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Barsana Lathmar Holi : रस से भरी गालियां, प्रेम से पगी लाठियां खाकर भी बोलते हैं राधे-राधे

- Barsana Lathmar Holi 2021 : नंदगांव के हुरियारों और बरसाने की हुलहारिनों की ठिठोली जग प्रसिद्ध

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निर्मल राजपूत
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मथुरा. Barsana Lathmar Holi 2021. बरसाने और नंद गांव की होली गजब है। यहां रसभरी गालियां सुनने और प्रेम में पगी लाठियां खाने के लिए युवक और बूढ़े साल भर इंतजार करते हैं। यह परंपरा सैकड़ों साल से चली आ रही है। न सिर्फ भारत बल्कि विदेश में बरसाने की लठ्ठमार होली प्रसिद्ध है। हर साल यहां की होली का आनंद उठाने बड़ी संख्या में लोग बरसाने पहुंचते हैं।

होली पर सब जग होरी, बृज होरा की कहावत बृज में चरितार्थ होती है। मथुरा के गांव बरसाने में कृष्ण काल से ही लठ्ठमार होली खेली जा रही है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण बरसाना जाते थे तब वह राधा और उनकी सहेलियों के साथ हंसी ठिठोली किया करते थे। भगवान श्री कृष्ण की हंसी ठिठोली का जवाब राधा की सखियां डंडों से दिया करती थीं। तब से इसी परंपरा का निर्वहन बरसाना और नंद गांव के लोग करते आ रहे हैं।

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नंदगांव के हुरियारे जाते हैं बरसाना
बरसाने के लोग होली का निमंत्रण लेकर नंद गांव पहुंचते हैं। वे नंद गांव के हुरियारों को श्रीधाम बरसाना आने का निमंत्रण देते हैं। बरसाने के इस निमंत्रण पर नंद गांव के हुरियारे फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी पर होली खेलने के लिए बरसाने जाते हैं। जब वह गांव पहुंचते हैं तब लठ्ठमार होली डंडों और ढालों से खेली जाती है। बरसाने की महिलाएं नंद गांव के हुरियारों पर प्रेम पगी लाठियों से प्रहार करती हैं और नंद गांव के हुरियारे लठ के वार से बचने के लिए ढाल लगाकर बचने का प्रयास करते हैं।

अंग्रेज अफसर भी थे मुरीद
पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया बताते हैं कि करीब 147 साल पहले तत्कालीन मथुरा के अंग्रेज कलक्टर एफ एस ग्राउस 47 किलोमीटर दूर स्थित बरसाना गांव में होली देखने के लिए घोड़े से गए थे। उन्होंने बरसाने की लठमार होली के साथ-साथ गांव की होली के बारे में लिखा है। वे लिखते हैं कि जब बरसाने की हुरियारिनों द्वारा नंद गांव के हुरियारों पर लठ्ठ से प्रहार होता है तो मानो प्रेम रस बरसता है। यह अलौकिक नजारा होता है। इस समय नंद गांव के हुरियारे बरसाने की महिलाओं के साथ हंसी ठिठोली करते हैं। हंसी ठिठोली का जवाब देतीं महिलाएं नंद गांव के हुरियारों पर लाठियों से प्रहार करती है।

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सुबह से ही तैयारियां
लठ्ठमार होली की तैयारी सुबह से ही शुरू हो जाती है। भांग की कुटाई और छनाई के साथ ही दिन चढ़ते ही नंद गांव के हुरियारे बरसाना जाने की तैयारी में जुट जाते हैं। रास्ते में नंद गांव वासी अपनी पारंपरिक रसिया गायन के साथ गीत गुनगुनाते हुए रंग अबीर गुलाल उड़ाते हुए हंसी मजाक करते हुए बरसाना पहुंचते हैं। बरसाना में पीली पोखर पर उनका अभिवादन करने के लिए लोग तैयार रहते हैं। फिर नंद गांव के हुरियारे अपने पारंपरिक ध्वज लेकर बरसाने की गलियों की तरफ कूच करते हैं तब बरसाने के लोग उन पर रंग गुलाल उड़ाते हैं। इसी के साथ शुरू होता है लठ्ठमार होली का वह अलौकिक नजारा जिसे हर कोई देखना चाहता है।

लाडली दर्शन की परंपरा
श्रीधाम बरसाना में श्रीजी मंदिर पर नंद गांव के लोग हैं लाडली के दर्शन करते हैं। लाडली मंदिर में बैठकर नंद गांव के हुरियारे समाज गायन करते हैं। समाज गायन में जमकर गुलाल उड़ाया जाता है। वातावरण रंगीन हो जाता है। हर गली में रंग ही उड़ता है।

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