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छत्तीसगढ़ का ये जिला जहां प्रतिदिन होता है इतने हजार लीटर दुग्ध का उत्पादन

दूध उत्पादन का उत्साह इतना की कम पड़ रहा 2 हजार लीटर क्षमता वाला चिलिंग प्लांट

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महासमुंद. पिथौरा विकासखंड का ग्राम गोड़बहाल एक ऐसा गांव है, जहां छत्तीसगढ़ दुग्ध संघ मर्यादित द्वारा दुग्ध संकलन के लिए 2 हजार लीटर क्षमता का चिलिंग प्लांट लगाया गया है। अब गांव तथा समीप के गांव में बनाए गए अन्य दुग्ध सहकारी समितियों से दूध का संकलन इतना अधिक बढ़ गया है कि संकलित दूध को ठंडा कर सुरक्षित रखने के लिए अधिक क्षमता वाले चिलिंग प्लांट की जरूरत पडऩे लगी है।

इस गांव के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के लिए विशेष उत्साह और उमंग दिखाई देता है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के पिथौरा-बसना क्षेत्र का नाम दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से विशेष रूप से लिया जाता है। छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ के लिए संकलित होने वाले कुल दूध का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा महासमुंद जिले में संकलित होता है। गांव में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के प्रति उत्साह को देखते हुए वन विभाग के माध्यम से संचालित ग्राम वन प्रबंधन समिति भी अब अपना योगदान देने के लिए सामने आई है।

समिति ने अपनी अर्जित आय से गांव वालों को केवल 4 प्रतिशत ऋण दर पर उन्नत गाय खरीदने के लिए एक करोड़ की विशेष योजना बनाई है। इसमें से लगभग 60 लाख रुपए की राशि पशुपालकों को गाय खरीदने के लिए दी जा चुकी है और इस राशि से गांव वालों ने अपने दुग्ध उत्पादन को तेजी से आगे बढ़ाया है। कलक्टर हिमशिखर गुप्ता, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऋतुराज रघुवंशी और वनमंडलाधिकारी आलोक तिवारी ने गोड़बहाल गांव पहुंचकर गांव में दुग्ध सहकारी समिति के पदाधिकारियों से रूबरू होकर चर्चा की।

देखने पहुंचे कलक्टर, जिला सीईओ व डीएफओ
पशुपालकों तथा दुग्ध उत्पादकों से बातचीत करते हुए कलक्टर गुप्ता ने कहा कि दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए यह जरूरी है कि अधिक संख्या में पशु हों, पशुओं की प्रजाति उन्नत हो और उन्हें पशु आहार अच्छा खिलाया जाए। पशुपालकों ने बताया कि निजी कंपनियों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ दुग्ध संघ द्वारा राशि का भुगतान बेहतर रूप से किया जाता है। इसके अलावा पशु दाना और दुग्ध परिवहन के लिए राशि भी दी जाती है।

उन्होंने बताया कि चिलिंग प्लांट की क्षमता बढऩे से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। कलक्टर ने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया और कहा कि मनरेगा के माध्यम से दुग्ध पालकों को पशुपालन के लिए लगभग 50-50 हजार रुपए की राशि पशु शेड की स्वीकृति दी जाएगी। कलक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने वनमंडलाधिकारी से यह भी कहा कि नेपियर घास उत्पादन के लिए मनरेगा के माध्यम से राशि स्वीकृत की जाएगी। उन्होंने समिति अध्यक्ष की डेयरी का अवलोकन किया।