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कई घरों की कहानी है बिजली गुल मीटर चालू

कई घरों की कहानी है बिजली गुल मीटर चालू

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मंदसौर.
शाहिद कपूर और श्रद्धा कपूर अभिनीत फिल्म बत्ती गुल-मीटर चालू शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म बिजली के मुद्दे से जुड़ी है। फिल्म में मीटर बंद होने के बाद भी बिजली का बिल मिलने और उसे भरने की लड़ाई और फिर आत्महत्या तक की कहानी का बताया गया है। फिल्म का नायक अपने दोस्त के लिए इस लड़ाई को आगे बढ़ाता है। हालांकि ये तो एक फिल्म की कहानी है, परंतु हकीकत पर जनर डाले तो हमारे आसपास ऐसे कई लोग है, जिनके घरों पर उपभोग से कहीं अधिक बिल आ रहा है।


केस एक
ग्राम नगरी निवासी रामरतन पिता तुलसीराम धाकड़ के खेत पर बने कुएं को नगर परिषद द्वारा वर्ष २०१६ में पेयजल के लिए अधिग्रहण किया गया था। कुएं पर चलने वाली ट्यूबवेल के लिए विद्युत कनेक्शन, बिल और मेंटनेंस का खर्च निकाय को वहन करने का करार भी किया गया था। इसके बाद विद्युत कंपनी की ओर से रामरतन को करीब १ लाख २४ हजार रुपए का बिल प्रदान किया गया। रामरतन के पुत्र दिलीप ने इस पर आपत्ति ली और ट्यूबवेल नगर परिषद द्वारा अधिग्रहण किए जाने संबंधी पत्र भी बताया, परंतु कंपनी ने बिल राशि वसूलने के लिए उन्हें नोटिस भी भेजा। निकाय द्वारा अधिग्रहण किए जाने के बाद भी दिलीप को विद्युत बिल भरने के लिए विद्युत कंपनी की ओर से लगातार नोटिस भेजे गए। वहीं निकाय द्वारा अब तक उक्त बिल का भुगतान दिलीप को नहीं किया गया है। इस संबंध में उन्होंने केस भी दायर किया हुआ है। दिलीप का कहना है कि एक लाख २४ हजार रुपए का बिल देखकर ही वे परेशान हो गए थे। और विगत दो वर्षों से कंपनी के कार्यालय और न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं।


केस दो
मंदसौर के संजीत नाका परन एक छोटी डेयरी का संचालन करने वाले श्यामलाल राठौर का कहना है कि करीब ७ माह से उनकी डेयरी का बिल ७०० रुपए से अधिक नहीं आया है। माह सितंबर में उनका बिल ४९७० रुपए आया है। डेयरी पर एक पंखा, एक छोटा फ्री और एक ट्यूबलाइट है। इसके बाद भी इतना अधिक बिल आया है। कई बार वे विद्युत कंपनी के कार्यालय में चक्कर काट चुके हैं, परंतु कोई सुनने वाला नहीं है। यदि हर माह ऐसे अधिक राशि के बिल आया तो हम तो दुकान भी नहीं चला सकेंगे।

प्रतिदिन आते हैं 20 से अधिक लोग
वहीं कंपनी कार्यालय का आलम यह है कि प्रतिदिन 20 से अधिक लोग अधिक राशि का बिल होने की शिकायत लेकर विद्युत कंपनी के कार्यालय या अधिकारियों के पास पहुंचते हैं। इनमें कहीं को त्रुटि होती है तो उसे सुधार दिया जाता है। हालांकि कई बार एवरेज बिल का कहते हुए भी अधिकारी इन लोगों को टाल देते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को उपभोग न होने के बाद भी अधिक राशि का बिल जमा कराना होता है, अन्यथा कंपनी के कर्मचारी आकर बिजली काट देते हैं। व्यवसायिक या घरेलू दोनों ही स्थिति में अधिक राशि के बिल प्राप्त होने के मामले अधिकारियों के पास प्रतिदिन पहुंचते हैं।


1912 पर होती है बिल संबंधी शिकायत
इस संबंध में कार्यपालन यंत्री आरके नायर का कहना है कि प्रतिदिन 20 से 25 शिकायतें आती है। अधिक बिल के संबंध में कंपनी के शिकायत नंबर 1912 पर शिकायत की जाती है। शिकायत वहां से हमारे पास आने के बाद उसका निराकरण दिया जाता है। शिकायत मिलने पर उपभोक्ता के रिकॉर्ड और मीटिर रीडिंग की जांच की जाती है त्रुटि होने पर तत्काल सुधार कर दिया जाता है।