
मंदसौर । नगर पालिका में मंगलवार को गठित हुई नई पीआईसी के विरोध से भाजपा की आंतरिक कलह सामने आने लगी है।नपा अध्यक्ष के खिलाफ पार्षदों की आवाज मुखर हो गई है।बुधवार को पीआईसी गठित किए जाने में भेदभाव का आरोप लगाते हुए भाजपा के ५ पार्षदों ने नपा अध्यक्ष को अपने इस्तीफे सौंपे हैं।इस्तीफे देने वाले पार्षदों का कहना था कि नपा अध्यक्ष ने पीआईसी गठित किए जाने में जातिवाद और भेदभाव किया है। गुरुवार को भी तीन अन्य पार्षद अपना इस्तीफा लेकर नपा कार्यालय पहुंच सकते हैं।इनमें एक पूर्व सभापति भी शामिल है।
नपा अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार ने मंगलवार को नई पीआईसी गठित कर घोष्ज्ञणा की थी।पीआईसी के गठन के बाद से ही इसका विरोध होने लगा।बुधवार को यह विरोध उस समय सबके सामने आ गया जब पांच पार्षद अपना इस्तीफा लेकर नपा अध्यक्ष के कार्यालय पहुंच गए।जो पांच पार्षद बुधवार को इस्तीफा लेकर पहुंचे इनमें वार्ड १६ के सुभाष गढ़वाल, वार्ड ८ की पार्षद आजाद देवी भारत कोठारी, वार्ड २३ की रेखा राजेश सोनी, वार्ड ४० के अनिल मालवीय और वार्ड ४ की अनिता सत्यनारायण भांबी शामिल है।
पूर्व सभापति सहित तीन पार्षद आज दे सकते हैं इस्तीफा
बुधवार को पांच पार्षदों के इस्तीफा देने के बाद चर्चाहै कि गुरुवार को पूर्व सभापति सहित तीन पार्षद अपना इस्तीफा दे सकते हैं।इस प्रकार ४० में से ८ पार्षद अपने इस्तीफे की पेश कर चुके हैं।अब देखना यह है कि पीआईसी और नपा अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार को कितना विरोध होता है।
पार्षदों ने लगाया जातिवाद और भेदभाव का आरोप
जिन पांच पार्षदों बुधवार को अपना इस्तीफा सौंपा है उनका कहना है कि पीआईसी गठित किए जाने के नपा अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार ने भेदभाव और जातिवाद किया है।अपनी ही जाति के लोगों को उन्हें सभापति के रूप में पदस्थ किया है।हालांकि पूर्व में चर्चा हुई थी यदि पीआईसी गठित होती है तो सभी सभापति बदले जाएंगे तो ऐसे में दो पूर्व सभापति को क्यों नहीं बदला गया।पार्षदों का कहना है कि अपने इस्तीफे के माध्यम से संगठन को सूचित कर दिया है।यदि आगे कार्रवाई नहीं होती है तो सीधे कलेक्टर को वे अपना इस्तीफा सौंपेंगे।पांचों ही पार्षदों का कहना था कि सभी को मौका मिलना चाहिए था, परंतु नपा अध्यक्ष ने अपनी मर्जी चलाते हुए अन्य पार्षदों को मौका नहीं दिया है।
सभापतियों ने भी जताई आपत्ति
चर्चा है कि दो पूर्व सभापतियों ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि हमारे में कार्यमें क्या कमी रह गई थी, जो हमें बदल दिया गया, वहीं जो दो सभापति यथावत रखे गए हैं उनके कार्य में क्या विशेषता थी।इन कुछ प्रश्नों को लेकर ही नपा अध्यक्ष बंधवार अपने ही संगठन में अब घिरे नजर आ रहे हैं।वार्ड १६ के पार्षद सुभाष गढ़वाल का कहना था कि अब नपा का निजीकरण हो गया है।ऐसे में हमारा वहां अब कोई कार्य नहीं बचा है।वहीं आजाद देवी भारत कोठारी ने कहा कि सभी पार्षदों को मौका मिलना चाहिए था, परंतु उन्हें मौका नहीं दिया गया और जातिवाद के आधार पर सभापति नियुक्ति किए गए हैं।
इनका कहना...
मुझे अभी आपके माध्यम से ही जानकारी मिली है कि पार्षदों ने इस्तीफा दिया है।फिलहाल मैं बाहर हूं, तीन दिन बाद मंदसौर पहुंच जाऊंगा।पार्षदों को समझाया जाएगा, संगठन की बात है। जातिवाद या भेदभाव पर संगठन काम नहीं करता है, इसलिए वहां आकर सभी पार्षदों से चर्चाकर इसका समाधान निकाल लिया जाएगा।
- देवीलाल धाकड़, जिलाध्यक्ष, भाजपा
सभी को समान रूप से मिलेगा अवसर
पार्षदों की मांग पर ही पीआईसी में बदलाव किया गया था।भाजपा के वर्तमान में २४ पार्षद है और ७ ही सभापति नियुक्त होते हैं।ऐसे में सभी को सभापति बनाना संभव नहीं है।सभी को मौका मिलेगा। संगठन से भी इस संबंध में चर्चाहो गई है।पार्षदों का आक्रोश है, उसे दूर कर दिया जाएगा।
- प्रहलाद बंधवार, नपा अध्यक्ष
Published on:
18 Apr 2018 08:39 pm
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