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जिले के सैकड़ों किसानों के खाते में नहीं पहुंची ऋण की राशि

रबी सीजन की फसल के किसान संकट में, साहूकारों के चंगुल में फंसने का खतरा

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The amount of loan did not reach the account of hundreds of farmers of

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मंडला. अक्टूबर माह की शुरूआत के साथ रबी सीजन शुरू हो चुका है। कुछ ही समय बाद खरीफ की फसल की कटाई का कार्य शुरू हो जाएगा। आने वाले समय में कृषि कार्य के लिए किसान रबी के सीजन का ऋण लेने के लिए सहकारी समितियों में पहुंचने लगे हैं। इसके लिए मंडला मुख्यालय स्थित सहकारी समिति के किसानों ने ऋण लेने के लिए आवश्यक प्रक्रिया के तहत आवेदन किया। लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद किसानों के खाते में ऋण की राशि नहीं पहुंची है। इससे मंडला सहकारी समिति के सैकड़ों किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हंै और वे आर्थिक संकट में घिर चुके हैं। इस बारे में किसानों का कहना है कि रबी के सीजन की शुरूआत का ही इंतजार कर रहे थे। लगभग दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद खाते में ऋण की राशि नहीं आने से किसान चिंतित हैं।
तत्काल ऋण की व्यवस्था
सहकारी बैंक में बनाई गई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसान के पास सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं तो उसे उसी दिन ऋण उपलब्ध हो सकता है। दरअसल किसान को सहकारी समिति से उसकी केसीसी के आधार पर ही ऋण उपलब्ध कराया जाता है। केसीसी में किसान की फसल का रकबा, उस रकबे में पैदावार किए जाने वाले फसल की किस्म के आधार पर ऋण की लिमिट निर्धारित की जाती है। रबी के सीजन की ऋण लिमिट और खरीफ के सीजन की ऋण लिमिट अलग अलग होती है। यदि केसीसीधारक किसान अपने समस्त दस्तावेज के साथ सहकारी समिति से संंबंधित सहकारी बैंक शाखा में उपस्थित हो और उससमय बैंक प्रबंधक भी उपलब्ध हो तो किसान को उसी दिन ऋण उपलब्ध हो जाता है यदि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समय रहते पूरी हो जाएं।
डीएमआर खाते से सेविंग अकाउंट में
जिला सहकारी बैंक के ऋण शाखा के अधिकारियों का कहना है कि केसीसीधारक किसान द्वारा अपनी निर्धारित लिमिट की पात्रता के अनुसार, ऋण राशि के लिए डिमांड किया जाता है। उक्त डिमांड सहकारी समिति से संबंधित सहकारी बैंक में जाता है। सहकारी बैंक में उसकी तय लिमिट के आधार पर डीएमआर खाते से सेविंग खाते में राशि जमा की जाती है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ही होती है। खाते में राशि आने के बाद किसान उसे निकाल सकता है।
बढ़ गई परेशानी
लालीपुर हार के किसान रमेश कछवाहा ने बताया कि वे अपनी ऋण की डिमांड दे चुके है। साप्ताहिक बैठक में उस पर चर्चा की भी की जा चुकी है। बताया गया है कि डिमांड को सहकारी बैंक भी भेज चुके हैं। तब भी राशि खाते में जमा नहीं कराई गई है। ये शिकायत सिर्फ रमेश कछवाहा की नहीं, मगनू, सेवक पटेल, रामकुमार बरमैया, पुस्सू मरकाम सहित 16 किसानो ने की है। उनका कहना है कि यदि समय पर राशि जमा नहीं कराई गई तो काम चलाने के लिए उन्हें साहूकार से ऋण लेने पड़ेगा जो आखिरकार किसानों के संकट को बढ़ाता ही है।