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सैकड़ों ग्रामीणों को फ्लोरोसिस से मुक्त कराया डॉ कर्महे ने

वल्र्ड कॉफे्रंस में इस बीमारी का इलाज बताया था असंभव

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Dr. Karmeha, hundreds of villagers freed from fluorosis

Dr. Karmeha, hundreds of villagers freed from fluorosis

मंडला. 90 के दशक की बात है.... जिला मुख्यालय से लगभग 14 किमी दूर गांव तिलईपानी में गया था वहां मानो साक्षात नर्क भोग रहे थे ग्रामीण। कोई चारों हाथ पैरों से जमीन पर रेंग रहा था तो कोई घिसट रहा था। इसमें बच्चे भी शामिल थे, बुजुर्ग भी, महिलाएं भी और युवा भी। दरअसल इन सभी को फ्लोरोसिस नाम की बीमारी ने दिव्यांग बना दिया था। उनके हाथ पैरों को निशक्त कर दिया था। उनकी दुर्दशा देखकर रोंगटे खड़े हो गए और मन ने मानो संकल्प ले लिया कि इनके लिए कुछ अवश्य करना चाहिए। यह बताते हुए सेवानिवृत्त आयुर्वेद चिकित्सक डॉ हर्ष कर्महे का गला रुंध गया।
आगे उन्होंने बताया कि इसी दौरान 5 नवंबर 1995 में पुट्टपर्थी में वल्र्ड कॉंफ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमे दुनिया भर के विशेषज्ञ, चिकित्सक, वैज्ञानिक, शोधकर्ता आदि शामिल होने वाले थे। दुनिया के 165 देशों के लोग यहां आने वाले थे। वे भी उसमें शामिल होना चाहते थे ताकि तिलईपानी के लोगों की दुर्दशा का उपचार पता लगाया जा सके।
कॉफे्रंस में दुनिया भर के चिकित्सकों, वैज्ञानिकों के बीच तिलईपानी की सर्वे रिपोर्ट रखी गई और उनसे इस संबंध में सहायता मांगी गई। डॉ कर्महे ने बताया कि उस कांफ्रेंस में सभी विशेषज्ञोंं एवं चिकित्सकों का एक ही कहना था कि फ्लोरोसिस बीमारी लाइलाज है। पूरी दुनिया में इस बीमारी का कोई इलाज नहीं।
लेकिन पुट्टपर्थी के सत्य साईं बाबा ने डॉ हर्ष कर्महे के पिता को कहा कि तिलईपानी में चिकित्सा शिविर लगाया जाए, सफलता मिलेगी। बस इस आशीर्वाद के सहारे, डॉ कर्महे ने कॉंफ्रेंस से लौटने के बाद तिलईपानी में शिविर की तैयारी की। कॉफ्रेंस में शामिल होने पहुंचे और विदेशों में भी लोगों का उपचार करने वाले आयुर्वेद चिकित्सक डॉ ओमप्रकाश बिरला के निर्देशन और रायपुर के चिकित्सक एमडी चिकित्सक डॉ केएम गंधर्व के सहयोग से तिलईपानी में शिविर का आयोजन किया गया। डॉ कर्महे ने बताया कि उनकी टीम मात्र 50 मरीजों के आने की संभावना पर कुछ दवाइयां लेकर तिलईपानी पहुंची थी लेकिन शिविर में जब 578 मरीज पहुंचे तो वे हताश हो गए कि इतने अधिक संख्या में आए मरीजों को आखिरकार दवा कैसे दी जाएगी? डॉ कर्महे बताते हैं कि वे बेहद निराश हो गए और सत्यसाईं बाबा से प्रार्थना की। आखिरकार मरीजों को दो तरह के आयुर्वेदिक चूर्ण और सत्यसाई बाबा की भभूत देकर लौटाया। डॉ कर्महे और उनकी टीम ने लगातार नौ वर्षों तक लगातार तिलईपानी में फ्लोरोसिस से जूझ रहे ग्रामीणों को आयुर्वेद पद्धति से उपचार किया। अब यह गांव फ्लोरोसिस लगभग मुक्त हो चुका है। सिर्फ एवरेज 500 में से एक या दो में यह रोग पाया जता रहा है। इस उपलब्धि को वे डॉ बिरला, डॉ गंधर्व का सहयोग और साथ में सत्यसाईं बाबा का आशीर्वाद मानते हैं।