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7 रुपये तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल! सरकार को उठाना होगा ये कदम

सरकार एक्साइज ड्यूटी कम कर देती है तो तेल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की कमी हो जाएगी लेकिन अर्थव्यवस्था पर बुरा असर देखने को मिल सकता है। इससे चालू खाता घाटा लक्ष्य से उपर निकलने का खतरा है। इसके साथ ही वित्तीय घाटा भी बढ़ने सकता है।
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नई दिल्ली

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Ashutosh Kumar Verma

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Updated: 9 Sep 2018, 1:41 PM IST

Petrol Diesel

7 रुपये तक सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल! सरकार को उठाना होगा ये कदम

नर्इ दिल्ली। देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। कीमतों में इतने बड़े उछाल का सबसे बड़ा कारण डाॅलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आैर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। राजधानी दिल्ली समेत देश के कर्इ शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकाॅर्ड हार्इ स्तर पर चल रहे हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी का आलम यह है कि बीते एक माह में इनके दाम में 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो गर्इ है। इससे परेशान लोग पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी तक को हटाने के मांग कर रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले तक पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की बात कर रहे थे लेकिन इसको लेकर सरकार ने अबतक अपना रूख साफ नहीं किया है। हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार के लिए सबसे बड़ा पेंच राज्य सरकारों को राजी करना है।


पीएम मोदी ने दिया ये सुझाव
अगर लोगों की मांग को मानते हुए सरकार एक्साइज ड्यूटी कम करती है तो सरकार को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी कम कर देती है तो तेल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की कमी हो जाएगी लेकिन अर्थव्यवस्था पर बुरा असर देखने को मिल सकता है। इससे चालू खाता घाटा लक्ष्य से उपर निकलने का खतरा है। इसके साथ ही वित्तीय घाटा भी बढ़ने सकता है। एेसे में सरकार इसके अलावा को कुछ दूरगामी राहत वाले विकल्प तलाशने होंगे। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने लाॅन्ग टर्म को ध्यान में एक सुझाव दिया है। भविष्य में तेल उत्पादक कंपनी आेएनजीसी पर विंडफाल टैक्स लगा सकती है। यदि एेसा संभव होता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती हो सकती है।


विंडफाॅल टैक्स का कैसे मिलेगा फायदा
पीएम मोदी की इस सुझाव पर इस मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि, विंडफाॅल टैक्स लगने से तेल विपणन कंपनियों के लिए कच्चे तेल की कीमत 70 डाॅलर प्रति बैरल तक ही सीमित हो सकती है। इस योजना के अमल लाने के बाद अगर भारतीय आॅयल फील्ड से तेल निकालकर कंपनियां 70 डाॅलर प्रति बैरल से अधिक दर पर बेचत हैं तो इससे होने वाले अामदनी का कुछ हिस्सा सरकार को भी देना होगा। इसका इस्तेमाल देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नियंत्रित किया जा सकता है। बता दें कि विंडफाॅल टैक्स एक खास तरह का तेल टैक्स है। इससे इकट्ठा होने वाली रकम तेल विपणन कंपनियों को दिया जाएगा ताकि कीमतों में बढ़ोतरी का नियंत्रित किया जा सके। फिलहाल ब्रिटेन समेत दुनिया के कर्इ विकसित देशों में लगाया जाता है। विंडफाॅल टैक्स को एक सेस के रूप में लगाया जा सकता है जिसे तेल की कीमतें 70 डाॅलर प्रति बैरल के उपर जाने पर लगाना होगा।


5 से 7 रुपये तक कम हो सकता है पेट्रोल-डीजल
वहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक दूसर विकल्प ये भी है कि एक्साइज ड्यूटी के साथ-साथ राज्य सरकारें भी वैट आैर सेल्स टैक्स में कटौती करें। इससे आम लोगों को तत्काल रूप से राहत मिल सकती है। यदि केंद्र सरकार आैर राज्य सरकारें मिलकर ये कदम उठाती है तो तेल की कीमतों 5 से 7 रुपये तक की कटौती देखने को मिल सकती है। हालांकि अभी तक ये सिर्फ एक अनुमान ही है। सरकार ने अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की कटौती का एेलान नहीं की है।