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मंडला. प्रदेश को टाइगर स्टेट का तमगा मिले अब पुरानी बात हो चुकी है। यहां के नेशनल पार्क और अभ्यारण में लगातार बाघों की मौत हो रही है और ये बिल्ली प्रजाति के सबसे विशेष नस्ल के लिए सुरक्षित नहीं रहे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश भर में हो रही बाघों की मौत में जिले का कान्हा टाइगर रिजर्व पहले स्थान पर है। यहां फिर एक मादा बाघ की मौत हो गई है। इस मौत ने पार्क प्रबंधन द्वारा किए जा रहे बाघ संरक्षण के तमाम इंतजामों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। बफर जोन के वन ग्राम बंटवार के जंगल में चार साल की मादा बाघ का शव संदिग्ध परिस्थिति में मिला है। जबकि प्रबंधन द्वारा मौत की वजह प्राकृतिक बताई जा रही है।
जानकारी अनुसार कान्हा नेशनल पार्क के कोर व बफर जोन में बाघों पर खतरा मंडरा रहा है। गत दिवस केटीआर बफर जोन में आने वाले वन ग्राम बंटवार में पानी की झिरिया के पास चार साल के मादा बाघ का शव मिला है। मादा बाघ की मौत कई संदेह का जन्म दे रही है। केटीआर बफर जोन डीएफओ अंजना तुर्की का कहना है कि वन ग्राम के पास ही जंगल में एक झिरिया के पास बाघिन का शव मिला है। बाघिन के शरीर में किसी भी प्रकार बाहरी चोट नहीं है जिससे मादा बाघ की मौत प्राकृतिक बताई जा रही है। केटीआर द्वारा मौत के कारणों को जानने के लिए डॉग स्क्वायड से भी आसपास के क्षेत्रों में सर्चिग कराई जा रही है। जिससे कोई सुराग लग सके। बाघिन के शव का बिसरा फोरेंसिक लैब भेजकर अंतिम संस्कार कर दिया गया है। एक ओर जहां बाघ देखते ही इंसानी शरीर में सिहरन उठ जाती है लेकिन जंगल में इन पर ही मौत मंडरा रही है।
केस-01 : 27 दिसंबर 2017 को किसली जोन में टी-17 नाम के बाघ ने एक शावक को अपना शिकार बनाया। उसका शव भी खा लिया और दो दिनों तक घटना स्थल पर ही रहा। इस दौरान शावक के साथ उसकी मां बाघिन टी-59 भी थी। अपने शावक को बचाने के लिए वह बाघ से भिड़ गई और उसे जख्मी भी कर दिया। घायल हो चुका टी-17 ने शावक को मार डाला। बताया गया है कि घायल बाघ का उपचार भी कान्हा प्रबंधन की टीम के द्वारा किया गया। मेटिंंग की तलाश में घूम रहा बाघ टी-17 ने 13 जनवरी को बाघिन टी-83 को घेर लिया। संघर्ष के दौरान टी-17 ने टी-83 को मार डाला।
केस-02 : 28 जनवरी की सुबह मुक्की जोन के ठेबा तालाब के पास एक बाघ शावक का शव मिला। केटीआर प्रबंधन ने बताया कि उसे बाघ टी-२४ ने मार डाला। इसके पहले जनवरी महीने में किसली जोन में ही टी- 83 बाघिन जिसे बुड़बुड़ी फीमेल के नाम से जाना जाता था उसे भी टी- 17 संगम मेल बाघ ने मार दिया था। दिसंबर महीने में किसली जोन में ही मुन्ना बाघ और एक बाघिन के बीच खूनी संघर्ष हुआ था जिसमें मुन्ना ने एक शावक को मार दिया था। इस संघर्ष में बाघिन और मुन्ना को गंभीर चोटें आई थीं।
केस-03 : कान्हा टाइगर रिजर्व में 7 अप्रैल को भी एक बाघ की मौत हो गई है। मौत का कारण आपसी संघर्ष बताया गया। किसली जोन के पीपरदर्रा बीट में जहां बाघ का शव मिला है वह टी-56 संगम मेल नामक बाघ का इलाका है। मृत बाघ के जबड़े एवं मुंह की सारी हड्डियां टूट गई हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाघों के बीच कितना कड़ा संघर्ष हुआ होगा। तमाम औपचारिकताएं पूरी कर बाघ के शव का पोस्टमार्टम कराया गया और जांच के लिए बिसरा का सैंपल फोरेसिंक लैब भेजा गया।
केस-04 : 18 अप्रैल को कान्हा नेशनल पार्क के मुक्की रेंज में एक बाघ शावक की मौत हो गई। कान्हा टाईगर रिजर्व से मिली जानकारी के अनुसार बाघ शावक की उम्र करीब एक माह के लगभग थी। जानकारी के अनुसार बाघ शावक टी-31 का बताया गया है। महावीर नाम के बाघ के साथ बाघिन टी-31 का संघर्ष हुआ। इस दौरान शावक की मौत हो गई। शावक को बचाने के लिए बाघिन ने काफी संघर्ष किया। बाघिन अपने शावक को अपने मुंह में दबा कर ले गई थी लेकिन उसकी मौत हो गई।
एक नजर में
14 जनवरी को केटीआर के किसली जोन में बुड़बुडी बघिन की मौत।
28 जनवरी को मुक्की जोन ढेबा तालाब के पास छह माह के शावक की मौत।
07 अप्रैल को किसली रेंज पीपरदर्रा में आपसी संघर्ष में चार साल के नर बाघ की मौत
18 अप्रैल को मुक्की जोन में एक माह के शावक को एक बाघ के द्वारा मारा गया।
03 मई को बंटवार के जंगल में चार साल बघिन का शव मिला है।
05 दिसंबर में पांच माह के शावक का शव किसली के खोपाडबरी में मिला था।
Published on:
05 May 2018 07:44 pm
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