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Amazing : महिला के लिए जानी दुश्मन बने सांप

एक साल में 12 बार डसा, फिर भी महिला सुरक्षित, सुनीये महिला की जुबानी

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रोहित चौकसे
निवास. बरसात की पहली बारिश के साथ ही सर्प अपने बिलों से बाहर आकर बसाहटी क्षेत्रों में अपना आशियाना और भोजन ढूंढने निकल जाते हैं। इसी दौरान कई बार लोगों को काट भी लेते हैं। जागरुकता के अभाव और अंधविश्वास के चलते कई बार सर्पदंश के पीडितों की मौत भी हो जाती है। लेकिन जागरुकता के अभाव में सर्पदंश होने पर लोग सबसे पहले झाड़फूंक कराने लगते हैं और जहरीले सांप के काटे जाने पर पीडितों की मृत्यु हो जाती है। उन सभी के लिये सावित्री दुबे ने उदाहरण प्रस्तुत किया है कि जागरुकता दिखाते हुए सर्पदंश के बाद बिना समय गवाएं मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए और ईलाज कराना चाहिए। सावित्री दुबे वही महिला हैं जिन्हें हाल ही में 12 वीं बार सांप ने काट लिया और वह भी साल भर के भीतर। फिर भी सावित्री सही सलामत हैं, जानकारी के अनुसार विकासखंड निवास के समीपी ग्राम कोहका 38 वर्षीय महिला सावित्री दुबे पति प्रमोद दुबे को वर्षभर में 12 बार सांप ने काटा सभी घर के आस-पास कभी पड़ोस पर तो कभी खेत पर लेकिन न तो सावित्री दुबे ने हिम्मत हारी और न ही परिजनों ने झाड़ फूंक जैसे परंपरागत अंधविश्वास का सहारा लिया। बल्की जागरुकता का परिचय देते हुए सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निवास ले जाकर ईलाज कराया। जिसके चलते सावित्री को कुछ नहीं हुआ। 12 बार सर्पदंश के बाद भी सावित्री को जीवित देख लोग यही कहते हैं कि जाको राखे साईंया मार सके न कोए।
पंडा-गुनिया के बजाए चिकित्सकीय सहायता पर दिखाया भरोसा
किसी परिजन को सांप के काटने की सूचना ही हमारे दिमाग को शून्य कर देती है और लोग घबराहट में जो जैसी सलाह देते हैं वैसा ही करने लगते हैं। जिसके कारण समय बर्बाद हो जाता है और मरीज को आराम भी नहीं मिलता। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पंडा गुनिया की मदद से झाड़फूंक कराया जाता है। लेकिन दुबे परिवार बिना समय गवांए सीधे अस्पताल ले गए। सावित्री दुबे आज हमारे बीच हैं।
चिकित्सकों ने दिखाई सक्रियता
सरकारी अस्पतालों प्राय: देखा यह जाता है कि मरीज को ईलाज के लिए लाने के बाद बहुत समय लिखा-पढ़ी में बीत जाता है। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निवास के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ विजय पैगवार सहित पूरी टीम सक्रियता व अनुभव के कारण गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिल रहा है।

Amazing : महिला के लिए जानी दुश्मन बने सांप
IMAGE CREDIT: patrika

क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चा व्याप्त
किसी क्षेत्र में सर्पदंश की घटना हो जाना चर्चा का विषय बन जाती है फिर यह तो एक की महिला को 12 वीं बार सर्पदंश की घटना है। जो निवास सहित आसपास के क्षेत्रों में जनचर्चा बनी हुई है कोई इसे किस्मत की धनी कह रहा है तो कोई पूर्व जन्म से जोड़ रहा है। कोई इसे भगवत भक्ति का प्रभाव कह रहा है कि सावित्री दुबे दिनरात भगवत भक्ति में लीन रहतीं हैं जिसके कारण जहरीले सांपों के द्वारा काटे जाने के बाद भी कोई असर नहीं हो रहा है।

ये बात सही कि कोहका निवासी 38 वर्षीय महिला सावित्री दुबे पति प्रमोद दुबे को वर्ष में 10 से 12 बार सर्पदंश का ईलाज कराने भर्ती कराया गया। जिसको बाकायदा सर्पदंश के निशान भी पाये जाते हैं। परिजनों की जागरुकता के चलते समय पर उपचार हो जाता है और महिला पूरी तरह ठीक हो जाती है।
डॉ विजय पैगवार, खंड चिकित्सा अधिकारी

मुझे वर्ष भर में 12 बार सांपों ने काटा है जिनमें सबसे पहले कोड़ीला, गेंहुआ, असढ़िया, करिया आदि सर्प के द्वारा मुझे काटा है। लेकिन इसके ईलाज के लिए मेरे परिजन पंडा-गुनिया से झड़ाई-फुंकाई न कराकर सीधे अस्पताल का सहारा लिया। जिसके कारण आज मैं सही सलामत हूं।
सावित्री दुबे, सर्पदंश पीड़िता