मंडला. कान्हा टाइगर रिजर्व में द्वितीय ग्रीष्मकालीन पक्षी सर्वेक्षण 1 जून से 4 जून तक किया गया। जिसमें कुछ दुलर्भ प्रजाति के पक्षी भी मिले हैं। जिनमें सेे स्पॉट बेलीड ईगल, उल्लू, इंडियन ब्लू रॉबिन, लार्ज टेल्ड नाइटजर, लेसर येलो नेप, डस्की ईगल, ब्रोज्ड ड्रोंगो, मार्शल इओरा नामक दुर्लभ प्रजाति के पक्षी देखे गए। चार दिवसीय सर्वे के दौरान 225 प्रजातियो के पक्षियों का सर्वे किया गया। बताया गया कि वाल्इडलाइफ एंड नेचर कंर्जेवेंसी इन्दौर की संस्था के सहयोग से पक्षी सर्वेक्षण का कार्य आयोजित किया गया। जिसके समापन पर रविवार को प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया। इस सर्वेक्षण के लिए आवेदको के अनुभव के आधार पर 13 राज्यों से 90 पक्षी विशेषज्ञो को चुना गया था। कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक सुनील कुमार सिंह भावसे ने बताया कि सर्वे में दो से तीन सदस्यीय टीम को टायगर रिजर्व के अलग अलग स्थान पर भेजा गया और तीन दिनो में बीट के अलग-अलग स्थान पर जाकर पक्षी सर्वेक्षण कार्य किया गया। प्रत्येक दल के साथ बीट गार्ड एवं केम्प सुरक्षा श्रमिक भी साथ में उपस्थित रहे। सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की गणना एवं उनके प्राकृतिक आवास, व्यवहार में कोई बदलाव तथा पिछले सर्वेक्षण में दिखाई दिए पक्षियों से उनका आकलन करना था। इस सर्वेक्षण में इस संपूर्ण सर्वेक्षण कार्य को संपन्न कराने में कान्हा टाईगर रिजर्व के उपसंचालक एनएस यादव बफर, पुनीत गोयल उपसंचालक कोर तथा सहायक संचालक एवं परिक्षेत्र अधिकारियों व कर्मचारियो का भी विशेष सहयोग रहा।
कान्हा टाइगर रिजर्व में द्वितीय ग्रीष्मकालीन पक्षी सर्वेक्षण 1 जून से 4 जून तक किया गया। जिसमें कुछ दुलर्भ प्रजाति के पक्षी भी मिले हैं। जिनमें सेे स्पॉट बेलीड ईगल, उल्लू, इंडियन ब्लू रॉबिन, लार्ज टेल्ड नाइटजर, लेसर येलो नेप, डस्की ईगल, ब्रोज्ड ड्रोंगो, मार्शल इओरा नामक दुर्लभ प्रजाति के पक्षी देखे गए। चार दिवसीय सर्वे के दौरान 225 प्रजातियो के पक्षियों का सर्वे किया गया। बताया गया कि वाल्इडलाइफ एंड नेचर कंर्जेवेंसी इन्दौर की संस्था के सहयोग से पक्षी सर्वेक्षण का कार्य आयोजित किया गया। जिसके समापन पर रविवार को प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया। इस सर्वेक्षण के लिए आवेदको के अनुभव के आधार पर 13 राज्यों से 90 पक्षी विशेषज्ञो को चुना गया था। कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक सुनील कुमार सिंह भावसे ने बताया कि सर्वे में दो से तीन सदस्यीय टीम को टायगर रिजर्व के अलग अलग स्थान पर भेजा गया और तीन दिनो में बीट के अलग-अलग स्थान पर जाकर पक्षी सर्वेक्षण कार्य किया गया। प्रत्येक दल के साथ बीट गार्ड एवं केम्प सुरक्षा श्रमिक भी साथ में उपस्थित रहे। सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की गणना एवं उनके प्राकृतिक आवास, व्यवहार में कोई बदलाव तथा पिछले सर्वेक्षण में दिखाई दिए पक्षियों से उनका आकलन करना था। इस सर्वेक्षण में इस संपूर्ण सर्वेक्षण कार्य को संपन्न कराने में कान्हा टाईगर रिजर्व के उपसंचालक एनएस यादव बफर, पुनीत गोयल उपसंचालक कोर तथा सहायक संचालक एवं परिक्षेत्र अधिकारियों व कर्मचारियो का भी विशेष सहयोग रहा।