मथुरा। भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के साथ-साथ मथुरा कई ऋषि-मुनियों की तपस्थली भी रही है। द्वापर युग में यहां महर्षि दुर्वासा ने यमुना के तट पर तप किया था। आज भी यहां दुर्वासा ऋषि का आश्रम मौजूद है। यहां हजारों श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। साल में एक बार बसंत पंचमी पर यहां मेला भी लगता है।
इन रास्तों से पहुंचे आश्रम
मथुरा से करीब दो किलोमीटर दूर लक्ष्मीनगर नगर गांव में ऋषि दुर्वासा गौड़ीय आश्रम स्थित है। इस आश्रम तक पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं। पहला रास्ता है यमुना नदी से नाव में बैठकर मंदिर तक पहुंच सकते है। दूसरा रास्ता रोड से होकर जाता है। ट्रेन की पटरी को पार कर कच्चे रास्ते से होकर आप मंदिर पहुंच सकते हैं। ऋषि दुर्वासा का ये मंदिर एक ऊंचे टीले पर बना है। पूरे मंदिर प्रांगण में दुर्वासा ऋषि की प्रतिमा अलग अलग रूप में लगी हुई है। मंदिर काफी भव्य बना हुआ है।
दर्शन को आते हैं हजारों लोग
हर साल हजारों की तादाद में लोग दर्शन करने को दुर्वासा ऋषि के आश्रम में आते हैं। बसंत पंचमी पर इसका अलग ही महत्व होता है। बसंत पंचमी पर यहां मेला लगता है। लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। बसंत पंचमी के दिन से सभी मंदिरों में भी गुलाल की खुमार दिखना शुरू हो जाता है। मंदिर में दुर्वासा ऋषि के प्रतिमा को बसंती रंग के वस्त्र धारण कराए जाते हैं। लोगों नाचते गाते हैं। इस दिन के उत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।