों के मुताबिक घरेलू हिंसा का शिकार महिलाओं में 20 प्रतिशत महिलाएं कम पढ़ी लिखी हैं।
सेनेटरी नेपकिन से दूरी
यूपी में महिलाएं अभी भी पूरी तरह से मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान सही तरीके के सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल नहीं करती है। आकड़ों के मुताबिक 15 से 24 वर्ष के बीच की 47 प्रतिशत लड़कियां व महिलाएं आज भी मासिक धर्म के दौरान सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल नहीं करती।
एचआईवी-एड़्स को जानकारी नहीं
यूपी में महिलाओं को एचआईवी-एड्स के संबंध में पर्याप्त जानकारी नहीं हैं। प्रदेश में 53 प्रतिशत महिलाएं एचआईवी-एड्स से जुड़ी जानकारी जानती ही नहीं है, उन्हें कॉडोम से इसके बचाव तक का ज्ञान भी नहीं है। प्रदेश में केवल 18 प्रतिशत महिलाओं को ही एचआईवी-एड्स से बचाव की पूर्ण जानकारी हैं।
शिशु मृत्यु दर मेें प्रदेश नंबर वन
यूपी शिशु मृत्यु दर के मामले में पूरे देश में सबसे ऊपर आता है। यहां अभी भी 16 बच्चों में एक बच्चे की मृत्यु पहले ही साल में हो जाती है। वहीं 13 में से एक बच्चा पांच साल की उम्र भी पूरा नहीं कर पता। हालांकि इसके बावजूद शिशु मृत्यु दर में पहले से सुधार हुआ है, इन आकड़ों में कमी आई है।
कुपोषण से ग्रसित
यूपी में कुपोषण एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इसकी चपेट में बच्चों के साथ वयस्क भी शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश भर में करीब 46 प्रतिशत बच्चों की लंबाई उनकी उम्र की तुलना में काफी कम हैं। प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के 40 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं।
यहां सुधर रही महिलाओं की स्थिति
प्रदेश में 55 प्रतिशत महिलाओं के बैंक खाते खुले हुए हैं। इसमें ज्यादातर महिलाएं खातों को खुद संचालित करती हैं। वहीं 25 प्रतिशत महिलाओं नौकरी पेशा हैं। 26 प्रतिशत महिलाएं अकेले या संयुक्त रूप से जमीन की मालिक हैं। वहीं 33 प्रतिशत महिलाएं अकेले या संयुक्त रूप से घर की मालिक हैं।
Published on:
07 Oct 2017 03:31 pm
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