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मंडला

video story:- प्रयाग का पुण्य लेने संगम में तर्पण, छत्तीसगढ़ से भी पहुंच रहे लोग, अव्यवस्था के बीच श्राद्ध

अनदेखी: घाट में जमी कापू से श्रृद्धालुओं को हो रही परेशानी

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मंडला. हिन्दू धर्म की मान्यताओं में पितरों को आमंत्रित कर श्राद्ध पक्ष में तर्पण की परंपरा है। 30 सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू हो गए, जिसका समापन 14 अक्टूबर को होगा। इस श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों को जल से तर्पण कर तिथि पर श्राद्ध किया जा रहा है। पितरों को पंद्रह दिन अमावस्या तक जल से तर्पण किया जाएगा। मंडला नगर के समस्त नर्मदा घाटों में तर्पण किया जा रहा है। उपनगर महाराजपुर का संगम घाट तर्पण के लिए खास है। मान्यता है कि यहां तर्पण करने से प्रयाग का पुण्य मिलता है। मंडला में नर्मदा तट के संगम, रपटा, हनुमान घाट, रंगरेज घाट समेत अन्य घाटो में अपने पितरो को जल तर्पण किया जा रहा है।

ये है मान्यता

पंडित विजयानंद शास्त्री के अनुसार जहां पर तीन नदियों का डेढ़ मील तक संगम रहता है वहां पर तर्पण करने से प्रयाग का पुण्य मिलता है। मान्यता है कि श्राद्घ पक्ष में पूर्वज धरती पर आते है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तर्पण के साथ-साथ गौ, श्वान, काग को भी भोजन दिया जाता है जिससे की पूर्वज संतुष्ट होकर अपने पुत्रो को धन-धान्य से परिपूर्ण रहने के साथ खुश रहने का आर्शीवाद देते है। श्राद्घ पक्ष में अपने पूर्वजो का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्राद्घकर्म किया जा रहा है।

कापू में दफन हो रहा संगम घाट

तर्पण व अस्थी विसर्जन के लिए पहुंचने वाले लोगों की सुविधा के लिए यहां टीन शेड व अन्य सुविधाएं तो उपलब्ध कराई गई है, लेकिन अस्थी विसर्जन व स्नान के लिए श्रृद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ती है। यहां करोड़ों की लागत से बने घाट कापू के कारण अनुपयोगी हो गए हैं। लोगों को मिट्टी में स्नान करना पड़ रहा है। वहीं घाट के आसपास लोग कचरा फेंकने का काम करते हैं। जिससे यहां कचरा व पॉलिथिन जमा हो जाती है। बताया गया कि विगत वर्ष एक समाजसेवी द्वारा संगम घाट में जमा कापू का श्राद्ध के पूर्व अलग करवाया गया था, जिसके बाद बने घाट तक पानी पहुंच पाया था, लेकिन इस वर्ष बाढ़ में जमा कापू घाट में बनी सीढ़ियों से करीब 20 से 30 फिट चौड़ाई में फैली हुई है। जिसके कारण यहां तर्पण करने आने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों को कापू पार करके संगम जाना पड़ रहा है। बता दें कि संगम घाट का पुराव होता जा रहा है, मिट्टी और कापू प्रतिवर्ष जमा होने से नर्मदा संगम क्षेत्र का जल स्तर कम हो रहा है, जमा होने वाली कापू के कारण घाट से करीब 100 फिट की दूरी में पानी की गहराई भी कम हो गई है। धीरे-धीरे पुराव होने से नर्मदा का पाट सकरा होते जा रहा है।