
मंडला- जिले भर के शनि भक्त आज शनि जयंती मना रहे हैं। वहीं महिलाएं भी अमावस्या का व्रत धारण कर पूजा अर्चना कर रही हैं। वट सावित्री वृत और शनि जयंती दोनो साथ साथ मनाई जा रही है। इसके लिए शनि मंदिरों में तैयारी पहले से ही कर ली गई थी। ज्योतिषी के अनुसार जेठ दान-पुण्य का माह मान जाता है। सोमवती अमावस्या और शनि जयंती साथ होने से पवित्र नदियों में स्नान एवं शनि पूजन का खास महत्व है। शनि जयंती पर सूर्य पुत्र भगवान शनि का जन्म हुआ था। इस दिन सूर्य, चंद्र, मंगल व बुध एक साथ वृषभ राशि में हैं। जो शनि से सम-सप्तम योग बनाएंगे। धर्म-कर्म के लिए यह श्रेष्ठ संयोग है। शनि जयंती को लेकर मंडी स्थित शनि मंदिर में तरह-तरह के आयोजन हो रहे हैं।
यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, शनिदेव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इसके साथ ही शहर के हनुमान मंदिर पर भी शनि जयंती पर आयोजन हो रहा है। शनि मंदिरों में इस दिन दर्शन-पूजन व शनि का दान करने से शनि पीड़ा से मुक्ति मिलेगी। वहीं नदी में स्नान से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होगी। इस दिन तेल चढ़ा, गरीबों को वस्त्र, कंबल, छतरी आदि दान कर पुण्य लाभ पा सकते हैं। भगवान शनि को भारतीय ज्योतिष में न्याय का देवता कहा गया है। और मंगलवार के दिन शनि जयंती होने से इसका महत्व बढ़ गया है। वे लोग जो मंगल या शनि ग्रह से पीडि़त हैं उनको छोटा टोटका या उपाय भी बड़ा लाभ देगा।
बम्हनीबंजर के टिकरी टोला में स्थिति शनि मंदिर में भी विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इसके साथ ही रपटा घाट व भुआबिछिया स्थिति शनिमंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। पंडित लक्ष्मीकांत द्विवेदी ने बताया कि कि भारतीय पंचाग अनुसार ज्येष्ठ मास की कृष्णपक्ष की अमावस्या को शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष ये जयंती 15 मई को आ रही है। कुंडली में शनि की साढ़ेसाती हो या मंगल-शनि का आपस में राशि परिवर्तन हो, व्यक्ति परेशान होता है। ऐसे में कुछ छोटे उपाय करने से बड़े लाभ होते है। शनि व्यक्ति के न सिर्फ मन को अशांत करते है, बल्कि बाल सफेद करना, स्वास्थ्य खराब करना, धन की कमी करना, जॉब जाना आदि परेशानी का सामना कराता है।
द्विवेदी ने बताया कि सुंदरकांड का पाठ, हनुमान चालीसा का पाठ, काले घोड़े की नाल की अंगूठी या नाव के कील की अंगूठी पहनने से साढ़ेसाती में लाभ देता है। इसके अलावा शनिवार का व्रत, शनिवार को दान करने से लाभ होता है। शनि से जुड़ी वस्तुएं जैसे काली उड़द, तिल, लौहा, काले कपड़े आदि के दान से लाभ होता है। इतना ही नहीं, शनि सहस्त्रनाम का पाठ, शनि यंत्र की पूजा, प्रतिदिन पीपल में जल अर्पित करने से शनि का क्रोध समाप्त होता है।
ये नाम का करें जाप
शनि जयंती के दिन शनिदेव का पूजन करें व इसके साथ कोणस्थ, पिंगल, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद व पिप्पलाद इन नाम का जप करें। एक कांसे की कटोरी में तिल का तेल भर कर उसमें अपना मुख देख कर और काले कपड़े में काले उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, फल, काला कोयला और लोहे की कील रख कर डाकोत शनि का दान लेने वाले को दान कर दें। इसके अलावा भगवान हनुमान जी को चमेली या सरसो जो उपलब्ध हो तेल का दीपक शाम को लगाएं।
Published on:
15 May 2018 12:01 pm
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