मंदसौर.
युवाओं को रोजगार देने के लिए हर माह रोजगार मेला लग रहा है तो योजनाओं से रोजगार का सजबाग भी दिखाया जा रहा है, लेकिन असल में जिले के युवाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर रोजगार हासिल करना पहाड़ चढऩे के समान है। नियमों के फेर में उलझकर सरकारी योजना के दम पर रोजगार का सपना युवाओं का अधूरा है। आंकड़ों को देख तो जिला सरकार की योजनाओं में प्रदेश में बेहतर स्थिति में होने का दावा कर रहाह ैलेकिन विभिन्न योजनाओ के ७ हजार ९५४ प्रकरण तो निरस्त कर दिए गए तो ३६१९ मामले दफ्तरों में ही लंबित पड़े है। इनमें सबसे अधिक युवाओं की उद्यम क्रांति योजना की है और इसी में प्रदेश में जिले के अव्वल होने की बात विभाग कर रहा है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन से लेकर उद्यम क्रांति व पथकर विक्रेता से लेकर आजीविका मिशन तक की अनेक योजनाओं के हालात एक से है।
विभागों से निकलकर बैंको तक पहुंचने में ही लग रहा है लंबा समय
लक्ष्यपूर्ति के लिए लगाए जा रहे मेलों में विभाग स्तर पर आवेदन की प्रक्रिया जैसे-तैसे पूरी भी हो रही है लेकिन यहां से चलकर प्रकरण बैंकों में पहुंचता है तो वही रह जाता है। बैंकों को ग्यारंटी से लेकर अन्य प्रक्रियाओं के कारण फाइलें लंबे समय तक टेबलों पर ही घुमती रहती है और युवा यहां चक्कर काटता रहता है। विभाग अपनी प्रक्रिया पूरी कर आंकड़ों की खानापूर्ति के दम पर भले ही अव्वल आने के साथ अपनी लक्ष्यपूर्ति का दावा कर रहा हो लेकिन कई प्रकरण जिन्हें अपात्र बताकर निरस्त किया जा रहा है या दस्तावेजों की कमी के कारण पूरा ही नहीं किया जाता है उनकी कही सुनवाई नहीं हो रही है। आवेदन करने के बाद युवा बैंकों से लेकर विभाग के चक्कर काटता रहता है।
उद्यम क्रांति से लेकर पथकर विक्रेता सबसे अधिक निरस्त तो लंबित मामले
सीएम उद्यम क्रांति योजना में ९५२ तो सीएम ग्रामीण पथकर विक्रेता के ६१८२ आवेदन निरस्त किए गए। वहीं आजीविका मिशन में ३५३ तो पीएम रोजगार सृजन में ५४, पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना में ४२ सहित १० विभागों की स्वरोजगार से जुड़ी विभिन्न योजनाओं में जिलेभर में ७ हजर ९५४ प्रकरणों को निरस्त किया गया है। जबकि उद्यम क्रांति व पथकर विक्रेता का लाभ लेने के लिए जिले के युवाओं ने सबसे अधिक रुचि दिखाई है और आवेदन किए है। लेकिन सबसे अधिक आवेदन इन्हीं योजना में निरस्त हुए तो लंबित प्रकरण भी इन्हीं योजनाओं के लंबित है। ५५९ प्रकरण उद्यम क्रांति में तो २१८९ प्रकरण पथकर विक्रेता योजना केहै। वहीं सभी विभागों की योजना में ३६१९ प्रकरण लंबित है।
रोजगार की योजनाओं की यह है स्थिति
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में ७८० को लाभ मिला जबकि २५७४ ने आवेदन किए थे। इसमें ९५२ प्रकरण निरस्त किए तो ५५९ लंबित पड़े है। वहीं पीएम रोजगार सृजन कर्यक्रम ममें ६० प्रकरण निरस्त हुए तो १५७ आवेदन आए थे। वहीं १९ लंबित है। पीएम स्वनिधि योजना में ७८९८ आवेदन आए थे। इसमें २८०७ को लाभ दियागया तो वही गामीण पथकर विक्रेता में १३ हजार ६४४ आवेदन में से लाभ सिर्फ ४९८५ को मिला तो वहीं ६१८२ प्रकरण निरस्त किए तो २१८९ मामले लंबित पड़े है। जिला व्यापार उद्योग केंद्र से लेकर पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्यपालन, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग, आदिम जाति कल्याण, जिला अंत्याव्यसायी, शहरी विकास अभिकरण, ग्रामीण आजीविका मिशन, उद्यानिकी विभाग, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, खादी ग्रामोद्योग आयोग की अलग-अलग योजनाों में शासन ने जिले को लक्ष्य भले ही १५ हजार १८७ का दिया लेकिन २८ हजार २८ प्रकरण विभागों ने तैयार किए लेकिन लाभ सिर्फ १२ हजार ८३५ को मिला तो ३ हजार ६१९ प्रकरण अभी भी विभागों से लेकर बैंकों के बीच झूल रहे है तो विभागोंने १४ हजार २९८ प्रकरण मंजूर किए थे।