
CG Board Exam: महासमुंद में बारहवीं हिंदी का पेपर लीक होने के बाद दोबारा परीक्षा कराना तो शिक्षा विभाग के लिए चुनौती था ही, लेकिन अब कॉपियों की जांच में सामने आई लापरवाही ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तय समय बीत जाने के बाद भी हजारों कॉपियां जांच के इंतजार में पड़ी हैं, क्योंकि आधे से ज्यादा शिक्षक मूल्यांकन केंद्र तक पहुंचे ही नहीं। इससे छात्रों के रिजल्ट में देरी तय मानी जा रही है।
शिक्षा विभाग के मुताबिक 12वीं हिंदी विषय की परीक्षा 10 अप्रैल 2026 को दोबारा आयोजित की गई थी। इसके बाद 13 और 14 अप्रैल को उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन, यह लक्ष्य अधूरा रह गया। करीब 7 हजार उत्तर पुस्तिकाएं जांच के लिए केंद्र पर पहुंचीं, लेकिन दो दिनों में केवल 3 हजार कॉपियों की ही जांच हो पाई। बड़ी संख्या में मूल्यांकनकर्ताओं की अनुपस्थिति के कारण काम प्रभावित हुआ और अब भी करीब 4 हजार कॉपियां जांच के लिए बाकी हैं। शिक्षा विभाग ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए मूल्यांकनकर्ताओं को नोटिस जारी किया है।
सभी स्कूलों के प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि हिंदी विषय के शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर मूल्यांकन केंद्र भेजा जाए और अनुपस्थित रहने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। समन्वयक संस्था के प्राचार्य एचके आचार्य ने बताया कि नोटिस जारी करने के बाद भी स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। 13 अप्रैल को सिर्फ 62 शिक्षक ही पहुंचे, जबकि दूसरे दिन 14 अप्रैल को यह संख्या 72 रही।
अपेक्षा के मुकाबले यह संख्या काफी कम है, जिससे काम समय पर पूरा नहीं हो पाया। कांपियां जांच में देरी होने से रिजल्ट घोषित करने में विलंब हो सकता है। जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने कहा कि संबंधित शिक्षकों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं। यदि इसके बाद भी वे मूल्यांकन कार्य में शामिल नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, सरायपाली, बसना और पिथौरा जैसे दूरदराज क्षेत्रों के बड़ी संख्या में शिक्षक मूल्यांकन कार्य में शामिल नहीं हो पाए हैं। लंबी दूरी, आवागमन की परेशानी और समय की कमी को इसकी वजह माना जा रहा है। कई शिक्षकों के समय पर नहीं पहुंचने से मूल्यांकन केंद्रों में अपेक्षित संख्या नहीं बन पा रही है, जिससे काम की गति धीमी हो गई है। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो बचे हुए हजारों कॉपियों की जांच में और देरी हो सकती है। इससे पूरे मूल्यांकन शेड्यूल पर असर पडऩे की आशंका है।
मूल्यांकन कार्य में हो रही देरी का सीधा असर 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम पर पडऩा तय माना जा रहा है। हर साल 10 या 11 मई तक रिजल्ट जारी कर दिए जाते हैं, जिससे छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रिया में सुविधा मिलती है। इस बार परीक्षा भी तय समय से पहले शुरू और समाप्त हुई थी। उम्मीद थी कि परिणाम भी जल्दी आएंगे। लेकिन हिंदी विषय की कॉपियों की जांच में हुई देरी ने इस संभावना को कमजोर कर दिया है। छात्रों व अभिभावकों की चिंता अब बढऩे लगी है, क्योंकि रिजल्ट में देरी से प्रवेश व काउंसलिंग प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।
पहले दो चरण में समय पर हुआ था काम
जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड के अन्य विषयों की कॉपियों की जांच पहले ही तय समय में पूरी कर ली गई थी। करीब 90 हजार 273 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन दो चरणों में किया गया और समय पर अंकसूची तैयार कर भेज दी गई। 6 अप्रैल तक यह पूरा काम खत्म हो चुका था, जिसे विभाग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा था। लेकिन हिंदी विषय का पेपर लीक होने के कारण तीसरे चरण में अलग से परीक्षा और मूल्यांकन करना पड़ा। इसी अतिरिक्त चरण में अब अव्यवस्था और देरी सामने आ रही है। जहां पहले काम समय पर हो गया था, वहीं अब उसी सिस्टम में सुस्ती दिख रही है।
Updated on:
15 Apr 2026 02:11 pm
Published on:
15 Apr 2026 02:10 pm
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