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आयुष विभाग में चरम पर भ्रष्टाचार, कर्मचारी संघ ने की जांच की मांग

आयुष अधिकारी रहते हैं नदारत

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Extreme corruption in AYUSH department

आयुष विभाग में चरम पर भ्रष्टाचार, कर्मचारी संघ ने की जांच की मांग

मंडला। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ जिला शाखा मंडला (आयुष प्रकोष्ठ) जिलाध्यक्ष राधेलाल नरेटी के नेतृत्व में प्रमुख सचिव आयुष विभाग मप्र शासन भोपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। कलेक्टर को सौंपे अपने ज्ञापन में जिलाध्यक्ष राधेलाल ने बताया कि डाँ पीडी गुप्ता जिला आयुष अधिकारी, मंडला के पद पर 18 सितम्बर 2017 से पदस्थ हैं। आयुष अधिकारी जब से शहर में पदस्थ है वो कभी यहां नहीं रहते है। बल्कि ग्वालियर शहर से सप्ताह में एक या दो दिन आकर शासकीय कार्य करते हैं। फलस्वरुप कार्यलीन कार्य अस्त-व्यस्त स्थिति में है तथा कार्यलीन कर्मचारियों पर इनका कोई नियंत्रण नहीं है।

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कर्मचारी आर्थिक रुप से प्रताडि़त हैं
अधिकांश कर्मचारियों के शासकीय स्वत्वों का भुगतान लंबे समय से लंबित होने के कारण कर्मचारी आर्थिक रुप से प्रताडि़त हैं। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित होने वाले महत्वपूर्ण बैठकों एवं संयुक्त परामर्शदात्री की बैठकों में भी जिला आयुष अधिकारी अनुपस्थित रहते हैं, जैसे 7 मार्च 2019 को जिला संयुक्त परामर्शदात्री की बैठक में भी आयुष अधिकारी स्वयं नहीं गये। इन सब कारणों से भी लंबित प्रकरणों का समाधान नही हो पाता है।

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मुख्यालय से गायब हो जाते हैं
विभागीय मासिक समीक्षा बैठकों से भी आयुष अधिकारी अधिकांश समय नदारत रहते हैं तथा अधिनस्थों को बैठक के लिए अधिकृत करते हुए मुख्यालय से गायब हो जाते हैं। फलस्वरूप दूर दराज के कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ता हैं। जिला प्रमुख होने के नाते मासिक दौरा कार्यक्रम कलेक्टर से अनुमोदित कराया जाकर उसकी प्रतिलिपि ग्रामीण औषधालयों को भेजी जानी चाहिए। इसे नहीं भेजी रही हैं। वर्ष 2019-2020 सामान्य प्रशासन मप्र शासन विभाग भोपाल द्वारा स्थानांतरण नीति के तहत शासकीय सेवकों के स्थानांतरण प्रशासनिक एवं स्वयं के व्यय पर करने के लिए आदेश जारी हुए हैं, ग्रामीण आयुष औषधालयों का निरीक्षण 12 एवं १३ जून को मधुपुरी, पदमी, दिवारा, बोकर, तिलई, टाटरी, चिरईडोगरी रेल्वे, धनौरा पहुँकर शासकीय अभिलेखों के साथ प्रतिकूल टिप्पणी की गई तथा शासकीय सेवकों के स्थानांतरण के लिए सुझाव देते हुए मन पसंद स्थान पर स्थानांतरण कर दिये जाने के लिए दबाव बनाया गया।

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कारण बताओं नोटिस जारी कर मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जाता है
औषधालय की निरीक्षण पंजी पर निरीक्षण टीप अंकित नहीं की जाती हैं तथा बाद में कार्यालय से कर्मचारियों को कारण बताओं नोटिस जारी कर मानसिक रुप से प्रताडि़त किया जाता हैं। जिला आयुष अधिकारी के कार्यालीन आदेश द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ दस औषधालय प्रभारियों की वार्षिक वेतन वृद्धियाँ बिना नियमों का पालन किए ही एकजाई रुप से रोक दी गई है। सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के अन्तर्गत कर्मचारियों को दण्डित किए जाने के लिए नियम बनाए गए हैं, जिसका पालन नहीं किया गया है । यह भी पढ़ें-दुष्कर्म व हत्या के मामले में आरोपियों को मिली आजीवन कारावास की सजा


ये रहे शामिल
ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के पदाधिकारीगण धरम सिंह धुर्वे, घनश्याम ज्योतिषी, दिनेश ठाकुर, मंगल यादव, डॉ तेजसिंह, डॉ दिलीप झारिया, दीनानाथ शुक्ला, हेमकरण मरावीं, दीपक पाठक, भानुप्रसाद उइके, रघुनाथ धुर्वे, श्रवण धुर्वे, उग्रसेन परते, बंसत उइके, बालसिंह मरावीं, दिलीप उइके, कृपाल मरावीं, अमितोष पटैल, शिवराम उइके, रश्मि श्रीवास, रंजना मसराम, गोमती मरावीं, कौशल्या सिंगौर मौजूद रहे।