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नर्मदा तट पर जवारा विसर्जन के लिए उमड़ा सैलाब, हर तरफ दिखी हरियाली

जवारा विसर्जन के लिए नर्मदा तट पहुंचे श्रद्धालु

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नर्मदा तट पर जवारा विसर्जन के लिए उमड़ा सैलाब, हर तरफ दिखी हरियाली

नर्मदा तट पर जवारा विसर्जन के लिए उमड़ा सैलाब, हर तरफ दिखी हरियाली

मंडला. जिला मुख्यालय अंतर्गत गोंड राजवंश की राजधानी रामनगर के नजदीक चौगान की मढ़िया में धूमधाम से नवरात्र पर्व मनाया गया। शुक्रवार को पूरी श्रृद्धा-भक्ति से माता के जवारों का विसर्जन किया गया। इसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। जनजाति समाज की कुल देवी के स्थान चौगान की मढ़िया में नवरात्र पर्व के दौरान लगभग तीन हजार जवारे कलश स्थापित किए थे। नौ दिन उपरांत शुक्रवार की सुबह परंपरागत रीति रिवाज से गाजे-बाजे सहित चिलचिलाती धूप में नंगे पैर 2 किमी का पैदल सफर तय कर जवारे लेकर श्रद्धालु नर्मदा तट पहुंचे। यहां विधि-विधान के साथ जवारों को विसर्जन किया। इस दौरान आसपास के गांवों, पड़ोसी जिलों सहित छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मान्यता है कि चौगान की मढ़िया में देवी का वास है। लोग यहां दूर-दूर से आकर अपनी समस्याओं से निजात पाते हैं।

मार्ग में छा गई हरियाली

चौगान से रामनगर तक की सड़क सोमवार की सुबह सफेद और हरे रंग से रंग गई। जहां हरियाली ने खुशहाली का प्रतीक माना जाता है तो वहीं सफेद पोशाक से रंगे श्रद्धालुओं ने शांति का संदेश दिया। गौंडकालीन राजधानी रामनगर स्थित चौगान की देवी मढ़िया से करीब 35 हजार कलश विसर्जन के लिए निकाले गए। सुबह से ही आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। आसपास के जिलों से भी लोग इस अभूतपूर्व नजारे को देखने के लिए इकट्ठा हुए। चौगान की मढ़िया का महत्व जिले के साथ ही आसपास के जिलों में भी अधिक है। अनुष्ठान में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और अन्य प्रदेशों के भक्तों की टोली शामिल हुई। रामनगर के अलावा चिखली, नकावल, झिरियाटोला, गुरार, जीना पलेहरा, मुनु, बिलगांव, चंदवारा, रामपुर, भोदर, डोंगरमंडला, इमलिया, डुंगरिया, अंजनिया एवं बंजी गांव के लोग भी चौगान मढ़िया दर्शन के लिए उमड़ पड़े। विसर्जन के लिए ग्रामीण महिलाएं एवं पुरुष अपने सिर पर जवारे कलश लेकर नर्मदा नदी के लिए रवाना हुए। गांव के संकरे रास्ते पर लगभग 2 किमी लंबी कतार अभूतपूर्व दृश्य बना रही थी। इस दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की गई। रामनगर में पुल के समीप नर्मदा नदी में जवारे का विसर्जन किया गया।