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सीनियर सिटीजन डे पर अखल प्रयास कर रहे बुजुर्ग

परिवार की नींव होते है बुजुर्ग

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सीनियर सिटीजन डे पर अखल प्रयास कर रहे बुजुर्ग

सीनियर सिटीजन डे पर अखल प्रयास कर रहे बुजुर्ग

मंडला. परिवार की नींव घर के बुजुर्ग होते हैं, इसलिए उनका सम्मान किया जाता है। आज वर्ल्ड सीनियर सिटीजन डे बुजुर्गों को सम्मान देने का दिन है। बुजुर्ग परिवार के साथ समाज के लिए भी प्रेरणा बने हुए हैं। जो कार्य लोग जिम्मेदार होने पर भी नहीं करते हैं, उन्हें बुजुर्ग कर आज भी समाज को नया रास्ता दिखा रहे हैं। संदेश दे रहे हैं कि आज भी हम किसी से कम नहीं हैं। कोई योग सिखा रहा है तो युवाओं को नशा से दूर करने के लिए प्रेरित कर रहा है। किसी को बढ़ते पर्यावरण प्रदुषण की चिंता सता रही है। समाज के लिए कोई न कोई जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। ताकि समाज पूरी तरह स्वस्थ्य, सुरक्षित, शिक्षित बना रहे।

पर्यावरण प्रेम की सीख

पर्यावरण के प्रति प्रेम ने 66 की उम्र में सेवा निवृत्त शिक्षक को अलग ही पहचान दी है। शिक्षक के कार्यकाल से ये बच्चों में प्रकृति प्रेम की अलख जगा रहे हैं। हम बात कर रहे ग्राम अंजनिया शांति चौक निवासी और वसुधा आनंदम क्लब के सामाजिक कार्यकर्ता रोहिणी प्रसाद शुक्ला की। जो शिक्षक से सेवानिवृत्त होने के बाद वसुधा आनंदम क्लब के अंजनिया में संस्था चलाते हुए मोटिवेशनल कविताएं लिखते हुए राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त किया है। उन्होंने अपने निजी आवास में लकड़ियों के कई घोंसले बनाकर 2 दर्जनों से अधिक गौरैया को आशियाना दिए हुए हैं। इसके साथ ही आसपास के स्कूलों में समय समय पर पहुंचकर छात्र-छात्राओं को बढ़ते पर्यावरण प्रदुषण से अवगत कराकर पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करने प्रेरित करते हैं। विभिन्न प्रतियोगिताएं भी कराते हैं और बच्चों को पुरस्कृत भी करते हैं।

खेल मैदान के लिए कर रहे संघर्ष

महाराजपुर के बूढ़ी माई वार्ड निवासी 82 साल के पुरषोत्तम लाल डोंगरे के समाजसेवा के हौसलों के सामने उनकी उम्र कुछ भी नहीं है, वे किसी नवयुवक की तरह अपने आसपास की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करते रहे हैं। उनके उत्साह, कुछ कर गुजरने के इरादे नवयुवकों को भी प्रेरणा दे रही है। डोंगरे ने महाराजपुर के सबसे पुराने और एक मात्र पंडित जवाहर लाल नेहरू बालक हाई स्कूल के खेल मैदान को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। और उनका कहना है कि जब तक स्कूल के बच्चों के खेल मैदान की आखिरी एक इंच की जगह को भी वे अतिक्रमण से मुक्त नहीं करा लेते हैं वे चैन से नहीं बैठेंगे। डोंगरे ने बताया कि नगरपालिका द्वारा संचालित नेहरू स्कूल के बच्चों के लिए रेल्वे स्टेशन मार्ग पर करीब 8 से 10 एकड़ जमीन खेल मैदान के लिए सुरक्षित की गई थी। लेकिन देखरेख के अभाव में लगातार इस खेल मैदान की जमीन पर लोगों ने कब्जे करना शुरू कर दिया और आज इस मैदान की 60 से 70 प्रतिशत भाग में अतिक्रमण कर लिया गया है। उन्होंने 2010 में खेल मैदान को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए हाई कोर्ट में रिट दायर की जिसके बाद वर्ष 2012 में ही हाईकोर्ट से कलेक्टर को निर्देशित किया गया कि खेल मैदान की जमीन से अतिक्रमण हटाए जाएं। अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी नगरपालिका को दी गई, नगरपालिका ने मात्र 20 प्रतिशत अतिक्रमण को ही हटाया। डोंगरे ने बताया कि नपा के अधिकारियों का कहना था कि खेल मैदान की जमीन पर वर्षों से लोग रह रहे थे जिन्हें पट्टा दिया गया है और पट्टा मिलने से उनके प्रधानमंत्री आवास भी मिल गए हैं इसलिए पट्टा निरस्त करने के बाद ही कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकती है। लेकिन डोंगरे का कहना है कि वे हार नहीं मानेंगे और आखिरी दम तक बच्चों के खेल मैदान के लिए संरक्षित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रयास करते रहेंगे।